ये है वो ‘नटवरलाल’ ! जिसने बेच दिये थे ताजमहल, लालकिला और राष्ट्रपति भवन


नई दिल्ली :  हिन्दुस्तान के इतिहास का सबसे बड़ा ठग  जिसने 3 बार ताजमहल, 2 बार लाल किला और 1 बार राष्ट्रपति भवन बेच दिया और किसी को भनक तक नहीं लगी। लेकिन जब पकड़ा गया तो पुलिस वालों से कहा – ‘मैंने किसी को भी पैसों के लिए डराया-धमकाया नहीं, लोग ने हाथ जोड़कर खुद मुझे पैसे दिए’… ‘अगर आप में दिमाग होगा तो आप सच का पता लगा लेंगे।’

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जी हां हम बात कर रहे हैं हिन्दुस्तान के सबसे बड़े ठग ‘मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव उर्फ  नटवरलाल’ की। नटवरलाल एक ऐसा ठग था जिसने वेश्याओं के भी पैसे और गहने लूटे।

कहानी मिथिलेश कुमार उर्फ ‘नटवरलाल’ की

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‘मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव उर्फ नटवरलाल’  सबसे बड़ा ठग जिसने 3 बार ताजमहल, 2 बार लाल किला और एक बार राष्ट्रपति भवन बेचकर देश में तहलका मचा दिया था। मजेदार बात ये है कि नटवरलाल ने वकालत करने के बाद ठगी का रास्ता चुना। वह इतना बड़ा ठग था कि 8 राज्यों में 100 से ज्यादा मामलों में पुलिस उसे ढूंढ रही थी। 8 बार वो देश की अलग-अलग जेलों से फरार हुआ। जिसने ठगी के लिए राजीव गांधी से लेकर राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद तक के नाम का इस्तेमाल किया।

नटवरलाल का खौफ  छाया रहा  तीन दशकों तक

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70, 80 और 90 के दशकों यानि पूरे 30 साल तक इस शख्स ने देश के हर छोटे बड़े आदमी को ठगा। कानून भले ही नटवर को अपराध मानता हो, लेकिन वह खुद को एक समाजसेवक मानता था। नटवरलाल के नाम पर मुहावरे बने। नटवरलाल ने एक बार पुलिस वालों से कहा था कि, वह लोगों से सिर्फ झूठ बोलता है और वो उसे पैसे दे देते हैं, इसमें मेरा क्या कसूर है। नटवरलाल ने तो यहां तक कहा था कि अगर सरकार कहे तो वह ठगी से भारत का सारा विदेशी कर्ज उतार सकता है।

मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव था वास्तविक नाम

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नटवरलाल का वास्तविक नाम मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव था, जो पेशे से वकील होने के बावजूद ठगी करता था। नटवरलाल का जन्म बिहार के सीवान जिले के जीरादेई गांव से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव बंगरा में हुआ था।

नटवरलाल ने 3 बार ताजमहल, 2 बार लाल क़िला और एक बार राष्ट्रपति भवन बेचकर दुनिया भर को आश्चर्य में डाल दिया था। यहां तक कि उसने तत्कालिन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के फर्जी हस्ताक्षर के जरिए भी कई ठगी की थी। कहा तो ये भी जाता है कि उसने धीरूभाई अम्बानी, टाटा और बिरला से भी करोड़ो की ठगी की थी।

113 साल की सजा हुई थी नटवरलाल को

 

मिथिलेश कुमार के खिलाफ 8 राज्यों में 100 से अधिक मामले दर्ज थे, जिसके बाद उसे किसी तरह पकड़ा गया और 113 साल की सजा दी गई। वह अपने जीवनकाल में कुल 9 बार गिरफ्तार हुआ, लेकिन हर बार वह देश की अलग-अलग जेलों से भाग निकला। पुलिस ने जब उसे आखिरी बार पकड़ा तब उसकी उम्र 84 साल थी। सेहत खराब होने कि वजह से उसे 24 जून 1996 को कानपुर जेल से एम्स अस्पताल लाया जा रहा था, लेकिन वह नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पुलिस टीम को चकमा देकर वह भाग निकला और इसके बाद उसका पता नहीं चला।

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