सिंगल्स में हारने का मलाल नहीं


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नई दिल्ली : मिक्स्ड डबल्स खिलाड़ियों में कभी नंबर एक पर रही सानिया मिर्जा का मानना है क़ी सिंगल्स मे कोई ग्रैंड स्लैम जीतना बहुत मुश्किल है। ऐसा उन्होने सुपर टेक स्पोर्ट्स विलेज ग्रेटर नोएडा में टेनिस अकादमी के उद्घाटन अवसर पर कहा। पंजाब केसरी द्वारा पूछे गये एक सवाल के जवाब में सानिया ने कहा की उसने अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन किया और एशियाड और तमाम आयोजनों में खिताब जीते लेकिन सिंगल्स नहीं जीतने का कोई मलाल नहीं है। कारण टेनिस के इस फारमेट में प्रतिस्पर्धा बहुत कठिन है। भविष्य की प्लांनिंग के बारे में उसने बताया क़ी पिछले कई हफ्तों से घुटने की चोट के कारण नहीं खेल पा रही।

आस्ट्रेलियन ओपन में भाग नहीं लिया और हो सकता है की विम्बलडन में भी ना खेल पाए क्योंकि डाक्टरों के अनुसार लंबे विश्राम की ज़रूरत है। उसकी बातों से लगा कि अब खेल से सन्यास का समय आ गया है और इस बारे में सोचने से पहले अकादमी से जुड़ने पर विचार किया है। फिलहाल वह हैद्राबाद मे अकादमी चला रही हैं और सुपरटेक टेनिस अकादमी को भी समय देंगी। सानिया ने पहली बार 2002 मे एशियाई खेलों में भाग लिया था। तत्पश्चात वह लगातार एशियाई खेलों में पदक जीतती आ रही हैं। छह ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने वाली देश की इस सर्वकालीन श्रेष्ठ महिला खिलाड़ी की राय में भारत मे खेलों को लेकर जागरूकता आई है।

अब अधिकाधिक बच्चे कोई ना कोई खेल अपनाना चाहते हैं। अच्छी बात यह है कि मां-बाप भी उनकी भावनाओं को समझ रहे हैं और सपोर्ट भी कर रहे हैं। सानिया मिर्ज़ा के अनुसार चीन और अमेरिका जैसे देशों ने खेलों को पढ़ाई लिखाई की तरह का दर्जा दिया है। वहां हर बच्चा कोई ना कोई खेल ज़रूर खेलता है। भारत में भी सरकारों ने खेलों के महत्व को समझा है। उसे लगता है कि अब भारतीय खेल सही दिशा में चल रहे हैं।

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