नमक में कमी से करें स्वास्थ्य बजट को कम


नई दिल्ली: हाल में हुए एक अध्ययन के अनुसार भारतीय रोजाना करीब 11 ग्राम नमक का सेवन करते हैं। जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सिफारिश पांच ग्राम रोज से दोगुना ज्यादा है। सर्वविदित है कि नमक का ज्यादा सेवन रक्तचाप (बीपी) को बढ़ा सकता है। जो हृदय रोगों का प्रमुख कारण होता है और अक्सर मौत का कारण भी बनता है। डॉक्टरों का मानना है कि खानपान के आदत में नमक का सेवन कम कर कई रोगों पर लगाम लगाया जा सकता है। जो इंसान को स्वास्थ रखने के साथ उसके स्वास्थ के बजट को भी कम कर सकता है। भारतीय व्यंजनों में नमक का विशेष स्थान है। यंू तो इसके स्वादनुसार इस्तेमाल की बात कही जाती है, लेकिन आचार, पापड़ और सलाद में इसकी मात्रा बहुत ज्यादा होती है। वहीं दूसरी तरफ देश में खानपान की आदतों में भी काफी बदलाव आया है। डब्बाबंद और प्रसंस्कृत खानों के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल बताते हैं कि इस तरह के खाद्य पदार्थों में नमक, चीनी और वसा अत्यधिक मात्रा में होती है। इससे उच्च रक्तचाप, मोटापा और हृदय रोग हो सकते हैं। डायबिटीज के मरीजों को तो इसका उपयोग बहुत ही कम मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि उनमे उच्च रक्तचाप से हृदय की बीमारियों के होने का खतरा सामान्य से कहीं ज्यादा होता है। नमक में 40 प्रतिशत तक सोडियम होता है। जबकि शरीर को तरलता बनाए रखने के लिए इसकी बहुत ही कम मात्रा की आवश्यकता होती है। इसलिए घर से बाहर खाते समय भी इस बात ध्यान रखना चाहिए कि खाने से पहले डब्बे पर नमक या सोडियम की मात्रा को पढ़ लें, चावल, पास्ता और अनाज बिना नमक के पकाएं और जहां तक हो ताजा भोजन करें।

– विकास कुमार

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