जानिये क्यों श्राद्ध पक्ष में कपड़े, सोना-चांदी, घर आदि ख़रीदना अशुभ होता है !


आजकल श्राद्ध चल रहे है जो की हिन्दू समाज में एक महा पर्व की तरह मनाया जाता है। श्राद्ध पक्ष को पितृ पक्ष भी कहा जाता है। हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक श्राद्ध पक्ष मनाया जाता है। ये अवधि लगभग 14 दिनों की होती है। श्राद्ध में हिन्दू धर्म के अनुसार लोग अपने पूर्वजों का आभार प्रकट करते है और साथ ही उन्हें श्रद्धांजलि भी अर्पित करते है।

माना जाता है की श्राद्ध पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज हमसे मिलने पृथ्वी पर लौटते है और हमे एक अच्छे जीवन के लिए आशीर्वाद प्रदान करते है। लेकिन फिर इस श्राद्ध पक्ष की इन 14 दिन की अवधि को अशुभ क्यों माना जाता है।

आपने भी सुना होगा की श्राद्ध के दिनों में कोई नयी वास्तु नहीं खरीदनी चाहिए और न ही कोई शुभ काम की शुरुआत करनी चाहिए। यहाँ तक की सोना चांदी , कपडे तक भी नहीं खरीदने चाहिए। यहाँ तक माना जाता है की इस पक्ष में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और सादा भोजन करना चाहिए।

लेकिन ऐसा क्यों है ? आज आपको बताते है ऐसा इसलिए है क्योंकि अगर हम श्राद्ध पक्ष के दौरान अपने लिए कुछ नया खरीदते है या किसी नये काम की शुरुआत करते है तो हमारा ध्यान अपने पितृ यानि पूर्वजों से हटकर खुदपर केंद्रित हो जाता है और इसी वजह से हमारे पूर्वज हमसे रुष्ट हो जाते है।

ऐसा होने की स्थिति में हमे नुक्सान होता है। धर्म शास्त्रियों और विद्वानों के अनुसार, ये 14 दिन केवल पितरों के लिए होते हैं और इस समय आपका ध्यान केवल उनके तर्पण और उनको याद करने में होना चाहिए।

इस बात में एक तर्क और दिया जाता है की ये समय शोक व्यक्त करने का होता है इसलिए इसमें उनके लिए जो अब हमारे बीच नहीं है इसलिए अपनी ख़ुशी के लिए कुछ करना ठीक नहीं माना जाता। हाँ एक मान्यता ये भी है की गणेश चतुर्थी और नवरात्रों के बीच आने पर श्राद्ध पक्ष को अशुभ माहि माना जा सकता।

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