भगवान गणेश का कटा हुआ सिर मिलने से होगा भव्य मंदिर का निर्माण


भगवान गणेश को हिंदू धर्म में पहला पूजने वाले भगवान का दर्जा दिया गया है। गणेश जी के जन्म पर कई सारी बातें है जो की बहुत सारे ग्रथों में पढऩे को मिलती हैं। माता पार्वती ने ही गणेश जी को अपने ही मैल से बनाया था ऐसी ही कई बातें हैं गणेश जी की जन्म की आज हम आपको एसी ही कुछ बातें बताएंगे।

कहा जाता रहा है कि पार्वती जी जब स्नान करने के लिए जा रही थीं तब उन्हें स्नान करते हुए न देख ले तो उन्होंने एक सुंदर से बालक का जन्म किया। माता पार्वती ने उस बालक को अपना द्वारपाल बना दिया और यह बोला की वह पहरा दे। माता पार्वती ने कहा था जब तक मैं न बोलो तो तुम किसी को भी अंदर आने से रोकोगे। जब पार्वती जी ने ऐसा करने को कहा तो गणेश जी ने यह आदेश मान कर उसका पालन करने लेगे।

फिर वहां पर भगवान शिव आ गए और वह अंदर जा ही रहे थे कि उस सुंदर से बालक ने उन्हें बाहर द्वार पर ही रोक दिया औैर अंदर जाने नहीं दिया। कर्ई बार आग्रह करने पर भी बालक ने शिवजी को अंदर नहीं जाने दिया तब शिवजी ने गुस्से में आकर उस बालक का सिर धड़ से लग कर दिया। जब बाद में पार्वती जी बाहर आईं और उन्होंने देखा कि उस बालक का सिर कटा हुआ है और शिव जी से पूछा की उन्होंने ऐसा क्यों किया। माता पार्वती ने बोला कि इस बालक को दुबारा से जीवित करें नहीं तो मैं आपको जिंदगी भी माफ नहीं करूंगी।

शिवजी ने जो सिर उस बालक को दिया था वह एक हाथी का था। और जो सिर अलग किया था वह एक गुफा में रख दिया गया था। हिंदू धर्म में उतराखंड के पिथौरागढ़ के पाताल भुवनेश्वर गुफा की बड़ी मान्यता है। ये गुफा किसी आश्चर्य से कम नहीं है क्योंकि ये गुफा पहाड़ी से करीब 90 फिट अंदर है। यह गुफा उत्तराखंड के पहाड़ी वादियों के बीच बसे सीमान्त कस्बे गंगोलीहाट में स्थित है।

ये गुफा में बहुत सारी चीजों के लिए प्रसिद्ध है पर जिसके लिए यह सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है वो है यहां मौजूद गणेश जी का कटा हुआ मस्तक। जी हां, इस जगह पर गणेश जी का कटा हुआ सि‍र मौजूद है। इस गुफा में गणेश जी के कटे सि‍र के मुर्ति के ठीक ऊपर 108 पंखुड़ि‍यों वाला ब्रह्मकमल सुशोभित है। इस कमल से निरंतर गणेश जी के मस्तक पर पानी की बूंदे टपकती रहती हैं।

माना जाता है कि शिव जी ने ही यहां पर ब्रह्मकमल स्थापित किया था। यही नहीं इस गुफा में कुल 33 करोड़ देवी-देवता की मूर्तियां भी स्थापित हैं। इसी कारण उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में स्थित पाताल भुवनेश्वर गुफा भक्तों की आस्था का केंद्र बनी हुई है। यह गुफा उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के प्रसिद्ध नगर अल्मोड़ा से शेराघाट होते हुए 160 किलोमीटर की दूरी तय कर पहाड़ी वादियों के बीच बसे सीमान्त कस्बे गंगोलीहाट में स्थित है। पाताल भुवनेश्वर गुफ़ा किसी आश्चर्य से कम नहीं है।