औषधीय गुणों से भी भरपूर है मशरुम, आइए जाने इसके फायदे


मशरुम न केवल बेहद स्वादिष्ट और पौष्टिक खाद्य सामग्री है बल्कि यह औषधीय गुणों से भी भरपूर है जिसे नियमित रुप से आहार का हिस्सा बनाने से कैंसर, एचआईवी, ट््यूमर, हृदय रोग, रक्तचाप तथा संक्रमण से संबंधित अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है।

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कई रंगों और आकार में पाया जाता है मशरुम
प्रोटीन, विटामिन बी, सी और डी से भरपूर होने के साथ ही तंत्रिकातंत्र से संबंधित बीमारियों और रक्त को पतला बनाने में मददगार मशरुम सफेद के अलावा कई रंगों और आकार में पाया जाता है। यह गोल होने के साथ ही लम्बा और फूलों की आकृति का भी होता है। कुछ सजावटी मशरुम भी विकसित किये गये हैं।

इनोकी मशरुम कैंसर रोधी पालीसैक्राइड फ्लेमूलिन से होता है भरपूर
भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान हेसरघट्टा की प्रधान वैज्ञानिक और मशरुम अनुसंधान से जुड़ी मीरा पांडे के अनुसार जापान में बेहद लोकप्रिय इनोकी मशरुम कैंसर रोधी पालीसैक्राइड फ्लेमूलिन से भरपूर होता है। इसमें नियासीन अधिक मात्रा में होती है और यह कोलेस्ट्रोल तथा रक्तचाप को कम करने की क्षमता रखता है। इसमें वायरल रोधी क्षमता भी होती है।

मशरुम से विटामिन बी,सी और डी प्राप्त होता है
रंगीन फूलों की आकृति वाला मैटाके मशरुम नाजुक होने के साथ ही पोषक तत्वों एवं औषधीय गुणों से भरपूर होता है। इसमें अच्छी मात्रा में विटामिन बी,सी और डी पायी जाती है। यह एचआईवी और कैंसर रोधी क्षमता भी रखता है। पूर्वी एशिया में लोकप्रिय ब्राउन बीच मशरुम ट््यूमर रोधी गुणों से भरपूर होता है। आकार में गोल होने के साथ यह बेहद आकर्षक दिखता है।

कोलेस्ट्रोल को कम करने में सहायक
डा. पांडे के अनुसार कई रंग और रुप में पाये जाने वाले ओएस्टर मशरुम को मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा की ²ष्टि से बहुत बढिय़ा माना जाता है। इसका व्यावसायिक उत्पादन आसान है और यह किसी सूखे सेल्यूलोज पर आसानी से उगता है। इसमें प्रोटीन और विटामिन बी अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसमें लोवास्टेटिन काफी मात्रा में होता है जो कोलेस्ट्रोल को कम करने में सहायक है। मशरुम की इस किस्म में पर्यावरण में व्याप्त विषाक्त पदार्थो को नष्ट करने की क्षमता है।

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मधुमेह के रोगियों के लिए फायदेमंद
व्यावसायिक पैमाने पर पहली बार अपनायी गयी भारतीय मिल्की मशरुम में फाइबर अधिक मात्रा में पाया जाता है और यह इरगोस्ट्राल भी भरपूर है जो विटामिन डी में परिवर्तित होता है। यह मघुमेह से पीडि़त लोगों के लिए उत्कृष्ट है तथा यह उच्च तापमान को सहन करने की क्षमता रखने के साथ ही अन्य मशरुमों की तुलना में अधिक समय तक तरोताजा बना रहता है।

डा. पांडे के अनुसार निर्यात को बढ़ावा देने तथा किसानों की आय में वृद्धि को ध्यान में रखकर उनके संस्थान ने औषधीय गुणों से भरपूर और सजावटी मशरुमों का भी विकास किया है। पंजाब , हरियाणा , हिमाचल प्रदेश , मध्य प्रदेश , महाराष्ट्र और तमिलनाडु में किसान बड़े पैमाने पर मशरुम की पैदावार लेते हैं।

 

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