यदि आप भी चाहते हैं पुत्र रत्न की प्राप्ति तो नहीं करें पान का सेवन


आज भी कहा जाता है कि समय बहुत बदल गया है लोग अब लड़के-लड़की में फ्रक नहीं समझते हैं। दोनों को एक समान ही माना जाता है लेकिन इतना बदलाव आने के बाद भी लोग आज लड़के की ही उम्मीद रखते हैं। और सिर्फ एक लड़के के लिए जाने क्या-क्या कर डालते हैं। हिंदू धर्म में कुछ ऐसे मौके है जिन लोगों को पुत्र रत्न की प्राप्ति से जोड़कर देखा जाता है। आपको बता दें कि धर्म के विद्वानों के द्घारा 3 अगस्त् को होने वाली पुत्रदा एकादशी एक ऐसा सुनहेरा मौका है कि जब नि:संतान की गोद भर सकती है तो पूत्र चाहने वालों की मनोकामना भी जरूर पुरी होगी।

इस व्रत की पूजन का ठीक से करें पालन 
-पुत्रदा एकादशी का व्रत
-एकादशी का व्रत रखने के लिए दशमी के नियम पूरे करने होते हैं।
-दशमी की शाम सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करते हैं।
-प्याज और लहसुन से परहेज करते हैं।
-सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें।
-प्रभु को धूप, दीप, नैवेद्य चढ़ाएं और पूजा करें। कथा जरूर पढ़ें।
-निराहार व्रत करें। शाम को सूर्यास्त से पहले फलाहार करें।
-एक दिन बाद द्वादशी को ब्राह्मण को भोजन कराएं। दक्षिणा भी जरूर दें।
-फिर भगवान विष्‍णु को अर्घ्‍य दें और उपवास सम्पूर्ण करें।

इन चीजों से करे करें परहेज
-दशमी के दिन प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा आदि भूलकर भी न लें।
-जुआ आदि व्यसनों से दूर रहें।
-ब्रह्मचर्य का पालन करें।
-दिन के समय में सोएं नहीं।
-पान नहीं खाना चाहिए।
-झूठ न बोलें और दूसरों की निंदा न करें।
-रात्रि में शहद, चना तथा मसूर की दाल न खाएं।

 

log in

reset password

Back to
log in
Choose A Format
Poll
Voting to make decisions or determine opinions
Story
Formatted Text with Embeds and Visuals
List
The Classic Internet Listicles
Video
Youtube, Vimeo or Vine Embeds
Thanks for loving our story. Like our Facebook page to get more stories.

Send this to a friend