कब तक…


आज मोदी जी के कारण हमारे देश की छवि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुत ऊंचाइयों पर है। जहां हमेशा भारत की छवि सपेरों का देश या गरीबों का देश के रूप में दिखाई जाती थी, आज विकासशील देश की छवि उभरकर आ रही है जिससे भारतीय होने पर गर्व महसूस होता है और विदेशों में रह रहे भारतीयों का सीना भी गर्व से ऊंचा होता है परन्तु दूसरी तरफ हमारे देश के अन्दर जो हालात बन रहे हैं, आये दिन कश्मीर में जवान मारे जा रहे हैं, उन जवानों की मांओं के कौन आंसू पौंछेगा, उन शहीदों की पत्नियों का कौन सहारा बनेगा, उनके अनाथ बच्चों को कौन पूछेगा। एक मां होने के नाते दिल चीर-चीर हो जाता है। खून के आंसू निकलते हैं जब अपने ही देश में अपनों के हाथों (मुझे नहीं मालूम इन्हें अपना कहूं या नहीं) जवान मारे जाते हैं। कश्मीर से मुझे ही क्या, सारे भारतवासियों को बहुत लगाव है। मैं शादी के तुरन्त बाद अश्विनी जी के साथ कश्मीर गई थी। उस समय हमारे अखबार के एजेंट अब्दुल्ला जी और उनके परिवार का स्वागत, उनका स्नेह, उनका भोजन, उनकी बेटियों से मिलना और उनके गिफ्ट-भेंटें कश्मीरी फिरिन अभी तक मेरे पास हैं।

मैं कभी नहीं भूलती और दूसरी तरफ हमारे संवाददाता मि. कौल और उनकी पत्नी का स्वागत, उनकी भेंट कानों के कश्मीरी झुमके मेरे पास हैं। तब कोई फर्क भी नहीं था, शांति थी। दूसरी बार मैं अश्विनी जी, उनकी माता, भाई, पिता अमर शहीद रोमेश चन्द्र जी के साथ अमरनाथ यात्रा के लिए गई थी तब फारूक अब्दुल्ला जी ने अपने घर पर लंच के लिए बुलाया था। कहने का भाव है कि न तो कोई फर्क था, शांति थी, टूरिज्म बहुत था। डल लेक, गुलमर्ग, खिलनमर्ग, पहलगाम की यादें ताजी हैं। परन्तु थोड़े समय बाद कश्मीरी पंडितों को वहां से निकाला गया। मैं क्योंकि पंडितों की बेटी हूं। मुझे बहुत पीड़ा हुई। अभी भी दिल में गहरा जख्म है। अपने ही देश में यह क्या है, कैसी विडम्बना है। अभी दो रोज पहले जब शब-ए-कद्र की मुबारक रात को पूरी दुनिया में मुस्लिम अपने गुनाहों से तौबा करते हुए खुदा की इबादत में डूबे हुए थे, उस समय श्रीनगर की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद के बाहर अलगाववादियों की समर्थक भीड़ ने जम्मू-कश्मीर के एक ईमानदार, कर्मठ पुलिस उपाधीक्षक डीएसपी मोहम्मद अयूब पंडित को पीट-पीटकर नंगा कर मार डाला। ये कैसे अलगाववादी लोग हैं जिनसे आज हैवानियत भी शर्मसार है। इन्सानियत भी शर्मिन्दा है। ऐसे लोगों को जन्म देने वाली माताएं भी शर्मिन्दा हैं जिनमें न दिल है न दिमाग। मैं अक्सर कहती हूं कि कोई भी अलगाववादी अपनी मां के पेट से पैदा नहीं होता, उसे हालात बनाते हैं जिसमें सबसे बड़ा कारण बेरोजगारी है परन्तु अब सोचती हूं ये लोग बिना दिल और दिमाग के पैदा हुए हैं जिन्हें कोई भी चन्द पैसों में खरीद कर अपने ही भाइयों को मरवा देता है।
सोते-सोते डर से नींद खुल जाती है।

उन मांओं, बच्चों, पत्नियों का दिल को हिला देने वाला रूदन (रोना), न थमने वाले आंसू बेचैन कर देते हैं। आखिर कब तक यह चलेगा। यही नहीं सेना के जवान संदीप जाधव ने अपने बेटे से वादा किया था कि वह उसके जन्मदिन पर घर जरूर आएंगे लेकिन किसी को नहीं मालूम था कि यह जवान देश के लिए शहीद होकर तिरंगे में लिपट कर घर पहुंचेगा। यह एक सैनिक या सिपाही या डीएसपी की हत्या नहीं होती बल्कि उनके पूरे परिवार की हत्या होती है, कौन पूछेगा उन्हें? थोड़े दिन तो सब श्रद्धांजलि देने आएंगे, सांत्वना भी देंगे परन्तु पूरी पहाड़ जैसी जिन्दगी कैसे कटेगी। आखिर में मैं अपने मजबूत सशक्त प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री और गृहमंत्री से पूछूंगी कि आखिर कब तक चलेगा यह। क्यों हम अपने देश में दुश्मनों को पनपने दे रहे हैं। क्या इन मांओं की चीखें, विलाप आपको नहीं हिलातीं, क्या आपके सीने में दिल इनके लिए नहीं रोता क्योंकि हमने यह पीड़ाएं सही हैं। बिन बाप के जिन्दगी काटना बहुत मुश्किल है। प्रधानमंत्री जी, कुछ तो करो क्योंकि सारे देश को, मुझको और खासकर देश के युवाओं को आपसे बड़ी उम्मीदें, आशाएं हैं। अगर आप कुछ न कर सके तो शायद आने वाला कोई भी शख्स कुछ नहीं कर सकेगा क्योंकि आप जमीन से जुड़े प्रधानमंत्री हो, आप देश का भूगोल-इतिहास अच्छी तरह से जानते हो। जब मैं लोकसभा चुनावों में गांव-गांव घूम रही थी तो देश के हर जवान, बूढ़े और महिलाओं के चेहरे पर एक आशा की किरण देखी थी जो सिर्फ मोदी जी के नाम की थी और आज हर शहीद की पत्नी, मां, बहन, बेटी आपसे उम्मीद रखती हैं कि या तो यह सब ठीक हो जाए या हमारे देश में रह रहे

दुश्मन भाग जाएं और हम सब फख्र से कह सकें :
अब किसी मां की कोख न उजड़े, अब वतन आजाद है
अब किसी का सुहाग न उजड़े, अब वतन आजाद है
अब किसी के सर से बाप का साया न उजड़े, अब वतन आजाद है
अब कोई घर न उजड़े, अब हमारा प्रधानमंत्री मोदी है।

log in

reset password

Back to
log in
Choose A Format
Poll
Voting to make decisions or determine opinions
Story
Formatted Text with Embeds and Visuals
List
The Classic Internet Listicles
Video
Youtube, Vimeo or Vine Embeds
Thanks for loving our story. Like our Facebook page to get more stories.

Send this to a friend