आईआईटी-जेईई तैयारी के लिए एक साल ड्रॉप, सही या गलत?


भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भारत का सबसे अच्छा तकनीकी संस्थाना माना जाता है और इनकी विश्वभर में अग्रणी स्थिति भी रही है। प्रत्येक इंजीनियरिंग आकांक्षी की आईआईटी में पढ़ने की इच्छा रहती है। लेकिन आईआईटी की राह पूरी तरह से चुनौतीपूर्ण है। इस चुनौती से निपटने के लिए, छात्र को अपने कैरियर की प्लानिंग जल्दी करनी होती है। एक क्रमागत योजना बनाएं और सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है उस योजना का पालन करें जिससे कि आपका लक्ष्य आपको नज़दीक दिखलाई पड़ने लगे। लेकिन वास्तिवकता इससे परे हैं, अधिकांश छात्र आधी-अधूरी योजना के साथ तैयारी करते हैं, उन्हें अपने निर्धारित लक्ष्य को पाने के लिए जल्दी लगी रहती है; इसके अतिरिक्त एक ही वर्ष में आईआईटी-जेईई और कक्षा में बैठना, इन वास्तविक दिक्कतों के लिए और भी ज्यादा चुनौती खड़ी कर देता है। संचयी प्रभाव समग्र प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं और आत्मविश्वास में कमी लाते हैं। इस प्रकार पतन से ”उत्थान” का दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए। वर्षों से हमने ऐसे छात्रों को देखा है जिन्होंने सावधानीपूर्वक अपना लक्ष्य बनाया है और स्पष्ट रहा है कि ”कौन से कॉलेज में प्रवेश करना है” और ”किस ब्रांच में अध्ययन करना है” और इस प्रकार वे आईआईटी-जेईई परीक्षा को काटने में सफल रहे हैं। इसीलिए यह सवाल कि क्या छात्रों को नए प्लान के साथ तैयारी करनी चाहिए और आईआईटी-जेईई तैयारी के लिए एक अतिरिक्त वर्ष लगाना चाहिए का जवाब ”हां” में हो सकता है।
फिर आप यह कैसे फैसला करेंगे कि आईआईटी-जेईई तैयारी के लिए एक साल छोड़ना आप पर लागू होता है?


• जेईई एडवांस के लिए जेईई मैन्स क्वालिफाई नहीं कर सके: आमतौर पर ऐसा एक या ज्यादा निम्लिखित वजहों से होता है:

 जेईई मेन एक्जाम वाले दिन अच्छा नहीं कर पाए
 कक्षा  के बोर्ड पर ज्यादा फोकस करने की वजह से समय से रिवाइज नहीं कर पाए विशेषकर कक्षा ङ्गढ्ढ के सिलेबस पर।
 सिमुलेटेड टेस्ट एनवायरमेंट में अ यास की कमी
 एग्जाम के स्वभाव की जानकारी का अभाव
 प्रभावशाली रिवीजन नोट की कमी
 एनसीईआरटी की पुस्तकों की उपेक्षा तथा अपर्याप्त तैयारी

• जेईई एडवांस के लिए जेईई मेन तो क्लियर कर लिया, लेकिन जेईई एडवांस में परफोरमेंस उमीदों से काफी कम: यदि आप जेईई मेन पास कर लेते हैं, तो इसका अर्थ है आप अच्छे हैं। लेकिन जेईई एडवांस पास करने के लिए किसी भी छात्र को आसाधारण प्रदर्शन करने की     जरूरत होती है। इस प्रकार यदि, परफोरमेंस उ मीदों से काफी नीचे रही है, जोकि अक्सर नि नलिखित एक या अधिक वजहों से होता है:
 जेईई एडवांस एक्जाम वाले दिन अच्छा नहीं कर पाए
 सरप्राइज इलेमेंट विशेषकर 3 कॉलम विकल्पों के परिचय – मेट्रिक्स मेच टाइप प्रश्नों में जहां सभी 3 कॉलम को मिलान करना होता है,   जोकि थोड़ा सा कठिन और काफी समय खपाने वाला होता है, में अच्छा नहीं कर पाए।
 प्रेशर नहीं झेल पाए।
 केलकुलेशन में मूर्खतापूर्ण गलतियां हो गईं
 क्लीयर कट स्टडी/रिवीजन स्ट्रेटजी की अनुपस्थिति में जेईई मेन तथा जेईई एडवांस के बीच 6-7 सप्ताह के समय को प्रभावीढंग से इस्तेमाल नहीं कर सके।
 एग्जाम के स्वभाव की जानकारी का अभाव

• जेईई मेन तथा एडवांस्ड के लिए बहुत थोड़ा और/या बिल्कुल फोकस नहीं किया।

 इस प्रकार आईआईटीजेईई के मामले में आपका एलाइनमेंट और ओरिएंटेशन अपेक्षित आकार नहीं ले सका।

•  प्रतियोगी मानसिकता के विकास को रोकती है जोकि आईआईटीजेईई में बेहतर करने के बहुत जरूरी है। कम उम्र से ही प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने से, आपके आईक्यू, लॉजिकल और एनालिटीकल थिंकिंग योग्यता को विकसित होने में मदद मिलती है, आप निरंतर परीक्षा परिस्थितियों में परर्फोम करने में समर्थ होते हैं, प्रतियोगी मानसिकता का विकास होता है और विश्वास बढ़ता है। ये सभी आवश्यक कौशल हैं तथा आईआईटीजेईई में अच्छा करने के लिए ज्ञान के आलावा इन आवश्यक कौशल का होना जरूरी है।
• स्टडी ब्रांच और/या पसंदीदा कॉलेज के स बन्ध में उ मीद बेमेल उ मीद
ब्रांच/कॉलेज विकल्प जोकि छात्र ”आल इण्डिया रेंक”  के आधार पर पाते हैं, कभी-कभी टोर्गेट ब्रांच/कॉलेज से मेल नहीं खाते।
आईआईटी-जेईई में तैयारी के लिए एक अतिरिक्त वर्ष लगाने के फायदे
• प्रेशर कम होता है – जेईई (एडवांस और मेन) के लिए फोकस किया जा सकता है
• पिछली गलतियों से सीखने का मौका मिलता है और इस प्रकार उन्हें दोहराने से बचा जा सकता है।
• व्यापक तैयारी करने के लिए समय मिलता है
• पिछली परफोरमेंस (यदि जेईई मेन और एडवांस्ड में बैठ चुके हैं) को सुधारने का मौका मिलता है
• अपना मनचाहा कॉलेज मिलने की उ मीद बढ़ जाती है
 प्रतिष्ठित/प्रीमियम कॉलेज के लक्षण
– उत्कृष्ट आकादमी
– उत्कृष्ट फेकल्टी
– शानदार शोध अवसर
– आधारभूतढांचा
– अतिरिक्त पाठ्यक्रम और खेल सुविधाएं
– शानदार प्लेसमेंट अवसर उदाहरण के लिए आईआईटी देहली करंट बैच के लिए प्लेसमेंट सहयोग के मामले में अपने पीयर्स के बीच सबसे ऊपर है।

• प्लान क्च के तौर पर अन्य अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए प्रावधान देना समर्थ बनाता है कई अच्छे इंजीनियरिंग संस्थान हैं जैसे राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, और सरकारी-निधि प्राप्त तकनीकी संस्थान, जो केवल उन्हीं छात्रों को प्रवेश देते हैं जो जेईई मेन परीक्षा पास करते हैं। छात्रों को उनकी जेईई मेन रेंक के आधार पर अंडरग्रेजुएट इंजीनियरिंग कार्यक्रमों में पंजीकृत किया जाता है। आईआईटी-जेईई की तैयारी के लिए एक और वर्ष में निवेश करने का निर्णय सजग होना चाहिए न कि आपको यह सोचना चाहिए कि असफल होने के लिए केवल एक ही विकल्प है। वास्तव में छात्र को यह ध्यान रखना चाहिए कि ”पतन का अर्थ असफल नहीं होता।” हम केवल गिरकर ही सीख सकते हैं और भविष्य में दोहराव से बचने के लिए आवश्यक बदलाव कर सकते हैं। लेकिन, यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि तैयारी के लिए ढांचागत एवं वैज्ञानिक नजरिया आपको जरूर सफलता दिला सकता है और यहां एफआईआईटीजेईई एक्सपर्ट के कुछ टिप्स दिये जा रहे हैं:

• सिलेबस/निर्धारित पुस्तकों से दूर न जाएं
छात्रों के बीच में यह एक आम चलन है कि वे कीई ज्यादा अध्ययन सामग्रियों और/या टेस्ट पेपर से कंसल्ट करते हैं और परिणामस्वरूप वे अध्ययन का समापन अपेक्षा से अधिक से करते हैं। इसीलिए छात्रों को केवल, आईआईटी-जेईई के लिए स बन्धित सिलेबस की ही तैयारी करनी चाहिए।

• यह आंकलन करें कि जेईई (मेन तथा एडवांस्ड) में ”क्या” गलत हुआ और ”क्यों”
• कमजोर एरिया का पता लगाएं और एक्सपर्ट फेकल्टी से कंसल्ट करें।
• याद रखें, आपको अध्ययन करते समय प्रतियोगी माहौल की जरूरत है जिससे कि आप साथी समूहों से भी सीख सकें। ऐसे ग्रुप की तलाश करें या कोचिंग इंस्टीट्यूट ज्वाइन करें जो ऐसे समूह प्रदान करते हैं।
• एक लक्ष्य निर्धारित कर वीकली स्टडी प्लान की तैयारी करें। इस प्लान पर हर हालत में चिपके रहें।
• आधारभूत अवधारणाओं तथा इसके अनुप्रयोग पर फोकस करें।
• दिस बर, 2017 तक सिलेबस पूरा करने की कोशिश करें, जससे कि आप उपयुक्ततरीके से रिवाइज कर सकें।
• अच्छी क्वालिटी के रिवीजन नोट्स तैयार करें जिससे कि बाद में आप क्विक रिवीजन कर सकें। यदि आप बोर्ड में दुबारा बैठने जा रहे हैं, तो यह सुनिश्चित करें कि आपके मॉडल उत्तर और नोट्स भी तैयार हों। अपनी प्रगति जांचने के लिए स्टैण्डर्ड आल इण्डिया मॉक टेस्ट की जितनी ज्यादा संभव हो उतनी तैयारी करें। मॉक में अपने प्रतिशत पर निगरानी रखें जिससे कि आप सुनिश्चित हो सकें कि आप छात्रों की टॉप केटगरी में आने वाले हैं। ”रेंक पोटेंशियल इंडेक्स” जो आपको यह संकेत देता है कि वास्तविक परीक्षा में आपको क्या रेंक मिलने वाली, से इसकी समीक्षा करें।

• अपने मजबूत पक्ष व कमजोरी का आंकलन
आईआईटी-जेईई में फिर से बैठने वाले छात्रों को हमेशा लाभ होता है क्योंकि वह परीक्षा लिखने की प्रक्रिया/अनुभव से पहले ही गुजर चुके हैं। वह अच्छी तरह से जानते हैं कि दूसरे प्रयास में ”क्या करें” और ”क्या न करें” । इस प्रकार छात्र को क्या करें और क्या न करें का पिछला अनुभव हमेशा ध्यान में रखना चाहिए। दूसरे प्रयास में आईआईटी-जेईई के लिए बैठते समय पिछली परफोरमेंस को ध्यान में रखना को बुरा निर्णय नहीं है। एक साल का निरंतर प्रयास और केवल आईआईटी-जेईई तैयारी पर फोकस करना, छात्रों को अपने लक्ष्य को पाने में समर्थ बना सकता है।

लेखक  : पार्था हल्दर

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