ये है वो सॉफ्टवेयर जो चोरी का मोबाइल ढूंढना बनता है ना-मुमकिन


आज के जमाने में स्मार्टफोन इतने महंगे हैं कि उन्हें बेच कोई भी अच्छी खासी रकम कमा सकता है. पहले जब किसी का फोन चोरी होता था तो पुलिस कुछ ही घंटो में उस फोन का IMEI नुम्बर ट्रेस करके चोर तक पहुँच जाया करती थी. लेकिन, अब चाइना के एक सॉफ्टवेर ने सब बदल कर रख दिया है।

अब चोरों को फ़ोन ट्रेस से बचाने के लिए ये एक मामूली सॉफ्टवेयर ही काफी है। इस सॉफ्टवेर की मदद से कोई भी फोन का पुराना आईएमईआई नंबर करप्ट करके उसकी जगह नया ईएमईआई नंबर डाला जा सकता है। इससे पुलिस आपके पुराने आईएमईआई नंबर तक कभी नहीं पहुँच पायेगी।

ऐसी ही तकनीक इस्तेमाल करने वाला एक चोर हाल ही में पुलिस की गिरफ्त में आया है। जबलपुर का ये चोर अक्सर इस सॉफ्टवेयर की मदद से फोन को चोरी करके उसका पूरा सिस्टम बदल देता था और फिर उसको बेच देता था. पुलिस इस सॉफ्टवेयर के बारे में जानकार हैरान है।

घमापुर शीतला माई मंदिर के पास से गिरफ्तार किए गए मोबाइल शॉप संचालक ने क्राइम ब्रांच की पूछताछ में इस पूरे मामले का खुल्लासा किया है. फ़िलहाल पुलिस को इस सॉफ्टवेयर का कोई तोड़ नहीं मिल पा रहा इसके लिए पुलिस ने साइबर विंग मल्टीनेशनल सॉफ्टवेयर डेवलपर्स से मदद की गुहार लगाई है।

चलिए जानते हैं इस सॉफ्टवेयर के बारे में विस्तार से मोबाइल के आईएमईआई नंबर को बदलने के लिए चोर चाइना का बनाया हुआ एक सॉफ्टवेयर खरीदते हैं और अपनी दुकान पर रखे कंप्यूटर या लैपटॉप में उसको इंस्टाल करते हैं. इसके बाद वह पुराने और खराब फ़ोन्स के आईएमईआई नंबर उठा कर उन चोरी के फ़ोन से रिप्लेस कर देते हैं।

ऐसा करने से पहले वह फोन के पुराने आईएमईआई नंबर को डिस्ट्रॉय या करप्ट कर देते हैं ता कि उसकी जगह नया नंबर डाल सकें. आज कल लोग आईएमईआई बदलवाने के लिए मुंह मांगी कीमत देने को तयार रहता हैं। इसकी कीमत वह लगभग एक हजार रूपये से लेकर दस हजार रूपये तक की रखते हैं. जब किसी व्यक्ति के फोन का सॉफ्टवेयर उड़ जाता है तो वह दूकानदार के पास फोन लेजाता है. दुकानदार उसके फोन का सारा डाटा अपने कंप्यूटर में सेव कर लेता है। यही डाटा वह फोन के आईएमईआई नंबर को बदलने के वक्त करते हैं।

आपको जिस भी फोन का आईएमईआई नंबर बदलना है उसके लिए आपको नये आईएमईआई नंबर के पहले दो डिजिट सेम रखना बहुत जरूरी है. क्यों कि अगर दोनों नंबर में समानता नहीं होगी तो वह आपस में रिप्लेस नहीं होंगे. मोबाइल चाहे किसी भी ब्रांड या कंपनी का क्यों ना हो, इस सॉफ्टवेयरसे उसका पूरा सिस्टम बदला जा सकता है।

साइबर क्राइम टीम की गिरफ्त में आये मोबाइल रिपेयर दुकानदार ऋषि चौरसिया ने बताया कि बहुत सारे लोग अपने फोन रिपेयर के लिए छोड़ जाते थे और ज्यादा खर्चा आने के कारण वापिस नहीं लेजाते थे। और नंबर रिप्लेस करने के लिए वह उन्ही फ़ोन्स का इस्तेमाल करता था। इससे किसी को उसपर कोई शक भी नहीं होता था. फ़िलहाल पुलिस साइबर विंग डिपार्टमेंट की सहायता से इस सॉफ्टवेयर को बंद करवाने की कोशिश में लगी हुई है।

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