सावधान! ‘पाचन और सीने में जलन’ की दवाइयां जानलेवा हो सकती है


बीएमजे ओपन जर्नल पत्रिका में प्रकाशित एक नए अध्ययन ने चेतावनी दी है कि आमतौर पर सीने में जलन, अल्सर और अन्य गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं का इलाज करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक निश्चित दवाएं उम्र से पहले मौत के खतरे को बढ़ा सकती हैं यदि इन्हें लंबे समय तक लिया जाता है।

इन दवाओं को प्रोटॉन पंप इनहिबिटर (पीपीआई) के रूप में जाना जाता है और अक्सर गंभीर चिकित्सा शर्तों जैसे ऊपरी जठरांत्र संबंधी मार्ग खून बहना, गैस्ट्रोएस्फोज़ल रिफ्लक्स रोग और ओसोफेजील कैंसर के लिए निर्धारित किया जाता है। लेकिन लोग सीने में जलन और अपच का इलाज करने के लिए ओवर-द-काउंटर दवाइयों की खुराक के रूप में खरीद लेते हैं।

हालाँकि थोड़े समय के लिए पीपीआई लेने की सिफारिश की जाती है,जैसे यूक्लर्स के लिए  2 से 8 सप्ताह पर लोग उन्हें महीनों और साल तक लेने लगते है जो एक प्रमुख स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।

सेंट लुइस में वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसीन में सहायक प्रोफेसर ज़ियाद अल-एली के अनुसार, “लोग सोचते हैं कि पीपीआई बहुत सुरक्षित हैं क्योंकि वे आसानी से उपलब्ध हैं,यह देखते हुए कि लाखों लोग पीपीआई नियमित रूप से लेते हैं, लेकिन ये दवाएं लेने से जुड़े वास्तविक जोखिम हैं, खासकर लंबी अवधि के लिए सेवन करने से हर साल हज़ारों मौते इस वजह से होने लगी है।

अध्ययन के लिए, शोधकर्ताओं ने 275,000 लोगों के मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की जो प्रिस्क्रिप्शन पीपीआई का इस्तेमाल करते थे और लगभग 75,000 लोगों उन लोगों के भी मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की जो दुसरी दवाई का इस्तेमाल करते है जिसे एच 2 ब्लॉकर्स के रूप में जाना जाता है। परिणाम बताते हैं कि पीपीआई लेने वाले लोगों के पास अगले पांच सालों में मरने का 50 प्रतिशत का जोखिम है

यह पहली बार नहीं है कि पीपीआई का इस्तेमाल खतरनाक पाया गया है। पिछले अध्ययनों से पता चला है कि यह अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हो सकता है जैसे गंभीर किडनी क्षति, हड्डी का फ्रैक्चर और मनोभ्रंश भी।

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