मौनी अमावस्या के अवसर पर गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम तट पर लाखों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई


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माघ मास की मौनी अमावस्या का दिन खास होता है। यूं तो पूरे माघ महीने को ही बेहद खास माना जाता है। हिंदू धर्म में व्रत-उपवास के साथ ही प्रमुख तिथियों पर तीर्थ क्षेत्र में स्नान करने का विधान है। इस पावन दिन पर लोग पितरों को याद करते हैं और उनके नाम पर स्नान, दान भी किया जाता है। इनमें भी प्रयाग स्नान की अगाध महिमा है।

ब्रह्मा, विष्णु, महादेव, आदित्य, मरुद्गण तथा अन्य सभी देवी-देवता माघ मास में संगम स्नान करते हैं ऐसा माना जाता है कि इस स्नान को करने और कल्पवास करने वाले को अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। शास्त्र कहते हैं इस दिन मौन रहना अक्षय पुण्य को प्रदान करता है।

आपको बता दे कि माघ के प्रमुख पर्व मौनी अमावस्या पर मंगलवार को गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के मिलन स्थल संगम पर पुण्य की डुबकी लगाने को लाखों की भीड़ उमड़ी।

मौनी अमावस्या पर स्नान का मुहुर्त मंगलवार को सुबह 4:52 बजे से लगा था। इस शुभ मुहुर्त में स्नान करने को सोमवार रात से ही लाखों की संख्या में श्रद्धालु माघ मेला क्षेत्र पहुंचने लगे थे।

इस प्रमुख पर्व पर श्रद्धालुओं को लाने के लिए रेलवे ने जहां दो दर्जन से अधिक स्पेशल ट्रेनें चलाईं वहीं रोडवेज ने दो हजार से अधिक बसें सड़क पर उतार दीं।रात गहराने के साथ ही संगमतट पर श्रद्धालुओं की भार भीड़ एकट्ठा होने लगी और लोग शुभ मुहुर्त लगने का इंतजार करते दिखे। भोर में चार बजे से श्रद्धालुओं ने मौन रखकर त्रिवेणी में डुबकी लगाना शुरू कर दिया जिसके बाद यह सिलसिला धूप निकलने के साथ ही बढ़ता चला गया।

आज के दिन करीब दो करोड़ श्रद्धालुओं के संगम में स्नान की उम्मीद है। मौनी अमावस्या के पर्व को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा की व्यापक तैयारी भी की है। आपको बता दे कि स्नान का मुहूर्त सुबह 4.52 मिनट से बुधवार सुबह 7.04 बजे तक रहेगा। आज मंगलवार का दिन और अमावस्या का संयोग होने से मणिकांचन योग बन रहा है।

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