जानिए क्यों जज अपने पेन की निब तोड़ देता है ?


इंसान अपने जीवन को एक सार्थक तरीके से जिये इसके लिए इंसान के मौलिक अधिकार बनाये गए है और ऐसे नियम भी जो तय करते है की एक सभ्य जीवन किस तरह जी सकते है। इसकी देख रेख के लिए कानून है जो इन नियमों की अवमानना पर अदालतों के माध्यम से देश के नागरिकों के लिए सजा का फैसला करते है।

आप सभी बॉलीवुड की पिक्चर्स तो देखते ही होंगे। अपने देखा होगा जज किसी व्यक्ति को मौत को सज़ा सुनाने के बाद जज अपने कलम(पेन) की निब को तोड़ देता है। क्या आप जानते हैं इस क्यों होता है?

भारत देश में 10 साल में 1,303 को सजा-ए-मौत, फांसी महज 3 को दी गयी है। अब आप सोच रहे होंगे, किसी की मौत से पेन की निब का क्या सम्बन्ध है।ये अन्य कई देशों की तुलना में बहुत कम है क्योंकि भारत एक सदभाव सन्देश देने वालों देशो में से है जहाँ इन तरह की सजा अत्यधिक गंभीर अपराध पर ही दिए जाने का प्रावधान है

दरअसल, जज पेन की निभ को इसलिए तोड़ता है, क्योंकि जिस कलम से 1आदमी की ज़िन्दगी का फैसला हो गया हो किसी और की ज़िन्दगी का फैसला उससे न किया जाये। पेन की निब को तोड़ते समय यह उम्मीद की जाती है की जिस तरह के अपराध के लिए आदमी को सजा दी जा रही है उस तरह का अपराध फिर से न हो यह उमीद करते हुए जज अपने पेन की निब को तोड़ देता है।

मौत की सज़ा सुनाने के अंत में डैथ (Death) शब्द को लिखा जाता है और इसी के साथ पेन की निब को भी तोड़ दिया जाता है। डेथ शब्द लिखने से आदमी की मौत के साथ पेन की मौत हो जाती है।

एक बार फैसला लिख देने और कलम को तोड़ देने के बाद जज को खुद को भी अधिकार नहीं होता की वो अपने फसले को बदल सके। वही यह भी माना जाता है की किसी की मौत लेने के कारण अपने आपको प्रायश्चित कराने के लिए पेन की निब को तोड़ा जाता है।

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