आखिर माला में क्यों होते है 108 मनके


जाप के लिए प्रयोग की जाने वाली माला में 108 मनके होते हैं परंतु इस संख्या के रहस्य को कम ही लोग जानते हैं। क्या है 108 मनकों का रहस्य, आइए जानें-

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जागृत आवस्था में शरीर की कुल 10 हजार 800 श्वसन की कल्पना की गई है। अत: समाधि या जप के दौरान भी इतने ही आराध्य के स्मरण अपेक्षित हैं। यदि इतना करने की समर्था न हो, तो अंतिम दो शून्य हटा कर न्यूनतम 108 जप कर सकते है। 108 की संख्या ब्रह्मा की प्रतीक मानी जाती है। नौ का अंक ब्रह्मा का प्रतीक है। विष्णु व सूर्य की एकात्मकता मानी गई है। अत: विष्णु सहित 12 सूर्य या आदित्य है। ब्रह्मा के 9 व आदित्य के 12, इस प्रकार इनका गुणन 108 होता है इसलिए परब्रह्म की पर्याय इस संख्या को पवित्र माना जाता है।

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ज्योतिष शास्त्रों में कुल 12 राशियों को मान्यता है। ये 12 राशियां 9 ग्रहों से प्रभावित रहती हंै। इन दोनों संख्याओं का गुणनफल भी 108 ही होता है। सौरमंडल में 27 नक्षत्र हैं तथा प्रत्येक नक्षत्र के चार चरण होते हैं। 27 का 4 से गुणनफल भी 108 होता है। ज्योतिष में भी इनके गुणन अनुसार 108 महादशाओं की चर्चा की गई है।

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