नहीं हो पायी EVM हैक……..


ईवीएम मशीनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर देश के कुछ राजनीतिक दलों ने अपनी ही खिल्ली उड़वाने का काम किया। चुनाव आयोग द्वारा शनिवार को आयोजित ईवीएम हैकिंग  चैलेंज प्रतियोगिता में कोई भी दल ईवीएम मशीनों को हैक नहीं कर पाया। सीपीएम और एनसीपी के तकनीकी विशेषज्ञों की एक-एक टीम शनिवार सुबह 10 बजे चुनाव आयोग पहुंच गई थी। दोनों ही दलों को चार-चार ईवीएम मशीनें उपलब्ध करवाई गई थीं। दोनों दलों के विशेषज्ञों को अलग-अलग कमरों में मशीनों से छेड़छाड़ करने की अनुमति दी गई थी लेकिन मशीनों को दिए जाने के दो घंटे बाद दोनों ही टीमें ईवीएम से छेड़छाड़ साबित नहीं कर पाईं। अंत में दोनों ही दलों ने यह कहकर किनारा करना बेहतर समझा कि वे तो केवल प्रक्रिया को समझने के लिए आए थे। कई राजनीतिक दलों के द्वारा चुनाव आयोग के द्वारा ईवीएम मशीनों से चुनाव कराने को लेकर सवाल खड़ा किया था। इन संदेहों को खत्म करने के लिए चुनाव आयोग ने अपने कार्यालय में ईवीएम हैक करने की प्रतियोगिता का आयोजन किया।

 इसके लिए पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनावों में जिन ईवीएम मशीनों का इस्तेमाल किया था, उनमें से कुछ मशीनों को मंगवाया गया। आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया था लेकिन एनसीपी और सीपीआईएम सहित सिर्फ 8 दलों ने ही इस प्रतियोगिता में भाग लेने की इजाजत मांगी थी। इन दलों में से भी शनिवार को सिर्फ दो ही दल के विशेषज्ञ चुनाव आयोग पहुंचे। गत फरवरी-मार्च में देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव सम्पन्न हुए। इनमें भाजपा को अच्छी बढ़त हासिल हुई। यूपी में बुरी तरह हार का सामना करने के बाद सबसे पहले मायावती ने ईवीएम मशीनों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह भाजपा की जीत नहीं बल्कि ईवीएम मशीनों की जीत है। उनके कार्यकर्ता उनकी पार्टी को वोट दे रहे थे लेकिन बाद में यह देखा गया कि उनकी पार्टी के लोगों का वोट दूसरी पार्टी यानी भाजपा को जा रहा था।  मायावती ने कहा कि मुस्लिम बहुल सीटों पर भी भाजपा कैसे जीत गई? कुछ दिनों के बाद सपा नेता अखिलेश यादव ने भी कहा कि अगर कुछ लोगों को ईवीएम पर शक है तो इस शंका का समाधान अवश्य ही होना चाहिए।

मायावती की इस बात के बाद आम आदमी पार्टी सहित कई राजनीतिक दलों ने ईवीएम पर सवाल खड़े किए। कांग्रेस के नेतृत्व में 16 दलों ने राष्ट्रपति से मिलकर शंका का समाधान होने तक बैलेट पेपर के माध्यम से चुनाव कराने की मांग की। हालांकि इस सवाल पर चुनाव आयोग ने गहरी आपत्ति जताई थी। उसने कहा था कि राजनीतिक दलों को अपनी हार का ठीकरा चुनाव आयोग के सिर पर नहीं फोडऩा चाहिए बल्कि इसके लिए उन्हें अपनी राजनीतिक विचारधारा और रणनीति पर ध्यान देना चाहिए। आयोग ने दावा किया कि उसकी मशीनें पूरी तरह सुरक्षित और टैम्पर प्रूफ हैं। चुनाव आयोग ने सभी दलों की आपत्तियों को सुनते हुए चुनाव आयोग में ही सभी सात राष्ट्रीय दलों और 49 क्षेत्रीय दलों को बुलाया। उनके सामने ईवीएम मशीनों की कार्य प्रणाली दिखाई और कहा कि ईवीएम पूरी तरह टैम्पर प्रूफ हैं। इनमें किसी भी तरह छेड़छाड़ सम्भव नहीं है। उसी क्रम में शनिवार को चुनाव आयोग ने ईवीएम हैक करने की प्रतियोगिता का आयोजन किया था। सिर्फ आठ दलों ने इस कार्यक्रम में भाग लेने की स्वीकृति दी। आज सिर्फ दो दलों के प्रतिनिधि चुनाव आयोग पहुंचे और दो घंटे की मशक्कत के बाद उन्होंने कहा कि वे तो केवल प्रक्रिया को समझने आये थे, उन्हें ईवीएम पर कोई शक नहीं है।

इस तरह राजनीतिक दलों की ईवीएम हैक करने की कहानी की हवा निकल गई।

वहीं इस मामले में सबसे ज्यादा मुखर रही आम आदमी पार्टी ने इस प्रतियोगिता में ही भाग लेने से मना कर दिया। उसके मुताबिक चुनाव आयोग मशीनों का पूरा एक्सेस देने को तैयार नहीं है। इससे छेड़छाड़ साबित करना सम्भव नहीं है। पहले भी दिल्ली विधानसभा में ईवीएम मशीनों के जैसी मशीन का इस्तेमाल कर उसके लाइव डेमो दिखा चुकी आप नेे कहा है कि वह आज भी ईवीएम हैक करके दिखायेगी। ज्ञात रहे कि चुनाव आयोग ने हैकेथान का आयोजन करने के पूर्व ही बता दिया था कि इस कार्यक्रम में मशीनों के मदरबोर्ड को बदलने की इजाजत नहीं दी जाएगी क्योंकि मदरबोर्ड बदलने का मतलब पूरी मशीन को ही बदलना होता है। चुनाव आयोग ने इस हैकेथान प्रतियोगिता के लिए मीडिया को आने की इजाजत नहीं दी थी। उसने पहले ही बता दिया था कि इस हैकेथान प्रतियोगिता की खबरें आधिकारिक ट्विटर के जरिये साझा की जाती रहेंगी लेकिन इनके लाइव प्रदर्शन की इजाजत नहीं होगी।

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