कांवडिय़ों की ‘गुंडागर्दी’!


धर्म के नाम पर भारत एक ऐसा देश है जहां कोई भी, कुछ भी कर सकता है। कोई भी धर्म हो उसे गुंडागर्दी की इजाजत नहीं दी जा सकती। पवित्र सावन का महीना जो भोले शिवशंकर नाथ के प्रति हमारी आस्था से जुड़ा है, वहीं लाखों शिवभक्त कावडिय़ों द्वारा शिव को समर्पित जलाभिषेक की एक उस परंपरा की भी याद दिलाता है जो हमें पुरखों ने दी है। दु:ख इस बात का है कि आजकल कांवडिय़े जो कुछ कर रहे हैं, वह भक्ति है, धार्मिक उन्माद है या फिर गुंडागर्दी जिसे रोकना होगा लेकिन यह गुंडागर्दी अपने सामने होते हुए देखकर भी पुलिस खामोश रहती है तो फिर सवाल खड़े होते हैं। प्रशासन खामोश रहता है, मन दुखी होता है। बात उस व्यवस्था की है जिसके तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि रात दस बजे के बाद कोई ऊंची आवाज में लाउडस्पीकर या डीजे इत्यादि नहीं चलाया जा सकता।

जब कभी ऐसा होता है तो अलर्ट नागरिक 100 नंबर पर पुलिस को फोन कर देते हैं और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की याद दिलाते हैं परंतु इन कांवडिय़ों के केस में यही सतर्क नागरिक और हमेशा लोगों की सुरक्षा का दम भरने वाली पुलिस क्यों आंखें मूंद लेते हैं। लोग एक-दूसरे से सोशल साइट्स पर आमतौर पर ऐसी ही बातें शेयर करते हैं या सावन के महीने में कांवडिय़ों की गुंडागर्दी का उल्लेख भी आपस में करते हैं। बस जिक्र ही होता है और कुछ नहीं होता। दिल्ली से गुजरने वाले कांवडिये दिल्ली वालों से सेवा सत्कार के बाद दिल्ली वालों की ही बहन-बेटियों से छेड़छाड़ करते हैं और बेखौफ निकल जाते है तो क्यों, इसका जवाब हमें चाहिए। कांवडिय़ों के कंधों पर जो पवित्र कांवड़ होती है उसके अलावा हाथों में हॉकियां और बेसबॉल के बैट की क्या जरूरत है? ऊंची आवाज में कानफाड़ू संगीत जो आसपास से गुजरने वालों को भी सावन के महीने में सुबह, दोपहर, शाम और रात भर परेशान करता है, के प्रति हमारी पुलिस और हमारे प्रशासनिक अधिकारी खामोश क्यों रहते हैं?

संभ्रांत महिलाओं और परिवारों के प्रति अभद्र भाषा, गाली-गलौज का इस्तेमाल करने का इन कांवडिय़ों को कोई अधिकार नहीं है। लोगों के वाहनों से तोडफ़ोड़ और होहल्ला किसी भी सूरत में शिवभक्ति नहीं कही जा सकती। पिछले दिनों हमें कई ऐसे लोग मिले जो इन कांवडिय़ों की गुंडागर्दी से त्रस्त थे और वे इस बात पर भी हैरान थे कि वहां से गुजर रहे पुलिस वाहनों ने भी सबकुछ देखकर इन कांवडिय़ों के प्रति कोई एक्शन नहीं लिया। यूं तो धार्मिक मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के लंबे-चौड़े आर्डर रोज निकल रहे हैं जो अतिक्रमण से जुड़े तो हैं ही, साथ ही किसी भी सूरत में, किसी भी धर्म के नाम पर जुलूस निकाल कर आम आदमी को परेशान करने से रोकते हैं। आम आदमी को परेशानी नहीं होनी चाहिए इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों और प्रशासन को कड़े निर्देश दे रखे हैं कि नियमों का पालन कड़ाई से होना चाहिए परंतु हमारे देश में चाहे शिव कांवडिय़े हों या मुसलमानों का कोई पर्व, जिस तरह से ये लोग बाइकों, स्कूटरों और कारों पर स्टंट करते हुए निकलते हैं, महिलाओं से छेड़छाड़ करते हैं इसे रोकने वाली पुलिस क्यों यह सब कुछ बर्दाश्त करती है?

यह सवाल हमसे भेंट करने वालों ने किया है? पूरी तरह से नशे में धुत होकर सड़कों पर चलना और शरीफ लोगों से छेड़छाड़ वह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यहां तक कि अनेक सामाजिक संगठनों के लाखों लोग इन कांवडिय़ों के लिए राहत शिविरों के साथ-साथ भंडारे भी लगाते हैं, जहां कांवडिय़ों को शानदार बैड के अलावा रैस्ट की व्यवस्था प्रदान की जाती है और इसके अलावा उनके पैरों और टांगों की लोग मालिस करते हैं। इतनी शानदार सेवा भक्ति के बदले में ये शिवभक्त कांवडिय़े हॉकियों से कौन सी भक्ति करते हैं, हमें इसका जवाब चाहिए? धार्मिक उन्माद को लेकर कुछ लोग इस देश में धर्म के ठेकेदार बने हुए हैं। कोई गौरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी कर रहा है और जब चाहे जिसे पीट-पीटकर अधमरा कर रहा है तो कोई शिवभक्ति के नाम पर कांवडिय़ा बनकर दैत्यों वाले काम कर रहा है।  हैरानगी इसी बात की है कि सुप्रीम कोर्ट के कड़े आदेशों के बावजूद प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर धर्म के इन तथाकथित ठेकेदारों, शिव कांवडिय़ों और गौरक्षकों के खिलाफ एक्शन की परंपरा कब शुरू होगी? यद्यपि खुद प्रधानमंत्री बार-बार गौरक्षकों के नाम पर गुंडागर्दी के खिलाफ कड़ा एक्शन लिए जाने की अपील कर चुके हैं परंतु पुलिस कब सक्रिय होगी, हमें इसका इंतजार है?

कहने वाले कहते हैं कि सावन के महीने में कांवड़ लाने वालों में अपराध प्रवृत्ति वाले लोग भी शामिल हो जाते हैं जिससे अपराधों में कमी आ जाती है, हमारा यह मानना है कि धर्म के नाम पर गुंडागर्दी हर सूरत में रोकनी होगी। हमारा सवाल है कि अगर इसी सरकार के शासन में कल कोई मुस्लिम संगठन ऐसी गुंडागर्दी से भरी हरकत कर दे तब पुलिस क्या करेगी? ऐसी स्थिति में हालात क्या होंगे इसकी कल्पना ही सचमुच चौंकाने वाली है। जहां बीफ के नाम पर किसी की भी जान ले ली जाए या गौरक्षा के नाम पर किसी की भी निर्मम पिटाई कर दी जाए या शिवभक्ति के नाम पर किसी भी संभ्रांत महिला से छेड़छाड़ कर दी जाए तो फिर पुलिस और प्रशासन कब तक हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहेंगे, हमें इसका जवाब चाहिए? हमारा मानना है कि शिव कांवडिय़ों में अपराधी तत्व शामिल होकर कुछ भी कर सकते हैं, क्योंकि हमारे यहां धर्म के नाम पर उल्टा-सीधा करने वालों की कमी नहीं है परंतु हमें दु:ख है कि हमने वह सब कुछ होते हुए देखा है, लोगों ने सबूत दिए हैं जो कांवडिय़ों की गुंडागर्दी की पोल खोल रहे हैं। देश की सांप्रदायिक एकता, सद्भाव और धर्मनिरपेक्षता जीवित रहनी चाहिए। यह देश के लोकतंत्र की खूबसूरती है कि विविधता से भरा देश एक है। राष्ट्र को एक रखने के लिए धर्म के नाम पर अराजकता का अंत करने के लिए भगवान शिव से प्रार्थना करनी होगी ताकि कोई और तांडव न कर सके।

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