रावण ने सोने की लंका छोड़ सीताजी को अशोक वाटिका में क्यों रखा, जानिए इसका रहस्य !


दुनिया में कई विद्वान है। जो कई वेदों के ज्ञाता है और उनके कई किस्से मशहूर हुए है। ऐसे ही रामायण के कई किस्से मशहूर है कई व्यक्तियों को रामायण का पूरा ज्ञान है क्योंकि उन्होंने रामायण पूरी पड़ी है रामायण में बताए गए हर एक तथ्य को वह अच्छी तरह से जानते हैं लेकिन फिर भी आज के समय में ऐसे कई व्यक्ति हैं जिन्हें रामायण के बारे में अधिक जानकारी नहीं है आज हम रामायण के ही कुछ तथ्यों के बारे में बात करेंगे।

जब भगवान राम लक्ष्मण और सीता 14 वर्ष का वनवास काट रहे थे तब का के वश में होकर लंकापति रावण माता सीता को का हरण कर उन्हें लंका ले गया था माता सीता लंकापति रावण की नगरी में तपस्विनी के वेश में ही रहती थी और वह उपवास और तप किया करती थी।

लेकिन किसी ने इस बारे में नहीं सोचा कि रावण का आलीशान सोने का महल होते हुए भी रावण ने माता सीता को अशोक वाटिका में ही क्यों रखा था क्या कभी आपने इस बारे में सोचा है रावण ने माता सीता की रक्षा के लिए राक्षसियों को भी वहां पर नियुक्त कर दिया था जो बहुत ही भयानक दिखाई देती थी वह राक्षसियों माता सीता को कठोर तरीके से धमकाती थी और कई बातें कहती थी।

रावण की सोने की लंका का निर्माण कुबेर द्वारा किया गया था बताया जाता है कि जब कुबेर अपने पिता के साथ बैठे थे तो रावण के मन में भी कुबेर की तरह समृद्ध बनने की चाह उत्पन्न हो गए तब कुंभकर्ण विभीषण शूर्पणखा और रावण तपस्या में लगे हुए अपने भाइयों की सेवा करते थे 1000 वर्ष तक कठोर तपस्या करते हुए रावण ने अपना शीश काटकर अग्नि में आहुति दे दी थी इससे ब्रह्मा जी बहुत ही संतुष्ट हुए थे और उन्होंने स्वयं जाकर रावण को तपस्या करने से रोका था।

तब भगवान ने कहा था कि मैं तुम्हारी तपस्या से बहुत प्रसन्न हूं वर मांगो और इस तप से निवृत हो जाओ उन्होंने कहा था कि अमरत्व को छोड़कर जो इच्छा हो वह मांग लो तुम्हारी हर इच्छा पूर्ण होगी और तुमने जिस पद को प्राप्त करने के लिए अपने सर की आहुति दी थी वह भी तुम्हारे शरीर से जुड़ जायेंगे और तुम अपनी इच्छा अनुसार रूप भी धारण कर सकते हो रावण ने कुबेर से युद्ध कर विजय प्राप्त की और कुबेर को बाहर कर दिया।

रावण का यह महल सोने का था जो बहुत ही भव्य और विशाल था इसका आकर्षण देखने लायक था जो एक बार इस महल को देख लेता था वह अपनी नजर हटाए नहीं हटा पाता था लेकिन सोने की लंका होने के बाद भी रावण माता सीता को महल में नहीं रख पाया रावण को माता सीता को अशोक वाटिका में ही रखना पड़ा इसका मुख्य कारण था कुबेर के पुत्र नलकुबेर का श्राप रावण नलकुबेर के श्राप से हर पल भयभीत रहता था इसीलिए माता-पिता के समीप जाने से भी वह डरता था।

रावण जब विश्व विजय अभियान के लिए स्वर्ग गया था तो उसकी दृष्टि अप्सरा रंभा पर पड़ी थी वह उसकी खूबसूरती पर मोहित हो गया था और उसे पकड़ लिया था तब रंभा ने रावण को समझाया था कि वह नलकुबेर की पत्नी बनने वाली है लेकिन रावण ने उनकी एक भी बात नहीं सुनी और उसे अपमानित करते रहे उसके साथ दुर्व्यवहार करने लग गया।

 

जब नलकुबेर को इस बात का पता चला तो नलकुबेर क्रोध से भर गया लेकिन रावण पंडित होने के साथ ही उनके पिता का भ्राता भी था तब नलकुबेर ने रावण को श्राप दिया था कि यदि रावण किसी स्त्री को उसकी स्वीकृति के बिना छूने की कोशिश करेगा या महल में रखने का प्रयास करेगा तो वह अग्नि ज्वाला में भस्म हो जाएगा यही कारण था कि रावण ने माता सीता को कैद करने के बाद भी उन्हें अपने महल में नहीं रखा और ना ही उन्हें स्पर्श किया।

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