मोबाइल रेडिएशन है खतरे की घंटी


इन दिनों अगर कोई किसी का सच्चा साथी है जो हर समय साथ रहता है। मोबाइल फोन बिना जिंदगी की कल्पना करना शायद मुश्किल ही होगी। लोग फोन को ऐसे चिपका के अपने साथ रखते हैं जैसे कोई खजाना हो। लोग इस बात से अनजान है कि फोन को यूं अपने साथ हमेशा चिपका के रखना किसी बड़े खतरे को बुलावा देना जैसा है। मोबाइल फोन के बिना अब हम जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर पाते। आदत ऐसी बन गई है कि जब कॉल नहीं होता, तो भी हमें लगता है कि घंटी बज रही है। यह घंटी दरअसल खतरे की घंटी हो सकती है। मोबाइल फोन और मोबाइल टावर से निकलने वाला रेडिएशन सेहत के लिए खतरा भी साबित हो सकता है। मोबाइल रेडिएशन से तमाम दिक्कतें हो सकती है।

मोबाइल रेडिएशन से खतरे
मोबाइल रेडिएशन से सिरदर्द, जोड़ों में दर्द, पाचन में गड़बड़ी, डिप्रेशन, नींद न आना, आंखों में ड्राइनेस, काम में ध्यान न लगना, कानों का बजना, सुनने में कमी, प्रजनन क्षमता में कमी, कैंसर, ब्रेन ट्यूमर और मिस-कैरेज की आशंका भी हो सकती है। यह हम सभी जानते हैं कि हमारे शरीर में 70 फीसदी और दिमाग में 90 फीसदी तक पानी होता है। यह पानी धीरे-धीरे बॉडी रेडिएशन को अब्जॉर्ब करता है जो आगे जाकर सेहत के लिए काफी नुकसानदेह साबित होता है।

मोबाइल फोन का रेडिएशन कब है
मोबाइल तकिए के नीचे रखकर सोना सही नहीं है। जेब में मोबाइल रखना दिल के लिए नुकसानदेह है पेसमेकर लगा है तो मोबाइल ज्यादा नुकसान करता है पेन्ट की जेब में रखने से स्पर्म्स पर असर होता है। गेम्स /नेट सर्फिंग के लिए मोबाइल यूज खतरनाक है।

मोबाइल टावर के 300 मीटर एरिया में रेडिएशन सबसे ज्यादा
मोबाइल टावर के 300 मीटर एरिया में सबसे ज्यादा रेडिएशन होता है। ऐंटेना के सामनेवाले हिस्से में सबसे ज्यादा तरंगें निकलती हैं। जाहिर है, सामने की ओर ही नुकसान भी ज्यादा होता है, पीछे और नीचे के मुकाबले। टावर पर जितने ज्यादा ऐंटेना लगे होंगे, रेडिएशन भी उतना ज्यादा होगा।

बंद जगहों मोबाइल यूज करते वक्त ध्यान रखें
बंद जगहों में मोबाइल के इस्तेमाल से बचें क्योंकि तरंगों के बाहर निकलने का रास्ता बंद होने से शरीर में प्रवेश का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही, इन जगहों पर सिग्नल कम होना भी नुकसानदेह हो सकता है।