डायटिंग का शरीर पर पड़ सकता है बुरा प्रभाव


आज की तारीख में जिसे देखो वही कहता है कि वह डायटिंग पर है, वह वजन कम करने की दिशा में अपने खानपान को नियंत्रित कर रहा है। कुल मिलाकर लोग अब डाइट क्रेजी हो गये हैं। वेटलॉस डाइट, वेटलॉस ट्रिप और वेटलॉस एक्सरसाइज, वजन घटाने के लिए आजकल लोग न जानें कितने उपाय कर रहे हैं। आपका वजन थोड़ा सा भी ज्यादा है तो आप कम दूसरे लोग ज्यादा चिंतित है कि आपको अपना वजन कम करना चाहिए।

मैगजीन के कवर पेज पर स्किनी मेल फीमेल मॉडल्स को देखकर या फिर सेलिब्रिटीज का नपा-तुला बदन और पत्र पत्रिकाओं में सेलिब्रिटीज के अपने फिट फिगर के बारे में दिये गये कमेंट्स या उन्होंने अपना वजन कैसे-कैसे घटाया, कैसे उन्होंने अपने डाइट से ग्लूटिन और डेयरी प्रोडक्टस, गेहूं, कार्बोहाइड्रेट को कम से कम खाकर अपनीे बॉडी को खूबसूरत बनाए।

हाल ही में यूके के एक दैनिक समाचार पत्र ‘द टेलीग्राफ’ में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी, जिसमें बताया गया था कि यूके की ज्यादातर आबादी एक ऐसी बीमारी से पीडि़त है, जिसमें ग्लूटेन को खाना मना होता है। एक अनुमान के अनुसार वहां की 15 प्रतिशत आबादी लैक्टोस को पचा नहीं पातीं। इसीलिए वहां के फूड्स में पिछले 5 सालों में इस तरह के भोज्य पदार्थों में दोगुनी वृद्धि हो गई है।

क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट सीमा हिंगोरानी इस बारे में कहती हैं, ‘इस तरह के ऑब्शेसन को एक डिस्ऑर्डर का नाम दिया जाता है। हमारे समाज में कई लड़कियां इंटरनेट की जानकारी को ही पूर्ण मान लेती हैं और इस तरह की भोजनशैली अपनाती हैं, जो उनके लिए नुकसानदेह होती है। दरअसल अपने भोजन से पोषक तत्वों से भरी चीजों को बाहर करने का मतलब है, इसका आपके भावनात्मक और दिमागी स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।

आज की तारीख में डाइट शब्द अपने आपमें ही काफी भ्रमक हो गया है। डाइट का मतलब है भोजन कम से कम खाना। जबकि हकीकत में डाइट का तात्पर्य है, आपके द्वारा रोज लिया जाने वाला भोजन। संतुलित आहार के तहत प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा विटामिन और खनिज लवण की जरूरत हमारे शरीर को होती है ताकि हम अपने रोजमर्रा के काम सही तरह कर सकें।

कोई भी डाइट अनहेल्दी उसी स्थिति में होती है, अगर उनमें किसी चीज की अधिकता हो या कोई चीज बिल्कुल कम हों। अब चाहे बिना अनाज, बिना डेयरी प्रोडक्टस, कार्बोहाइड्रेट या सिर्फ अंगूर हो। फैट डाइट का यह मतलब नहीं है कि आप अपने खाने से इन तमाम चीजों और पौष्टिक तत्वों को अपने भोजन से बाहर कर दें। हां, अगर आप ऐसा करते हैं तो वजन घटाने का ये एक ऐसा तरीका होता है, जिसमें आपको कम मेहनत करनी पड़ती है लेकिन जिसका आपके शरीर को नुकसान होता है।

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