आंखों को कमजोर कर देती है बढ़ती उम्र


बढ़ती उम्र के साथ आंखें भी बुढ़ापे को महसूस करती हैं। उदहारण के तौर पर एपिरेटिनल मेम्ब्रेन (ईआरएम) हमारी आंखों के बुढ़ापे को दर्शाने वाली स्थिति है। आंख एक कैमरे की तरह काम करती है, जिसमें ऊपरी लेंस की भूमिका आईरिस निभाता है और फिल्म का काम रेटिना करता है यानी हमारे द्वारा देखी जाने वाली चीजें रेटिना पर प्रदर्शित होती हैं। रेटिना के बीच में मैक्युला होता है, जो चीजों पर फोकस करने में सहायता करता है, परंतु समय के साथ रेटिना के संपर्क में मौजूद विटेरौस जेल, मैक्युला से दूर हो जाता है, जिससे हमारी आंखों की रोशनी पर असर आ सकता है।

एपिरेटिनॉल मेम्ब्रेन क्या है:

– एपिरेटिनॉल मेम्ब्रेन बढ़ती उम्र से जुड़ी हुई बीमारी है। इससे अंधेपन का खतरा नहीं होता है, पर रोजमर्रा के काम करने में खासी परेशानियां आ सकती है। ये बीमारी अक्सर 50 साल या इससे ऊपर के व्यक्ति को हो सकती है।

– इस दौरान व्यक्ति की दृष्टि सामान्य ही बनी रहती है पर समय बीतने के साथ उसका सेंट्रल विजन धुंधलाने लगता है। पीडि़त को सीधी लकीरे, दरवाजे, खिड़कियां, खम्बे आदि जैसी वस्तुएं लहरदार नजर आती हैं।

– ईआरएम किसी ओकुलर सर्जरी या आंख के अंदर सूजन का परिणाम भी हो सकता है। ईआरएम कई पूर्ववर्ती परिस्थितियों जैसे कि पूर्व रेटिनल ब्रेक या अलगाव, रेटिनल वैस्कुलर रोग जैसे डायबिटिक रेटिनोपैथी या वेनस ऑक्लूसिव रोग के साथ जुड़ा हो सकता है।

क्या है इसका इलाज?

इसके उपचार का विकल्प विटेक्टोमी है, जो कि एक सर्जिकल तरीका है। इस प्रक्रिया में आंख के भीतर मौजूद विटेरौस जेल ओर ईआरएम को हटा दिया जाता है, जिससे कि वो काम झुर्रीदार हो जाता है। इस प्रक्रिया में कम्प्लीकेशन और इंफेक्फ्शन का खतरा बहुत काम रहता है। सर्जरी के बाद दृष्टि सुधार इन तीन बातों पर निर्भर करता है कि ईआरएम कितने समय से मौजूद है, विटेरौस जेल की मैक्युला से दूरी और ईआरएम का कारण। अधिकतर मामलों में ईआरएम से नियमित नेत्र जांच की सहायता से बचा जा सकता है।

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