पाकिस्तान में गूंजा बम-बम भोले का जयकारा


आज हम आपको बताने जा रहे है पाकिस्तान में स्थिति शिव मंदिर के बारे में , ये पाकिस्तान के एबटाबाद जिले में स्थिति कटासराज शिव मंदिर है ये मंदिर अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। यहां तक की शिव मंदिर का भारत में ऐतिहासिक महत्व भी है। लेकिन इस मंदिर में पिछले 20 सालों से पूजा-अर्चना करना पूरी तरह से प्रतिबंध था।

बता दे कि कुछ महीनों पहले ही पाकिस्तान की अदालत ने करीब 20 साल के बाद पाकिस्तान के एबटाबाद जिले में स्थित प्राचीन शिव मंदिर में पाकिस्तानी हिंदुओं को पूजा करने की अनुमति दे दी है। और अब इसमें कोई भी पूजा अर्चना कर सकता है।

इस प्रतिबंध को हटाने का फैसला पाकिस्तान के पेशावर में स्थित हाईकोर्ट ने किया। सावन के महीने में शिव के इस मंदिर में पूजा अर्चना शुरू हो गई है।

आपको बता दें कि पाकिस्तान ने संपत्ति विवाद के कारण मंदिर में किसी भी धार्मिक कार्यक्रम और गतिविधि पर रोक लगा दी थी। इससे पहले साल 2013 में हिंदु और गैर सरकारी संगठन एनजीओ ने पीएचसी एबटावाद पीठ में एक अर्जी दायर की थी कि हमें इस शिव मंदिर में पूजा अर्चना करने अनुमति मिलनी चाहिए। और कहा कि संगठन ने लीज के जरिए संपत्ति की खरीदारी की थी। इसमें मुद्दई और एनजीओ बालमाइक सभा के शाम लाल ने कहा कि यह मंदिर करीब 175 साल पुराना है। आगे उन्होंने यह भी बताया है कि ब्रिटिश शासन काल के दौरान इस मंदिर को गोरखा राइफल्स को दिया गया था ताकि लडाई के दौरान हिंदू सैनिक इस मंदिर में पूजा अर्चना कर सके।

वही आपको ये भी बता दे कि यह मंदिर इसलिए मशहूर है कि ये कटासराज मंदिर पाकिस्तानी पंजाब के उत्तरी भाग में नमक कोह पर्वत में स्थित हिंदुओं का प्रसिद्ध तीर्थ स्थान कहा जाता है। यहां पर शिव मंदिर के अलावा भी और मंदिर है।

इतिहासकारों एवं पुरात्तव विभाग के अनुसार इस जगह को शिव का नेत्र माना जाता है। और ऐसा मानना है कि जब मां पार्वती सती हुईं तो भगवान शिव की आंखों से दो आंसू टपके एक आंसू कटास पर टपका जहां पर अमृत बन गया तो दूसरा आंसू अजमेर राजस्थान में टपका जहां पुष्करतीर्थ बन गया।

अज्ञातवास में पानी की खोज में यहां आए थे पांडव ऐसा कहा जाता है कि राजपाट को जुए में हराकर वन-वन भटक रहे पांडव इस कुंड पर पानी की तलाश करते हुए आए थे लेकिन इस कुंड पर यक्ष का एकाधिकार था।

लिहाजा उन्होंन शर्त रखी सवालों का सही जवाब देने पर वो इस पानी का सेवन कर सकेंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं और प्यास के कारण पांडव मूर्छित हो गए। आखिर में उन्हें खोजते हुए युधिष्ठिर पहुंचे और सभी सवालों का जवाब देने के बाद चारों भाइयों को पानी पिलाया। दो रंग का सरोवर कही गहरा तो कही गहराई बहुत कम इस कुंड का रंग एक समान नहीं है लिहाजा इसकी गहराई भी समांतर नहीं है। जहां सरोवर का रंग हरा है वहां गहराई कम है और जहां पर पानी बहुत गहरा है वहां का पानी नीला है। मान्यता है कि ये सरोवर शिव के आंसुओं से बना है।