सिर्फ 5 रू पॉकेटमनी पर मुकेश अम्बानी के बच्चों का स्कूल में उड़ता था मजाक, जानिये क्यों


भारत के सबसे अमीर आदमी और बिसनेस टायकून मुकेश अम्बानी दुनियाभर के सफलतम बिजनेसमैन में से एक माने जाते है। आज जिस मुकाम पर वो और उनका अम्बानी ग्रुप है उसके लिए उन्होंने रात दिन मेहनत की है। आपको जानकार हैरानी हो सकती है की भले ही आज वो अकूत संपत्ति के मालिक है लेकिन फिर भी उनकी छवि जमीन से जुड़े व्यक्ति वाली है।

आज उनके परिवार की लाइफस्टाइल सुर्ख़ियों में है की अम्बानी परिवार का एक दिन का खर्च इतना है , या नीता अम्बानी कितने लाख का फ़ोन इस्तेमाल करती है और यहाँ तक की मुकेश अम्बानी के बच्चों के शौक, ये सभी बातें आपके कई जगह पढ़ी होगी। पर आपको बताते है की आज भले ही मुकेश अम्बानी के बच्चों को किसी चीज़ की कमी नहीं है पर उनका बचपन आम परिवार के बच्चों जैसा ही बीता है।

आपको हैरानी हो रही होगी की अम्बानी परिवार के बच्चों का बचपन आम बच्चों की तरह कैसे तो आपको बता दें इसके पीछे भी मुकेश अम्बानी और नीता अम्बानी ही है।

मुकेश और नीता अम्बानी अपने तीनों बच्चों अनंत, आकाश और ईशा की परवरिश और संस्कारों में हर उस बात का खयाल रखते हैं जो उन्हें अच्छा इंसान बनने के लिए प्रेरित करें।

भारत के सबसे अमीर परिवार के बच्चे होने के बाद भी नीता अम्बानी ने हमेशा ध्यान रखा की उनके बच्चों पर इस शोहरत का का नशा न चढ़े। नीता अम्बानी खुद एक मिडिल क्लॉस फॅमिली में बड़ी हुई है इसलिए वो अपने बच्चों को जीवन के संघर्षों और मूल्यों से अवगत करना चाहती थी।

घर में एक से एक गाड़ियां होने के बाद भी नीता अम्बानी अपने बच्चों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट से स्कूल भेजती थीं ताकि वो बाकी बच्चों की मजबूरियां समझ सके। स्कूल जाने के दौरान मैं अपने बच्चों को केवल 5-5 रुपये पॉकेटमनी देती थी ताकि वो पैसे का महत्त्व समझें। लोगों का सम्मान करें।’

एक दिन जब तीनों बच्चे स्कूल जाने के लिए तैयार हुए तो सबसे बड़ा बेटा अनंत उनके पास आया और 10 रुपये की मांग करने लगा। नीता ने जब अनंत से पूछा कि वो ज्यादा रुपयों की मांग क्यों कर रहा है? तब अनंत ने कहा, “मेरे साथी पॉकेट खर्च के लिए मेरे हाथ में पांच रुपये देखकर मेरा मजाक उड़ाते हैं। जब मैं पांच रुपये लेकर कुछ लेने जाता हूँ तो लड़के कहते हैं कि तू अंबानी है या भिखारी है।”

लेकिन ये सब नीता अम्बानी ने इसलिए किया की उनके बच्चे अपने पिता की तरह एक बेहतर इंसान बन सके और आज उन्हें ख़ुशी है की उनके बच्चे एक अनुशासित और बेहतर तरीके से परिवार का बिसनेस संभाल रहे है।

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