तिरुपति बालाजी में प्रतिदिन 20,000 भक्त अपने बालों का करते है दान, जानिये क्या है रहस्य !


tirupati balaji

हम आपको दक्षिण भारत के एक ऐसे विश्वविख्यात मंदिर के विषय में बताने जा रहे हैं जहां आने वाले भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर सिर के बाल अर्पण करते हैं। तिरुपति बालाजी का मंदिर आंध्र प्रदेश के तिरुमाला में स्थित हैं। इस मंदिर में सबसे अमीर देवताओं का निवास हैं। यहां दूर-दूर से लोग दर्शन करने के लिए आते है। अपनी इच्छा अनुसार यहां पर लोग चढ़वा चढ़ते है।

tirupati balajiहर साल यहां भारी मात्रा में लोग भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए तिरुमाला की पहाडिय़ो पर भीड़ लगाते हैं। लोगों की मान्यता है कि तिरुपति बालाजी अपनी पत्नी पद्मावती के साथ तिरुमला में निवास करते हैं। कहा जाता है इस मंदिर में जो भी भक्त सच्चे दिल से कुछ भी मंगता है उसकी मनोकामना जरूर पुरी हो जाती है। भगवान तिरुपति बालाजी को वेंकटेश्वर, श्रीनिवास और गोविंदा के नाम से भी जाना जाता है।

tirupati balajiइस मंदिर के बहुत ज्यादा विख्यात होने का कारण यहां के अद्भुत चमत्कार हैं। इस मंदिर से बहुत सारी मान्यताएं जुड़ी हैं। इस मंदिर में वेंकटेश्वर स्वामी की मूर्ति पर लगे हुए बाल असली हैं और ये कभी भी उलझते नहीं हैं तथा हमेशा मुलायम रहते हैं। लोगों का मानना है कि ऐसा इसलिए है, क्योंकि यहां पर खुद भगवान विराजते हैं। भगवान बालाजी की मूर्ति पर अगर कान लगा के सुना जाए तो समुद्र की आवाज सुनाई देती है।

tirupati balajiआपको यह बात जानकर हैरानी होगी कि लाखों की संख्या में यहां भक्त आते हैं जिनमें से प्रतिदिन 20,000 भक्त अपने बाल दान करके जाते हैं। इस कार्य को संपन्न करने के लिए मंदिर परिसर में करीब 600 नाइयों को भी रखा गया है। दान के रूप में मिले बालों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेचा जाता है। भारतीय बालों की बनावट और उनकी प्रकृति, बेहतरीन होती है इसलिए बालों की लंबाई के आधार पर इनकी कीमत कई डॉलर्स में चुकाई जाती है।

tirupati balajiतिरुपति बालाजी से जुड़ि कुछ विशेष मान्यताएं
माना जाता है कि तिरुपति बालाजी अपनी पत्नी पद्मावती के साथ तिरुमला में रहते हैं। तिरुपति बालाजी मंदिर के मुख्य दरवाजे के दाईं ओर एक छड़ी है। कहा जाता है कि इसी छड़ी से बालाजी की बाल रूप में पिटाई हुई थी, जिसके चलते उनकी ठोड़ी पर चोट आई थी।

tirupati balajiमान्यता है कि बालरूप में एक बार बालाजी को ठोड़ी से रक्त आया था। इसके बाद से ही बालाजी की प्रतीमा की ठोड़ी पर चंदन लगाने का चलन शुरू हुआ। कहते हैं कि बालाजी के सिर रेशमी बाल हैं और उनके रेशमी बाल कभी उलझते नहीं। कहते हैं कि तिरुपति बालाजी मंदिर से करीब करीब 23 किलोमीटर दूर एक से लाए गए फूल भगवान को चढ़ाए जाते हैं। इतना ही नहीं वहीं से भगवान को चढ़ाई जाने वाली दूसरी वस्तुएं भी आती हैं। लोग कहते हैं कि उस गांव में किसी बाहरी शख्स का जाना मना है, क्योंकि वहां कि औरतें ब्लाउज नहीं पहनती।

tirupati balajiहैरानी की बात तो यह है कि वास्तव में बालाजी महाराज मंदिर में दाएं कोने में खड़े हैं, लेकिन उन्हें देख कर ऐसा लगता है मानों वे गर्भगृह के मध्य भाग में खड़े हों। तिरुपति बालाजी मंदिर में बालाजी महाराज को रोजाना धोती और साड़ी से सजाया जाता है। कहते हैं कि बालाजी महाराज की मूर्ती की पीठ पर कान लगाकर सुनने से समुद्र घोष सुनाई देता है। उनकी पीठ को चाहे जितनी बार भी क्यों न साफ कर लिया जाए वहां बार बार गीलापन आ जाता है।

tirupati balajiतिरुपति का सम्पूर्ण क्षेत्र भगवान विष्णु के बैकुंठ धाम के बाद सबसे ज्यादा प्रिय है। तिरुपति बालाजी के इस मंदिर में साल भर भक्तों तथा धर्मपर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। श्री बालाजी तथा मंदिर के आसपास का क्षेत्र भी काफी दर्शनीय है, इसीलिए यह क्षेत्र पर्यटकों की एक पसंदीदा जगह बन गया है।

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