जीवन में स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है योग


व्यस्तता अब हर जगह की, हर किसी की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा है। नतीजतन सब कुछ व्यस्तता के साथ सोचा जा रहा है। चाहे बात स्वास्थ्य की हो या सुकून की। चाहे स्वस्थ रहने की दीर्घकालिक योजनायें हों या फिर फिट रहने के क्विक फार्मूले, सब कुछ व्यस्तता को ध्यान में रखकर विकसित किये जा रहे हैं। यहां हम ऐसे ही कुछ योगासनों की चर्चा करेंगे जो खासतौर पर व्यस्त लोगों को ध्यान में रखकर विकसित या कहें चिंहित किये गए हैं। सबसे राहत देने वाली बात तो यह है कि इन्हें अंजाम देते हुए विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करने की भी जरूरत नहीं पड़ती। कहने का मतलब यह है कि इन क्रियाओं को आप उठते-बैठते, चलते-फिरते, हर कार्य करते हुए भी कर सकते हैं।

1) द्वकुर्सी आसन

ये आसन 9-5 दफ्तर में व्यस्त रहने वालों के लिए खासतौर पर फायदेमंद हैं। कुर्सी पर रीढ़, गला व सिर को सीधा करके बैठें। ध्यान रहे कुर्सी का ढांचा ऐसा होना चाहिए कि रीढ़ के पीछे किसी और चीज का सहारा न लेना पड़े। यदि कुर्सी पर लगातार ज्यादा देर तक बैठे रहने की आवश्यकता पड़ती हो तो प्रत्येक घंटे बाद दो-तीन मिनट के लिए उठकर खड़े हो जाना चाहिए। इस आसन के लिए दोनों हाथ की उंगुलियों को आपस में गूंथकर सिर के ऊपर ले जाकर तानना चाहिए। साथ में एड़ी भी ऊपर उठाएं। यह क्रिया दस बार दुहराएं। ऐसा करने से व्यक्ति आज की बहुचर्चित बीमारियों स्पॉन्डिलाइटिस, स्लिप डिस्क और पीठ दर्द आदि से बचा रह सकता है। यदि हम अपनी कुर्सी का ढांचा इस प्रकार बना लें कि उस पर पैर मोड़कर पद्मासन या सिद्धासन में बैठ सकें तो पेट बाहर निकलने, सायटिका, कमर दर्द, वेरीकोज वेंस, मोटापा, थकान लगने तथा पेट के कई और रोगों से भी बचा जा सकता हैं।

2) आंखों के लिए त्राटक क्रिया

अंग्रेजी में जिसे गेजिंग थैरेपी कहते हैं कुछ वैसे ही होती है त्राटक क्रिया। अगर आपको देर तक कंप्यूटर पर कार्य करना पड़ता हो तो आंखों की कमजोरी बढ़ जाती है। इस स्थिति से बचने के लिए कंप्यूटर पर ही कोई बिंदु लगभग एक से दो मिनट तक अपलक देखना चाहिए। इस समय को धीरे-धीरे बढ़ाते जाना चाहिए। साथ में उत्थित पद्मासन करें इससे हाथ की हथेलियों एवं उंगुलियों की समस्या दूर हो जाती हैं।

3) द्वसूक्ष्म व्यायाम-

यदि सर्वाईकल स्पॉन्डिलाइटिस न हो तो गर्दन को दस बार घड़ी की सुई की दिशा में और इतनी ही बार विपरीत दिशा में घुमाएं। कंधे को भी दस-दस बार दोनों दिशाओं में घुमाएं। कभी-कभी तितली आसन का अभ्यास करें। कुर्सी पर बैठे ही बैठे टखनों को दोनों दिशाओं में घुमाएं।

4) द्व श्वास क्रिया-

व्यस्त दिनचर्या वाले लोगों को श्वांस-प्रश्वास गहरी करने का प्रयास करना चाहिए। यदि वह क्रिया न कर सकें तो प्रत्येक घंटे बाद दो-दो मिनट के लिए श्वसन क्रिया गहरी करें। साथ में यदि 5 से 10 मिनट के लिए नाड़ी शोधन प्राणायाम का अभ्यास कर लिया जाए तो समस्या का समाधान हो सकता है।

5) द्वध्यान

चिंता, फिक्र, निराशा, तनाव तथा अवसाद से आज हम सब पीडि़त हैं और ये समस्याएं हमारे आचार-विचार तथा व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव तो डालती ही हैं, कई तरह के रोगों को भी जन्म देती हैं। ध्यान एवं शिथिलीकरण के अभ्यास से इसका समाधान हो सकता है। द्य

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