जीएसटी से आएगी देश में आर्थिक क्रांति


कहने को कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ सूचना और प्रसारण मंत्रालय के राज्यमंत्री हैं, लेकिन उनका कद इससे कहीं ऊंचा है। राठौड़ ऐसे सांसद हैं जिन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए अपने सांसद निधि कोष का भरपूर इस्तेमाल किया है। उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र जयपुर (ग्रामीण) में मिसाल कायम की है। क्षेत्र में युवाओं की जुबान पर राठौड़ का नाम चढ़ चुका है। राठौड़ ने अपने लोकसभा संसदीय क्षेत्र के हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक-एक खेल का मैदान बनवा दिया है। क्षेत्र के युवाओं के बीच ऐसी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी कायम कर दी है कि इससे खेल को जबरदस्त बढ़ावा मिल रहा है। केंद्र में मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर वह बताते हैं कि पिछली सरकारों में ‘दो तरफा संवाद’ नहीं था। यानी की सिर्फ सरकार ही कहती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। मोदी सरकार में जनता कहती है और सरकार सुनती है। प्रधानमंत्री मोदी के सभी मंत्री लोगों के बीच जाकर सरकार की नीतियां बता रहे हैं।

वैसे राठौड़ ने केंद्र की मोदी सरकार, राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार और अपने संसदीय क्षेत्र में कराए गए कार्यों को लेकर हैंडआउट तैयार कराया है। इसमें उन्होंने बताया है कि उनके मन में ‘संकल्प सेवा समर्पण’ का भाव है। उन्होंने जयपुर ग्रामीण के कायाकल्प का संकल्प भी लिया है। साथ ही लोगों को बताया है कि कैसे ‘सांसद आपके द्वार’ पहुंच रहा है। यही नहीं वे देश में ‘वन नेशन-वन टैक्स’ यानी जीएसटी को सफल बनाने के लिए मैदान में उतरे हुए हैं। देश की जनता को बता रहे हैं कि जीएसटी से उनकी लाइफ ‘पजल’ नहीं बल्कि ‘सरल; होने जा रही है। इन्हीं तमाम मुद्दों पर केंद्रीय सूचना और प्रसारण राज्यमंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ की पंजाब केसरी के सतेन्द्र त्रिपाठी व सुरेन्द्र पंडित के साथ खरी-खरी…

* मोदी सरकार के पिछले तीन साल के काम को किस तरह देखते हैं?
इस सरकार ने एक बड़ा काम जनता और सरकार के बीच ‘कम्युनिकेशन गैप’ को खत्म करने का किया है। मोदी सरकार का इस बात पर बड़ा जोर है कि संवाद दोतरफा हो। यह पहली बार है कि जब केंद्र के मंत्री देश की जनता के बीच जा-जाकर सरकार की योजनाओं और उनकी नीतियों से अवगत करवा रहे हैं। इससे पहले लोगों को यही नहीं पता होता था कि अगर किसान है तो उनके फायदे की क्या-क्या चीज हैं या सरकार ने ऐसा क्या नया किया है जिसका लाभ उन्हें मिल सकता है। अभी तक दोतरफा संवाद नहीं था। हमने इसकी शुरुआत की। 2016 का जब बजट बना उससे पहले तय हुआ कि पूरे फरवरी के महीने में सभी सांसद दो लोकसभा क्षेत्रों में जाएंगे और 48 घंटे तक रहेंगे। अलग-अलग संगठनों से मिलेंगे। इसमें किसान, व्यापारी व यूथ से मिलेंगे। इससे जो फीडबैक आया, उसको लेकर हम लोग आए और 2016 का बजट बना। उसके बाद दूसरे साल (2017) में हर मंत्री यानी 70 मंत्रियों को आठ राज्यों में भेजा गया और एक भी राज्य रिपीट नहीं हुआ। इस तरह से कोई जिला नहीं छूटा होगा जहां मंत्री नहीं पहुंचे। अब तीन साल पूरे हुए तो 900 इवेंट हुए। एवरेज निकला हर जिले के अंदर डेढ़ इवेंट। यानी देश में कोई जिला ऐसा नहीं छूटा जहां भारत सरकार का मंत्री नहीं पहुंचा।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के साथ बातचीत करते पंजाब केसरी के निदेशक आदित्य नारायण चोपड़ा।

* दूरदर्शन और एआईआर को सुधारने की कवायद कब पूरी होगी?
सेब की सेब से ही तुलना की जाती है। अब किसी चैनल को कहिए कि 23 भाषा में कार्यक्रम बना कर दिखाएं। हम केवल मुंबई में कार्यक्रम नहीं बनाते हैं, बल्कि उन्हीं क्षेत्रों में यह काम होते हैं। 50 फीसदी कार्यक्रम वहीं के लोग ही बनाएंगे। हम लोग निवेश कर रहे हैं। हम केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि संस्कृति को भी सपोर्ट कर रहे हैं। यह पब्लिक सर्विस है। हमारा सबसे अधिक खर्चा टैरिसटियल प्रसारण पर होता है। अगर आप किसी चैनल को कहेंगे कि टावर लगाएं और टैरिसटियल दिखाएं तो साफ मना कर देंगे। कहेंगे नहीं हम लोग सेटेलाइट से ही ठीक हैं। जहां तक ऑल इंडिया रेडियो की बात है तो 45 प्रतिशत कवर है एफएम स्टेशन है। उसको हम दो सालों में 65 प्रतिशत पर ले जाएंगे। एफएम कवरेज बड़ा हो रहा है। इसके अलावा फ्री डिश हैं। सबसे ज्यादा सबस्क्राइबर फ्री डिश पर हैं। हमारी पहुंच बहुत जबरदस्त है।

* कांग्रेस के जीएसटी और आपके जीएसटी प्रारूप में क्या फर्क है?
कांग्रेस तो खैर अपनी रणनीति खो चुकी है। उनका जो ध्रुव था वह लुप्त हो चुका है। काफी बातें ऐसी होती हैं जिसका तर्क नहीं होता। यह 18 प्रतिशत का निश्चय किसने किया ? सभी राज्यों ने मिलकर तय किया। इसमें कांग्रेस के भी राज्य हैं। अब पार्टी क्या कहती है और उनके मुख्यमंत्री क्या कहते हैं, कम से कम एक मत तो हो जाएं। दूसरा लोगों को समझाने की बजाय एक भ्रम फैलाने का काम किया है। अब उन्होंने बिस्कुट पर टैक्स लगाने का मसला उठा कर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की है। जबकि बिस्कुट कई तरह के होते हैं। विदेशों से भी बिस्कुट आते हैं। जीएसटी में बिस्कुट पर टैक्स अलग-अलग है। इनपुट के हिसाब से, पैकेजिंग के अनुसार कुछ बिस्कुट 18 प्रतिशत पर हैं तो कुछ बिस्कुट 0 प्रतिशत पर हैं।

जीएसटी को लेकर कंफ्यूजन, कैसे निपटेगी सरकार?
सबसे पहले बड़े रूप में कहें तो देश के अंदर ‘फाइनेंशियल (आर्थिक) क्रांति’ आ रही है। जिस तरह का सिस्टम जीएसटी के तहत शुरू की गई है, वास्तव में यह एक ‘सेल्फ पुलिसिंग सिस्टम’ की तरह है। यानी की नीचे से लेकर ऊपर तक के कारोबारी एक-दूसरे से लिंक हो जाएंगे और एक चेन बन जाएगी। इससे टैक्स नेट बढऩे लगेगा। यहां यह जान लें कि आप पर टैक्स जरूर लग जाएगा, लेकिन इनपुट से काफी हद तक कम हो जाएगा। टैक्स से सभी को जोड़ा जाएगा। जल्द ही बहुत सारी कंफ्यूजन अपने-आप ही खत्म हो जाएगा। जहां तक फार्म 37 का सवाल है तो इसमें तीन डेट दी गई है। इसमें 10, 15, और 20 तारीख। इसमें व्यक्ति पहले कारोबारी 10 तारीख को पिछले महीने का टैक्स भरेगा। उसके बाद बाकी रिपोर्ट जनरेट होंगी वह ऑटोमैटिक जनरेट होंगी। लेकिन हर व्यक्ति एक ही बार जमा करेगा।

20 लाख से कम टर्नओवर है तो जीएसटी लागू नहीं…
छोटे-छोटे दुकानों को इस बात का भ्रम है कि जीएसटी से उनके ऊपर क्या प्रभाव पड़ेगा, लेकिन यहां यह साफ कर दें कि 20 लाख से कम टर्नओवर वाले कारोबारियों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। अत: ऐसे लोग किसी भी तह से कारोबार कर सकते हैं। यही नहीं जो 20 लाख से 75 लाख तक के टर्नओवर वाले हैं, उन्हें सिर्फ सिम्पल हिसाब-किताब रखना है। जो 75 लाख से ऊपर के हैं उनको अपना हिसाब-किताब ऑनलाइन रखने की जरूरत है। इससे जीएसटी से एक फायदा और होगा कि अब अगर किसी कारोबारी को बैंक से लोन की जरूरत है तो आपको बैंक को बहुत कुछ बताने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आसानी से लोन भी मिलेगा।

लोकसभा क्षेत्र में किए ढेरों काम

मेरे लोकसभा क्षेत्र में 5 विधानसभा हैं, जो कि राष्ट्रीय राजमार्ग से होकर निकलता है। इस राजमार्ग पर 17 फ्लाईओवर थे जो बाकी थे, लेकिन अब सिर्फ मेरे लोकसभा क्षेत्र में सिर्फ दो फ्लाईओवर बाकी हैं। 11 फ्लाईओवर पूरे हो चुके हैं। पिछले तीन साल के भीतर। नितिन गडकरी जी को इसके लिए धन्यवाद करूंगा। सर्विस लेन का काम दिसंबर, 2017 तक खत्म हो जाएगा। जब हम सरकार में आए तो इस बात का अध्ययन किया गया तो पाया कि इस राष्ट्रीय राजमार्ग के कारण आसपास रहने वाले ग्रामीण लोगों को रास्ता पार करने का साधन ही नहीं दिया गया। लोग जान जोखिम में डालकर सड़क पार करते हैं। 21 ब्लैक स्पॉट हम लोगों ने चिह्नित किए। जहां पर लगातार हादसे हो रहे थे। हादसों की संख्या 1000 तक पहुंच जाती है। बहुत बड़ा नुकसान है ये। अब 21 स्पॉट चिह्नित किए गए हंै। इसमें मेरे लोकसभा क्षेत्र में 12 फुटओवर ब्रिज बनने शुरू हो जाएंगे। इस पर केवल पैदल ही नहीं बल्कि मोटरसाइकिलें आसानी से सड़क पार कर सकेंगी। पिछली सरकार ने मंडी-अस्पताल के पास भी सड़क पार करने की सुविधा नहीं रखी थी। इसके अलावा मेरे क्षेत्र में युवा बहुत हैं जो दिल्ली और जयपुर की ओर देखते हैं, उन युवाओं के लिए मैंने अपने क्षेत्र में ही बहुत काम किया है।

सेना की भर्ती के लिए कैम्प की शुरुआत कराई…
मेरे क्षेत्र में पिछले 6 साल से सेना की भर्ती नहीं हो रही थी। उसको मैंने 2015 में शुरू कराया। अब लगातार सेना की भर्ती होती है। अब एक रिकॉर्ड भी बन गया है पूरे देश में जहां सबसे ज्यादा युवा सेना में भर्ती (45 हजार) के लिए आते हैं, वह जयपुर जिला है। यहां पर क्योंकि भर्ती हर साल होती है। इसके अलावा हमने सोचा कि क्यों नहीं जिस तरह से आईआईटी और आईएएस में जाने के लिए युवा कोचिंग लेते हैं तो ऐसे युवाओं को भी ट्रेनिंग दी जाए जो सेना में भर्ती होना चाहते हैं। उनके लिए विशेष क्लास लगाई जाएं जहां उन्हें बताया जाए कि कैसी परीक्षा होती है, कैसे फिजिकल होता है। हमने एक महीने की रैली कराई थी। 24 मैदान तैयार कराए गए थे। सेना और बीएसएफ को बुलाकर 24 हजार यूथ को ट्रेनिंग दिलवाई। एक महीने की नि:शुल्क ट्रेनिंग चली। अब यह हर सेना की भर्ती से पहले अब यह ट्रेनिंग होगी।

22 जुलाई को रोजगार मेला…
इसके अलावा 22 जुलाई को रोजगार मेला लगा रहे हैं। उसमें दिल्ली, कोटा, जोधपुर से कंपनियों को बुलाएंगे। इसमें हर बूथ से दो बच्चों को इंटरव्यू के लिए बिठाएंगे। इसमें 25 हजार यूथ को चुना गया है। उम्मीद है कि इसमें 300-400 युवाओं को नौकरी तो मिलेगी ही। ये हम हर साल कराएंगे।

कोष का सबसे अधिक इस्तेमाल…
सांसद निधि का पैसों में सबसे ज्यादा विकास के कार्यों में मैंने खर्च किया है। उसका ज्यादातर फोकस स्कूल की इमारतों को मजबूत करने में, सामुदायिक भवन आदि बनाने में इस तरह का पैसा लगाया। कुंडा विधानसभा में केंद्रीय विद्यालय का उद्घाटन किया है। छात्रावास जो एसटी के लिए होता है उसके लिए 11 करोड़ रुपए केंद्र ने आवंटित कर दिया है। विराट नगर विधानसभा में बहुत से प्राचीन मंदिर है। यहां पर पर्यटन को बढ़ाने के लिए केंद्र से 10 करोड़ रुपए लेकर आया हूं। इस क्षेत्र को पर्यटन के दृष्टि से विकसित करना है।

युवाओं में खेल भावना…
सेना भर्ती के लिए जब युवा जुटे तो हमने कबड्डी कराई, जिसे ‘कबड्डी महाखेल’ नाम दिया गया। इसमें 362 ग्राम पंचायतें, 512 टीमें, 5500 खिलाड़ी, 32 स्थान, 64 खेल मैदान, 23 महिला टीमें, 320 भामाशाह, 128 प्रशिक्षक तथा 90 हजार दर्शक जुटते हैं। इसके बाद बॉलीबाल होगा। अन्य खेल भी होंगे। एक खास बात यह है कि इसमें विजेता टीम को जो नगर राशि तो मिलती ही है। इसके अलावा जीतने वाले गांव को सांसद कोष से 21 लाख रुपए मिलते हैं, स्पोटर्स स्टेडियम बनाने के लिए। उस स्टेडियम के अंदर जो टीम जीती थी, उनका नाम चढ़ता है न कि सांसद का नाम। हर जगह उद्घाटन होता है तो नेताओं के नाम चढ़ते हैं लेकिन यहां पर खिलाडिय़ों का नाम चढ़ता है। लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग ऐसे हर साल चार मुकाबले होते हैं। यानी की हर साल 8 स्टेडियम सिर्फ सांसद कोष से। इसके अलावा केंद्र से 10 करोड़ रुपए स्पोट्र्स मीनिस्टरी से लेकर आया हूं। तीन बड़े स्टेडियम के लिए। कबड्डी के लिए 64 ग्राउंड तैयार किए हैं। अब यह देखा जा रहा है कि जो ग्राउंड को लगातार इस्तेमाल कर रहे हैं उनमें से 32 पर फ्लड लाइन लगवाऊंगा। इसके अलावा ओपन जिम भी लगवा रहा हूं।

* टॉप लेबल पर कोई स्कैम नहीं हो रहा है…
मोदी सरकार ने दोनों फ्रंट पर शानदार काम किया है। पहला तो यही कि टॉप लेबल पर कोई स्कैम नहीं हो रहा है, कोई धांधली नहीं हो रही है। धीरे-धीरे इसका असर नीचे तक पहुंचेगा। पूरे देश के अंदर एक मैसेज जा रहा है कि गलत काम नहीं चलेगा। दूसरे सरकार ने साधन बढ़ाने पर जोर दिया है। नोटबंदी का असर हुआ है। बैंकों के पास घरों में जमा पैसा पहुंच गया है। इससे बैंकों को लोन देने का दायरा बढ़ा है। साधनों को बढ़ाया गया है।

* अभी तक सरकार यह क्यों नहीं बता पा रही है कि नोटबंदी के बाद कितना पैसा बैकों में पहुंचा ?
मेरे ख्याल से इस पर बहुत सी रिपोटर््स आ चुकी हैं। खासबात यह है कि दुनिया की टॉप दो एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद भारत में महंगाई पर रोक लगेगी। चीजें सस्ती होंगी और रोजगार बढ़ेगा। तीनों को जोड़ा जाए तो मैं कह सकता हूं कि जीएसटी के बाद कोई राज्य सरकार अपने से कोई टैक्स नहीं बढ़ा सकते हैं। जीएसटी काउंसिल एक साथ बैठेगी तभी कोई टैक्स लगेगा।

* ये बताएं कि अगर मैंने कोई खरीद कैश (ब्लैक मनी) में की और उसे शो नहीं किया तो क्या होगा?
कैश से कोई प्रॉब्लम नहीं है, लेकिन बताना तो पड़ेगा। ब्लैक मनी से दिक्कत होगी। आपको कहीं न कहीं एक्सप्लेन करना पड़ेगा। ये जो सिस्टम है इसके तहत सब को टैक्स के दायरे में लाना है। आपका जो टैक्स होगा। इससे आपके लिए ही सरकार के पास बहुत सारे साधन जुट जाएंगे। सड़क, डिस्पेंसरी बनाने में दिक्कत नहीं होगी, साधन बढ़ेगा। सुविधाएं बढ़ेंगी। टैक्स से मिलने वाला पैसा आप के लिए होगा।

* जीएसटी के अलावा विरोधी पार्टियां किसानों को लेकर भी सरकार को घेरने में लगी हैं ?
किसानों के लिए जो काम इस सरकार ने किया है, इससे पहले की सरकारों ने कभी नहीं किया। अब कृषि बीमा योजना में फसल खराब होने की स्थिति में सौ फीसदी तक का मुआवजा दिया जा रहा है। जबकि पहले यह 50 फीसदी तक था। विभिन्न स्थितियों में किसानों को फायदा दिया गया है। अब बीमा योजना में प्रीमियम भी कर दिया गया। गन्ने का बकाया चुकाया गया। फर्टिलाइजर किसानों तक नहीं पहुंचता था। चोरी हो जाती थी। कच्ची दारू बना दी जाती थी। पिछले 60 सालों में किसी ने यह क्यों नहीं सोचा कि नीम की कोटिंग कर दी जाए तो चोरी बंद हो जाएगी। मैं आपको यह बता दूं कि इस यूरिया से कुछ लोगों को इतना फायदा होता था कि आप सोच भी नहीं सकते हैं। अब कुछ राज्य किसानों का कर्ज भी माफ कर रही है। लेकिन यहां एक बात बता दें कि यह कर्ज केंद्र सरकार की मदद से नहीं बल्कि राज्य सरकारें अपने स्तर पर ही कर रही हैं। इसमें यूपी ने किया अब महाराष्ट्र कर रहा है।

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