बहनजी सुनना पसंद नहीं करती आधुनिक नारी


भारतीय संस्कृति अपने आप में एक मिसाल है । संबंधों की बुनियाद पर खड़ा किया गया सामाजिक ढ़ाचा इतना मजबूत है कि उसे आसानी से ढहाया नहीं जा सकता ।

 पुरूष के लिये भाई साहब और महिलाओं के लिये बहनजी बड़ा ही आदर व सम्मानसूचक शब्द है। एक अपरिचिता से बहनजी कहना न केवल कार्य को सुगम बना देता है बल्कि महिला भी सुरक्षा का अहसास कर आसानी से मदद को तैयार हो जाती है परंतु आज कल की महिलाए इन शब्दों की अहमियत घटती जा रही है और उन्हें पिछड़ेपन का प्रतीक भी माना जाने लगा हैं।

कॉलेजी छात्रओ का एक वर्ग जो पूर्णत: हलो-हाय और जींस-टॉप ,मिनी-मिडी की संस्कृति को अपना चुका है उन्हें अपने को बहनजी कहलाना बिल्कुल पसंद नहीं है यादि उनको बहनजी कहने पर आपको उनके मुंह से बोली गई दो-चार बातें सुनने को मिल जाये तो कोई बात नहीं हैं।

ऐसी लड़किया जो बहनजी कहने पर गुस्सा हो जाएं तो उनका पहला प्रशन यहीं होता है कि आपको मैं बहनजी दिखती हूं ऐसे हादसों से स्पष्टï होता है कि बहनजी अब बीत जमाने की आउटडेटेड चीज हो गयी है।

जो लड़किया रहन-सहन और बोलचाल व वस्त्रों के मामले में आज भी भारतीय संस्कृति के करीब हैं,उनका भी यही कहना है कि बहनजी कहे जाने पर हमें ऐसा अहसास होता है कि कोई हमारा मजाक उड़ा रहा है। हम कुछ नहीं कर सकतीं,हम किसी काम की नहीं हैं, इसलिए कितना भी सम्मानसूचक होने पर भी हमें बहनजी कहलाना पसंद नहीं।

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