राहु और केतु से कैसे पाएं मुक्ति


– यदि राहू अनिष्ट प्रभाव दे रहा हो तो मूली का दान करना चाहिए।
– यदि राहू जन्म कुंडली में अनिष्ट स्थिति पैदा कर रहा हो तो नारियल को बहते हुये पानी में बहाना चाहिए।
– जौ (यव) को दूध में धोकर चलते पानी में बहाने से राहू के अनिष्ट प्रभाव को दूर करता है।
– सरसों और नीलम का दान करने से राहू के क्रोध में शांति आती है।
– मुट्ठी भर कर कोयले को चलते पानी में बहाने से राहू शांत होता है।
– तपेदिक (क्षय) रोग में जौ (यव) को गाय के मूत्र में धोकर और लाल रंग के वस्त्र में बंद करके रखने से – तपेदिक (क्षय) रोग में लाभ प्राप्त होता है, यदि गाय के मूत्र से ही दांत साफ करें तो सोने पर सुहागा होता है।
– यदि राहू अष्टम भाव में अशुभ प्रभाव दे रहा हो तो खोटे सिक्के चलते पानी में बहाने चाहिए।
– यदि राहू के द्वारा बनता कार्य बिगड़ रहा हो तो किसी शुद्र व्यक्ति को दान करना चाहिए।
– केतु को कुत्ते का प्रतीक माना गया है। अत: केतु के अनिष्टï प्रभाव को दूर करने के लिए कुत्तों को खाना खिलाना चाहिए।
– यदि पुत्र आज्ञाकारी न हो उनका व्यवहार अच्छा न हो तो व्यक्ति को मंदिर में कंबल का दान करना चाहिए। इससे केतु का अशुभ प्रभाव दूर हो जाता है।
– यदि पुत्र पर कोई संकट आ जाए तो कुत्ते को रोटी खिलानी चाहिए।