GST : जानें क्या होगा सस्ता और क्या महँगा


नई दिल्ली: देश के इतिहास में आजादी के बाद के सबसे बड़े अप्रत्यक्ष कर सुधार ‘एक राष्ट्र, एक कर’ की अवधारणा पर अधारित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के 1 जुलाई से लागू होने पर आजादी के बाद सबसे बड़ा कर सुधार माने जानेवाले जीएसटी का सबसे बड़ा असर आपकी जेब पर पड़ेगा। अधिकांश खाद्य पदार्थ, लग्जरी कारें, मोटरसाइकिल, साइकिल आदि जहां सस्ते हो जायेंगे, वहीं स्कीम्ड मिल्क, कस्टर्ड पाउडर, चॉकलेट, इंस्टेंट कॉफी और मेकअप के समान जैसे उत्पाद महंगे हो जायेंगे। जीएसटी परिषद ने सभी उत्पादों और सेवाओं के लिए दरें तय कर दी हैं जो 1 जुलाई से प्रभावी होंगी। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री 30 जून की मध्य रात्रि संसद के केन्द्रीय कक्ष में आयोजित एक कार्यक्रम में घंटा बजाकर देश में जीएसटी लागू किये जाने का ऐलान करेंगे।

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टेलीफोन बिल

टेलीफोन बिल 15 प्रतिशत की बजाय 18 प्रतिशत जीएसटी लागू होनेवाला है। इसलिए आपका टेलीफोन बिल बढ़नेवाला है। इसी तरह ब्यूटी पार्लर जाना भी महंगा पड़ेगा।

दोपहिया वाहन

टू-व्हीलर सस्ते तो होंगे, लेकिन बहुत ज्यादा नहीं क्योंकि अभी मोटरसाइकिल या स्कूटर पर वैट और एक्साइज ड्यूटी मिलाकर उसकी कुल लागत का 30 प्रतिशत पड़ता है जबकि जीएसटी की दर 28 प्रतिशत होगी।

चार मीटर की लंबाई तक की छोटी कारें

छोटी कारें अच्छी-खासी सस्ती होनेवाली हैं क्योंकि इन कारों पर 29 प्रतिशत जीएसटी लगना है जबकि अभी इन पर 40 प्रतिशत टैक्स लग रहा है। वहीं, लग्जरी कारों के दाम भी घटेंगे क्योंकि जीएसटी में ज्यादा-से-ज्यादा 43 प्रतिशत (28 प्रतिशत जीएसटी और 15 प्रतिशत सरचार्ज) टैक्स लगेगा जबकि अभी इन पर 46 प्रतिशत टैक्स देना पड़ रहा है।

फ्लाइट टिकट

हवाई जहाज में इकॉनमी क्लास के टिकट थोड़े सस्ते होंगे क्योंकि मौजूदा 5.60 प्रतिशत टैक्स की जगह जीएसटी में 5 प्रतिशत टैक्स लगेगा। लेकिन, बिजनस क्लास के टिकट महंगे होने जा रहे हैं क्योंकि अभी इन पर 8.40 प्रतिशत टैक्स लग रहा है जबकि जीएसटी में यह बढ़कर 12 प्रतिशत हो जाएगा।

स्मार्टफोन

अगर आप 30 जून के बाद मोबाइल खरीदते हैं तो आपको 1.5 प्रतिशत कम टैक्स देना होगा। यानी, 1 जुलाई से स्मार्टफोन सस्ते होनेवाले हैं।

कन्ज्यूमर ड्युरेबल्स

कन्ज्यूमर ड्युरेबल आइटम्स पर जीएसटी में कोई राहत नहीं मिलने वाली। अभी इन सामानों पर 25 से 26 प्रतिशत टैक्स लगता है जबकि जीएसटी में 2 प्रतिशत ज्यादा टैक्स देना होगा।

रेडिमेड कपड़े

1,000 रुपये से कम कीमत के कपड़ों पर टैक्स में कोई बदलाव नहीं होगा। इन पर मौजूदा 5 प्रतिशत की दर ही लागू रहेगी। लेकिन, कीमती पोशाक महंगे होंगे क्योंकि अभी इन पर 8 प्रतिशत टैक्स लगता है जबकि जीएसटी में 12 प्रतिशत टैक्स देना होगा।

प्रॉपर्टी

पजेशन के लिए तैयार प्रॉपर्टी पर अभी की तरह ही सिर्फ स्टांप ड्यूटी देना पड़ेगा, लेकिन अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी खरीदने पर 12 प्रतिशत जीएसटी देना होगा। अभी निर्माणाधीन मकानों पर 6 प्रतिशत सर्विस टैक्स और वैट लगते हैं।

कोचिंग क्लास

जीएसटी में कोचिंग क्लासेज महंगे हो जाएंगे क्योंकि अभी इन पर 15 प्रतिशत टैक्स लगता है जो जुलाई से बढ़कर 18 प्रतिशत होने जा रहा है।

सिनेमा, थिएटर, केबल और डीटीएच सर्विस

1 जुलाई से मनोरंजन के ये सारे साधन सस्ते होने जा रहे हैं क्योंकि इन पर अधिकतम 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा जो अभी राज्य सरकारों की ओर से लगाए जा रहे एंटरटेनमेंट टैक्स से कम ही होगा। मसलन, महाराष्ट्र में अभी 35 प्रतिशत मनोरंजन कर वसूला जा रहा है।

दवाइयां

जीएसटी में दवाइयों की कीमतें भी घटेंगी क्योंकि इन पर अभी 14 प्रतिशत टैक्स लग रहा है जो घटकर 12 प्रतिशत रह जाएगा।

बैंकिंग

बैंकिंग सर्विसेज महंगी होने जा रही हैं क्योंकि अभी इन पर 15 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है जबकि जीएसटी में 18 प्रतिशत टैक्स तय हुआ है। यानी, 1 जुलाई से डिमांड ड्राफ्ट, फंड ट्रांसफर जैसी सेवाएं महंगी पड़ेंगी। इसी तरह, टर्म पॉलिसीज, एंडोमेंट पॉलिसीज और यूलिप्स आदि के इंश्योरेंस प्रीमियम भी महंगे होंगे। परिषद ने हालांकि कुछ वस्तुओं पर जीएसटी दरें संशोधित की हैं और 30 जून को होने वाली परिषद की बैठक में भी कुछ वस्तुओं और सेवाओं की दरों में संशोधन की संभावना है।

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परिषद ने जीएसटी के लिए चार दरें – पांच प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत – तय की हैं। उच्चतम दर में शामिल अधिकांश वस्तुओं पर अधिभार लगाया गया है जबकि खाने की अधिकांश खुली वस्तुओं पर शून्य जीएसटी है। परिषद ने सेवाओं के लिए भी दरें तय कर दी हैं। कुछ सेवाओं के महंगे होने का असर भी वस्तुओं पर पड़ेगा। जिन वस्तुओं को शून्य जीएसटी में रखा गया है उनमें खुला आटा, चावल, मैदा, बेसन, गेहूं, दूध, दही, लस्सी, पनीर, अंडा, मीट, मछली, शहद, ताजे फल एवं सब्जियां, प्रसाद, नमक, पान के पत्ते, मिट्टी के बर्तन, खेती के उपकरण, गैर-ब्रांडेड ऑर्गेनिक खाद आदि शामिल हैं।