नीट एंड क्लीन हो नीट परीक्षा


आखिरकार राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा यानी नीट के नतीजों पर लगी रोक को सुप्रीम कोर्ट ने हटा दिया है। देशभर के छात्र सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। यद्यपि सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है और सम्बद्ध पक्षों को नोटिस जारी किया है लेकिन विवाद के मुद्दे पर सुनवाई गर्मी की छुट्टियों के बाद में होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिया कि मद्रास हाईकोर्ट के फैसले से दाखिला प्रक्रिया में देरी हो रही थी। विवाद का मुद्दा यह है कि क्षेत्रीय भाषाओं में पूछे गए सवाल अंग्रेजी भाषा में पूछे गए सवालों के मुकाबले आसान थे या कठिन थे। मदुरै बैंच में लगाई गई याचिका में कहा गया कि क्षेत्रीय भाषा में पूछे गए सवाल आसान थे तो गुजरात हाईकोर्ट में लगाई गई याचिका में कहा गया कि गुजराती में पूछे गए सवाल अंग्रेजी के मुकाबले मुश्किल थे। आरोप यह भी था कि परीक्षा में एक जैसा प्रश्र पत्र नहीं था, अंग्रेजी और तमिल के प्रश्न पत्रों में अंतर था जबकि सीबीएसई बोर्ड का कहना है कि सभी पेपरों को मॉडरेटरों ने तय करके एक ही स्तर का निकाला था। सभी भाषाओं में पेपर का डिफीकल्टी लेवल एक जैसा ही था। सवाल यह है कि क्या ऐसा था या नहीं।

नीट परीक्षा का आयोजन मेडिकल और डेंटल कालेज में एमबीबीएस और बीडीएस कोर्सों में प्रवेश के लिए किया जाता है। मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया और डेंटल कौंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त कालेजों में इस राष्ट्र स्तरीय प्रवेश परीक्षा के आधार पर दाखिला दिया जाता है। हालांकि एम्स और जवाहर लाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजूकेशन एंड रिसर्च, पुड्डुचेरी को इस परीक्षा से छूट प्राप्त है। इन दोनों संस्थानों में मेडिकल कार्सेज में दाखिले के लिए अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करवाई जाती हैं। इससे पहले यह परीक्षा एआईपीएमटी कहलाती थी। प्राइवेट मेडिकल कालेज अपनी अलग परीक्षा लेते थे। सरकार ने पारदर्शिता, मेडिकल शिक्षा के उच्च मानक तय करने और छात्रों को कई परीक्षाओं के बोझ से बचाने के लिए देशभर के मेडिकल कालेजों में दाखिले की एक परीक्षा आयोजित कराने का फैसला लिया। नीट रिजल्ट पर रोक का मामला करीब 12 लाख परीक्षार्थियों के भविष्य से जुड़ा था। करीब साढ़े दस लाख छात्रों ने हिन्दी, अंग्रेजी में परीक्षा दी थी, जबकि लगभग डेढ़ लाख छात्रों ने 8 क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा दी थी। अब जबकि सीबीएसई ने नीट 2017 के परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करते हुए ओएमआर उत्तर पुस्तिकाओं और सवालों के जवाबों को सीबीएसई की वेबसाइट पर डाल दिया, जिसे छात्र दो दिन के भीतर चुनौती दे सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि परिणाम घोषित होने के बाद काउंसलिंग औैर दाखिला न्यायालय के समक्ष लम्बित केस के फैसले के अधीन होगा।

वैसे तो भारत विविधताओं से भरा देश है। हर किसी को संतुष्टï किया जाना बहुत कठिन है लेकिन यह शिकायत अक्सर रहती है कि क्षेत्रीय भाषाओं से भेदभाव किया जाता है। प्रश्रपत्रों का अलग-अलग होना कोई नई बात तो है नहीं लेकिन क्या ऐसा है कि 8 क्षेत्रीय भाषाओं में ली गई परीक्षा में प्रश्र पत्र किसी के लिए आसान तो किसी के लिए मुश्किल थे। सीबीएसई पर भेदभाव का आरोप लगाना ही दुर्भाग्यपूर्ण है। देशव्यापी परीक्षाओं में किसी से भी भेदभाव की गुंजाइश छोड़ी ही नहीं जानी चाहिए। सबकी अपनी-अपनी दलीलें हैं, समर्थन में भी और विरोध में भी। आज देश में जो हालात हैं उसमें क्षेत्रीय असंतोष का फैलना और उग्र रूप लेना देश के लिए नुक्सानदेह होगा। डाक्टर और इंजीनियर बनने के लिए सीटें लाखों में बिकती रही हैं, उससे भी काफी असंतोष फैलता रहा है। देश में शिक्षा माफिया तो नकली डाक्टर और नकली इंजीनियर बनाने में जुटा था। मेहनत करने वाले छात्र सड़कों पर घूमते रहे और लोग पैसे के बल पर इंजीनियर और डाक्टर बन गए। इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं में सभी से एक समान व्यवहार होना ही चाहिए। परीक्षा व्यवस्था पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त होनी ही चाहिए। किसी भी राज्य के छात्रों में ऐसा विचार आना ही नहीं चाहिए कि भाषा के नाम पर उनसे कोई भेदभाव किया गया है।

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