श्रद्धालुओं ने गंगा दशहरा पर्व पर संगम में स्नान किया


इलाहाबाद :  गंगा दशहरा के पावन पर्व पर आज संगम तट पर श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगायी। प्रशासन ने घाट पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये हैं। श्रद्धालुओं ने घाट पर स्नान कर मां गंगा की पूजा अर्चना एवं आरती की। श्रद्धालु घाट पर पंडों को चावल, तिल दाल, नमक का दान कर रहे हैं। मंदिरों में भारी भीड़ लगी हुई हैं। संगम तट पर लेटे हुए हनुमान मंदिर, आदिशंकराचार्य शिव मंदिर, नागवासुकि,मनकामेश्वर और अलोपी देवी समेत अनेक मंदिरों में श्रद्धालुओं की लम्बी कतार लगी हुई है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि श्रद्धालुओं का स्नान देर शाम तक चलने की संभावना व्यक्त की है। प्रमुख घाटों संगम घाट, राम घाट, दशासवमेध घाट, हनुमान घाट और नागवासुकि घाटों समेत अन्य घाटों पर स्नानार्थियों की देख-रेख के लिए सुरक्षा के कड़े बन्दोबस्त किये गये हैं। गंगा स्नान के लिए सबसे महत्वपूर्ण संगम घाट माना जाता है, क्योंकि इसी जगह पर गंगा, यमुना और अ²श्य सरस्वती का मिलन हुआ है।

पुराणों में बताया गया है कि गंगा स्नान किसी भी दिन और समय में किया जाए तो यह शुभ फल ही देता है, लेकिन कुछ तिथि और मुहूर्त ऐसे हैं जिनमें गंगा स्नान का पुण्य कई गुणा मिलता है। कार्तिक पूर्णिमा, मकर संक्रांति, गंगा जयंती, माघ पूर्णिमा एवं गंगा दशहरा ऐसी ही शुभ तिथियां हैं, लेकिन इनमें भी ज्येष्ठ शुक्ल दशमी यानी गंगा दशहरा का अपना खास महत्व है। वामन पुराण में वर्णन किया गया है कि गंगा दशहरा के दिन हस्त नक्षत्र में गंगा पृथ्वी पर आईं थीं।

मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन अगर हस्त नक्षत्र भी हो तो इसका महत्व कई गुणा बढ़ जाता है और गंगा स्नान का पुण्य भी कई गुणा प्राप्त होता है। स्कंद पुराण में बताया गया है कि गंगा जी का मंत्र -‘नमो भगवति हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे माँ पावय पावय स्वाहा।’ का जप करते हुए गंगा को अध्र्य देने से मनुष्य के पापों का क्षय होता है। भविष्यपुराण के अनुसार जो व्यक्ति गंगा दशहरा के दिन गंगा नदी में स्नान करके जलधारा में खड़े होकर गंगा स्तोत्र का पाठ करता है उसके कई जन्मों के पाप धुल जाते हैं और व्यक्ति अगले जन्म में गंगा स्नान के पुण्य से धन संपन्न व्यक्ति होता है।

गंगादशहरा के दिन गंगा या किसी पवित्र नदी या घर में स्नान के जल में गंगा जल मिलाकर ‘नम: शिवाय नारायनये दशहराये गंगाये नम:’ मंत्र का जाप 10 बार करना चाहिए। साथ ही अपने पितरों की तृप्ति के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। स्नान के समय 10 दीपों का दान करना चाहिए। साथ ही जौ और 16 मुट्ठी तिल लेकर तर्पण करना चाहिए। अखिल भारतीय अखाडा परिषद के अध्यक्ष नरेन्द्र गिरि ने दूर दराज से आये श्रद्धालुओं से गंगा में फूल-माला न फेंकने की अपील की।

– (वार्ता)