ये हैं भारत की दबंग महिला IPS अधिकारी, जिनके नाम से अपराधी खाते हैं खौफ


किरण बेदी को आज पूरा देश जानता है। इसकी वजह यह है कि भारत की पहली महिला आईपीएस ऑफिसर होने के साथ-साथ वह बहुत बहादुर भी थी। अपनी बेबाक छवि की वजह से वह लोगों के बीच किरण बेदी के बजाय क्रेन बेदी के नाम से ज्यादा जानी जाती हैं।

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किरण बेदी के आलावा भी, भारत में ऐसी कई महिला आईपीएस अधिकारी हैं, जिनकी क्षमता को किरण बेदी से कम नहीं आंका जा सकता।

 अपराजिता रॉय

अपराजिता रॉय ने साल 2012 में UPSC के परीक्षा में 358 रैंक हासिल की थी। अपराजिता असम की पहली गोरखा महिला आईपीएस अधिकारी हैं। अपराजिता इस वक्त फिलहाल पश्चिम बंगाल में पोस्टेड हैं, लेकिन गोरखालैंड की मांग के चलते उन्हें अब दार्जिलिंग पोस्ट करने का विचार किया जा रहा है।

संगीता कालिया

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संगीता कालिया को आईपीएस बनने का ख्याल 90 के दशक में आने वाले एक शो उड़ान से मिली थी। फिलहाल वे हरियाणा पुलिस डिपार्टमेंट में पोस्टेड हैं। संगीता ने पहले जब 2 बार UPSC का एग्जाम क्लियर किया तो उन्हें IAS के लिए चुना गया, तीसरी बार UPSC की परीक्षा पास करने के बाद उन्हें आईपीएस के लिए चुना गया। संगीता ने साल 2005 में सिविल सर्विसेज की परीक्षा दी लेकिन वो सफल नहीं हो पाईं। दूसरी कोशिश में भी उन्हें भारतीय रेल सेवा में नौकरी मिली. लेकिन उनका सपना कुछ और था। उन्होंने रेल की सर्विस ज्वाइन नहीं की। आखिरकार तीसरे मौके में उन्हें भारतीय पुलिस सेवा में जाने का मौका मिला। भिवानी की रहने वाली संगीता ने UPSC की परीक्षा में 651 वां रैंक प्राप्त किया।

संजुक्ता पराशर

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असम की महिला आईपीएस ऑफिस संजुक्‍ता पराशर बहादुरी का दूसरा नाम हैं। इस वक्‍त वे राज्‍य के सोनितपुर में बतौर एसपी तैनात हैं। पिछले 15 महीनों से पराशर बोडो उग्रवादियों के खिलाफ ऑपरेशन पर अपनी पूरी टीम के साथ काम कर रही है। पराशर ने असम में शुरुआती शिक्षा लेने के बाद दिल्‍ली के इंद्रप्रस्‍थ कॉलेज से ग्रेजुएट किया है। इसके बाद दिल्ली के जवाहर लाल नेहरु यूनिवर्सिटी से पीएचडी की। संजुक्‍ता पराशर साल 2006 बैच की आईपीएस ऑफिसर हैं। उन्‍होंने सिविल सर्विसेज में 85वीं रैंक हासिल की थी। अच्‍छी रैंक की वजह से उनके पास अपना काडर खुद चुनने का अॉप्‍शन था लेकिन उन्‍होंने मेघालय-असम को चुना। असम उनका गृह राज्‍य है।

मीरा बोरवंकर

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मीरा चड्ढा बोरवांकर यह महाराष्ट्र कैडर में पहली महिला आईपीएस अधिकारी बनी थी और यह बात भारत के फाजिल्का शहर के लिये गर्व की बात हैं। फाजिल्का , मीरा चड्ढा बोरवांकर,यह पहली महिला है; जो 150 वर्ष के इतिहास में मुंबई पुलिस की अपराध शाखा के पद पर तैनात की गई। उनका जन्म और पढाई पंजाब के फाज़िलका जिले में हुआ। उन्होंने D.C Model School फाज़िलका में अपनी पढाई की थी। मीरा के पिता ओ.पी.चड्ढा बॉर्डर सिक्यूरिटी फ़ोर्स(BSF) में थे। उनकी पोस्टिंग फाज़िलका में ही थी। इसी दरमियान मीरा ने मेट्रिक तक शिक्षा फाज़िलका में पाई। इसके बाद 1971 में उनके पिता का तबादला हुआ।

जब लोग आई पी एस बनने पर सवाल पुछते थे तब वह कहती थी कि ” मैं पढ़ाई में भी अच्छी थी, नाटकों में भाग लेने में भी अच्छी थी, वाद-विवाद में भी और मैं पंजाब के क्रिकेट टीम में भी अच्छी थी “। इसलिए सामान्य रूप में मैं कोई भविष्य विचार के साथ बडी हुई , लेकिन मुझे यकीन था कि मैं जीवन में कुच नया करुंगी। मैं अपने जीवन शादी के साथ समाप्त करना नही चाहता थी।

रुवैदा आलम

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27 वर्षीय रुवैदा सलाम को अपने सपने को साकार करने के लिए कई मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा। जब उन्होंने पहले MBBS की परीक्षा पास की, तो उनके माता-पिता और रिश्तेदारों ने उनके ऊपर शादी करने के लिए दबाव डालना शुरू कर दिया। लेकिन MBBS में अपार सफलता हासिल करने के बाद शादी करके जिंदगी बिताने के बजाय रूवैदा ने आगे बढ़ने का फैसला किया और अपनी मेहनत और लगन के साथ अपने बुलंद हौसलों के दम पर ये कामयाबी हासिल की।

 गौरतलब है कि इस साल के UPSC की परीक्षा में सफल होने वाले 998 सफल उम्मीदवारों में रुवैदा ने 820वीं रैंक प्राप्त की है। इसके साथ ही रुवैदा पहली ऐसी भारतीय मुस्लिम लड़की बन गईं हैं, जिन्होंने भारतीय सिविल सेवा परीक्षा पास की है। रुवैदा ने मेडिकल की पढ़ाई 2009 में शुरू कर दी थी। उन्होंने श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज से अपनी डिग्री हासिल की। उसके बाद श्रीनगर में लोक सेवा आयोग की परीक्षा के लिए आवेदन किया। यहां पर 398 पोस्ट थी, इसमे रूवैदा ने 25वीं रैंक हासिल की।

 

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