टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी से कूल्हे की समस्या का निदान


नयी दिल्ली : आर्थराइटिस और कूल्हे के जोड़ों में दर्द से पीडि़त लोगों के लिये टोटल हिप रिप्लेसमेंट एक क्रांतिकारी चिकित्सा के रूप में सामने आयी है, जिसके जरिये चलने-फिरने में असमर्थ और उम्मीद खो चुके लोग फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं।

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टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी सुरक्षित और प्रभावी प्रक्रिया
टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी कूल्हे की जोड़ में आर्थराइटिस या चोट के कारण लंबे समय से होने वाले दर्द से राहत दिलाने और जीवन में गतिशीलता को बनाये रखने के लिए एक सुरक्षित और प्रभावी प्रक्रिया है। इस सर्जरी के जरिये कृत्रिम अंग (प्रोस्थेसिस) को सही जगह पर स्थापित करने में मदद मिलती है। रोगी की चलने-फिरने की प्राकृतिक प्रक्रिया को बहाल रखने के लिए रोगी की शारीरिक संरचना के अनुसार ही प्रतिस्थापित किये जाने वाले जोड़ की प्रतिकृति बनायी जाती है। शल्य चिकित्सा तकनीकों के उन्नयन से अब यह प्रक्रिया सरल और सुरक्षित हो गयी है और इसके अधिक अच्छे परिणाम सामने आये हैं।

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दो कारकों से बना होता है कूल्हे का जोड़
अस्थि रोग विशेषज्ञों के मुताबिक कूल्हे का जोड़ दो कारकों से बना होता है – बॉल और सॉकिट ज्वाइंट। जांघ की हड्डी का ऊपरी सिरा बॉल के आकार का होता है। ये बॉल के आकार की हड्डी कप के आकार के सॉकिट में फिट बैठ जाती है जिसे कूल्हे की हड्डी में ऐसीटैबुलम नाम दिया गया है। ये बॉल और सॉकिट जोडों को 360 डिग्री तक घूमने देते है। बॉल और सॉकिट चिकने पदार्थ कार्टिलेज को संरक्षित करते है। कार्टिलेज घर्षण को कम करता है जिससे गतिशीलता बढ़ती है। कूल्हे के जोड़ में टूट फूट होने से यही कार्टिलेज खत्म होकर घिसने लगता है जिससे दो हड्डियों के बीच के जोड़ की जगह कम होने लगती है। इससे हड्डियां आपस में घिसने लगती है और क्षतिग्रस्त हड्डियां बाहर की तरफ आने लगती हैं तथा उनमें गांठ पड़ जाती है। इसके असर से दर्द और अकडऩ के साथ ही पैरों की गतिशीलता भी कम होने लगती है।

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बुजुर्गों में आर्थराइटिस आम समस्या
आर्थराइटिस केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के सीनियर ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन राजू वैश्य का कहना है कि बुजुर्गों में आर्थराइटिस की समस्या होना आम बात है, लेकिन आजकल युवा, महिला एवं पुरुष वर्ग, विशेष तौर पर अधिक खेलकूद अथवा बहुत ज्यादा शारीरिक गतिविधियों में सक्रिय लोगों में ये समस्या देखने को मिल रही है। अचानक गिरने या दुर्घटना के अलावा कई बार तेजी से दौडऩे -भागने पर कूल्हों के जोड़ के कार्टिलेज या ऊतक क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।

डॉ. वैश्य ने कहा कि आर्थराइटिस एवं जोड़ों की अन्य समस्याओं के कारण कूल्हे और घुटने जैसे जोड़ों को काफी अधिक क्षति हो सकती है । दवा लेने के बावजूद लगातार दर्द होता रहता है तथा फिजियोथिरेपी से भी लाभ नहीं मिलता है। अगर शुरुआती दौर में जोड़ों के विकार का पता चल जाएं तो दवाइयों, विभिन्न थेरेपियों के अलावा दिनचर्या की शैली में बदलाव के जरिये इसका इलाज किया जा सकता है। अगर मरीज इससे ठीक न हो पाए और अगर डॉक्टर शल्य चिकित्सा की सलाह देता है तो इसमें देरी करना सही नहीं होगा , क्योंकि इससे दर्द बढ़ता जाएगा और बाद में विकृति तक हो सकती है।

उन्होने बताया कि टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के तहत कूल्हे की जोड़ के क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाकर उनकी जगह कृत्रिम अंग (प्रोस्थेटिक्स) का प्रत्यारोपण कर दिया जाता है जिससे जोड़ों की सक्रियता को बनाये रखने में मदद मिलती है। इस सर्जरी से जोड़ के आसपास के किसी भी कटे-फटे लिगामेंट की भी मरम्मत की जाती है जिससे इम्प्लांट को सहारा देने में मदद मिलती है और सामान्य हलचल को बनाये रखने में मदद मिलती है।

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