जाधव मामले में पाक को झटका


हेग : भारत ने सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) से मांग की कि भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव की मौत की सजा को पाकिस्तान रद्द करे और वह इस पर गौर करे कि उन्हें फांसी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि स्थिति गंभीर है और आशंका है कि अदालत का फैसला आने से पहले ही उन्हें फांसी पर लटकाया जा सकता है। उनके मामले की सुनवाई विएना संधि का उल्लंघन करते हुए हास्यास्पद तरीके से की गई है। पाक प्रतिनिधि ने कहा, आईसीजे को ये मामला जल्द सुनने की कोई जरूरत नहीं है। दलील दी गई कि ये अदालत कोई आपराधिक मामलों की अपीलीय अदालत नहीं है। पाकिस्तान के अपना पक्ष रखने के बाद आईसीजे ने कहा, दोनों पक्षों को सुना, प्रॉवीजनल कदमों के बारे में जल्द से जल्द फैसला दिया जाएगा लेकिन तारीख नहीं तय की। आईपीजे ने पाक को झटका दिया जब उसने जाधव के कबूलनामे वाले वीडियो को देखने से इंकार कर दिया। हेग में आईसीजे के अध्यक्ष रॉनी अब्राहम के समक्ष एक घंटे से अधिक समय तक चली जिरह के दौरान तथ्यों को सामने रखते हुए प्रख्यात वकील हरीश साल्वे ने कहा, मैं आईसीजे से आग्रह करता हूं कि वह सुनिश्चित करे कि जाधव को फांसी न दी जाए, पाकिस्तान इस अदालत को बताए कि (फांसी नहीं देने की) कार्रवाई की जा चुकी है और ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जो जाधव मामले में भारत के आधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता हो। पाकिस्तान ने अपना पक्ष रखते हुए भारत की दलीलों को खारिज करने के प्रयास किए। पाक सैन्य अदालत को भारत द्वारा कंगारू कोर्ट बताने पर पाकिस्तान ने कहा, ये तो बहुत अजीब बयान है। पाक प्रतिनिधि ने कहा, जाधव को राजनयिक संपर्क की सुविधा नहीं दी जाएगी। पाकिस्तान ने कहा कि भारत को कमांडर जाधव के कबूलनामे की प्रति दे दी गई है।  

आईसीजे ने पाकिस्तान की ओर से जाधव के कबूलनामे वाले वीडियो को अस्वीकार कर दिया। पाकिस्तान का तर्क था कि भारत के व्यवहार में पारदर्शिता नहीं है। पाक ने कहा, जाधव को ईरान नहीं वरन बलूचिस्तान से पकड़ा था। पाक ने ये भी कह दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले को लेकर वह अंतर्राष्ट्रीय अदालत के प्रति बाध्य नहीं है। पाक ने ये भी कहा कि वह जाधव को फांसी देने की जल्दी में नहीं है। पाक प्रतिनिधि ने कहा, जाधव पर जासूसी का आरोप था। अदालत में निष्पक्ष सुनवाई हुई। जाधव को अपील की सुविधा दी गई। इसी के साथ पाक ने कहा, भारत ने जाधव के पासपोर्ट के बारे में सही जानकारी नहीं दी। पाकिस्तान ने कहा कि जाधव भारतीय नागरिक है ही नहीं। उल्लेखनीय है कि आईसीजे ने भारत की एक याचिका पर पिछले सप्ताह जाधव की फांसी पर रोक लगा दी थी। पाकिस्तान के साथ किसी मुद्दे को लेकर भारत 46 वर्षों बाद अंतर्राष्ट्रीय अदालत पहुंचा है। एक साल पहले गिरफ्तार किए गए भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी को पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने पिछले महीने मौत की सजा सुनाई थी। भारत ने कहा है कि जाधव का अपहरण किया गया और उन पर बेबुनियाद आरोप लगाए गए। भारत ने जाधव को राजनयिक पहुंच प्रदान करने के लिए पाकिस्तान से 16 बार अनुरोध किया, लेकिन हर बार इस्लामाबाद ने इंकार कर दिया। भारत को यह तक पता नहीं है कि उन्हें पाकिस्तान में किस जेल में रखा गया है। साल्वे में जिरह में जाधव की गिरफ्तारी, उसके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने तथा मामले की सुनवाई से संबंधित तमाम कार्रवाई को विवेकशून्य तरीके से संयुक्त राष्ट्र के चार्टर तथा विएना संधि का उल्लंघन करार दिया और कहा कि मनगढ़ंत आरोपों के संदर्भ में उन्हें अपना बचाव करने के लिए कानूनी सहायता मुहैया नहीं कराई गई।

हेग में अंतर्राष्ट्रीय अदालत में भारतीय दल का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत ने इस अदालत का रुख किया, जिसने इस पर तत्काल संज्ञान लिया। साल्वे ने अदालत से कहा कि 16 मार्च, 2016 को ईरान में जाधव का अपहरण किया गया और फिर पाकिस्तान लाकर कथित तौर पर भारतीय जासूस के तौर पर पेश किया गया और सैन्य हिरासत में एक दंडाधिकारी के समक्ष उनसे कबूलनामा लिया गया। उन्हें किसी से संपर्क नहीं करने दिया गया और सुनवाई भी एकतफा की गई। उन्होंने आईसीजे के अध्यक्ष से आग्रह किया कि वह सैन्य अदालत की विवेकशून्य परिस्थितियों पर ध्यान दें। साल्वे ने कहा कि विएना संधि के प्रावधानों के मुताबिक, प्रत्येक कैदी के पास अधिकार है कि उसकी सुनवाई स्वतंत्र अदालत में हो, जिसे कानून के माध्यम से स्थापित किया गया हो और उस पर मुकदमा उसकी मौजूदगी में चलना चाहिए तथा आरोपी को अपना बचाव करने के लिए कानूनी सहायता दी जानी चाहिए। जाधव के मामले में मानवाधिकार के समस्त प्रावधानों की धज्जियां उड़ाई गईं। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा पेश किए गए तथ्यों ने सुनवाई की प्रकृति के आधार पर यह स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र तथा विएना संधि के समस्त सिद्धांतों का उल्लंघन किया गया। साल्वे ने कहा कि जर्मनी बनाम अमेरिका के मामले में अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि जर्मनी के एक नागरिक को सुनाई गई मौत की सजा ‘न्याय की अपूरणीय क्षति’ है। उन्होंने अमेरिका बनाम मेक्सिको के एक मामले का भी संदर्भ दिया, जिसमें मौत की सजा पाए मेक्सिको के 54 लोगों की जिंदगी दांव पर लग गई थी।

अदालत द्वारा पाकिस्तान की जिरह सुनने के लिए तीन घंटे के अंतराल की घोषणा करने के बाद साल्वे ने अदालत से बाहर संवाददाताओं से कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारत को न्याय मिलेगा। भारतीय अधिकारी दीपक मित्तल ने बहस की शुरुआत करते हुए अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय से कहा, जाधव को न तो अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करने का मौका दिया गया और न ही उन्हें राजनयिक संपर्क मुहैया कराया गया। आशंका है कि इस मामले में आईसीजे का फैसला आने से पहले ही उनकी मौत की सजा पर अमल किया जा सकता है। मित्तल ने कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे आईसीजे के अध्यक्ष रॉनी अब्राहम के समक्ष कहा कि भारत ने पाकिस्तान से जाधव तक राजनयिक संपर्क प्रदान करने के लिए कई बार आग्रह किया, लेकिन इस्लामाबाद ने हर बार इंकार किया। मित्तल ने अदालत से कहा, भारत को प्रेस रिपोर्ट से जानकारी मिली कि जाधव को मौत की सजा एक कथित कबूलनामे के आधार पर दी गई है। भारत के कई बार आग्रह करने के बावजूद पाकिस्तान ने मामले का आरोप-पत्र तथा मामले से संबंधित किसी भी प्रकार के दस्तावेज मुहैया नहीं कराए। उन्होंने कहा, यह स्पष्ट है कि जाधव को उनके कानूनी अधिकार से वंचित किया गया। जाधव के माता-पिता ने पाकिस्तान जाने के लिए वीजा आवेदन दिया, लेकिन उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई। विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव तथा सह-एजेंट वी.डी. शर्मा ने कहा कि मार्च 2016 में जाधव की गिरफ्तारी के बाद उसे राजनयिक संपर्क प्रदान करने से इंकार करके पाकिस्तान अपने सभी कानूनी उत्तरदायित्वों का पालन करने में नाकाम रहा। शर्मा ने अदालत से यह भी मांग की है कि वह सैन्य अदालत द्वारा जाधव को दी गई मौत की सजा पर अमल करने से पाकिस्तान को रोके तथा उसके फैसले को अवैध करार देने का निर्देश दे।

-एजैंसियां

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