शुरू में दिक्कतें, बाद में सुधार : जेटली


वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी)लागू करने को लेकर हो रहे विरोध के बीच वित्त मंत्री अरुण जेतली ने कहा कि कुछ नया करने पर शुरू में दिक्कतें आती हैं, लेकिन उसमें सुधार कर लिया जाता है। जीएसटी लागू होने से चंद घंटे पहले यहां एक टेलीविजन चैनल के सम्मेलन में श्री जेतली ने कहा कि पिछले 70 साल में किसी विधेयक पर इतनी बहस नहीं हुई है जितनी जीएसटी पर हुई है।

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इसके लागू होने को बड़ा मौका बताते हुए उन्होंने कहा कि बड़े कदमों से ही देश की तकदीर बदलती है। इसे लागू करने में कई नेताओं की अहम भूमिका रही है। कई राज्यों के मंत्रियों ने इसे पास कराने में काफी मदद की है। इस पर सबकी सहमति के लिये सरकार ने कई बैठकें कीं। कई बैठकें तो दो-तीन दिन तक चली। श्री जेतली ने कहा कि जीएसटी पर सब कुछ केन्द्र ने तय नहीं किया है। केन्द्र सरकार के साथ 31 राज्य सरकारों ने कई दौर की बैठकों के बाद इस पर आम सहमति बनाई है। उन्होंने कहा सभी विपक्षी दलों ने हर मौके पर इस पर साथ दिया है।

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उन्हें जीएसटी के जश्न में शामिल होना चाहिये। वित्त मंत्री ने कहा, ”कुछ नया करने पर शुरू में दिक्कतें आती हैं, लेकिन उसमें सुधार कर लिया जाता है। हमारे देश की कई विशेषताएं हैं। जब नोटबंदी लागू की गई थी तो लोगों ने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद गिर जायेगा किन्तु ऐसा कुछ नहीं हुआ । नोटबंदी के शुरूआती कुछ दिनों में दिक्कत हुई थी। उन्होंने कहा जिन देशों में जीएसटी सफल नहीं हुआ वहां कुछ अलग परिस्थितियां थीं। हमारे देश में उन देशों से अलग व्यवस्था है।

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जो लोग आलोचना करते हैं उन्हें यह समझना चाहिये कि पिछले 70 साल से हमारी सरकारें उधार लेकर काम चला रही हैं। वित्त मंत्री ने कहा यदि हर कोई कर देना शुरू कर दे तो उधार की नौबत नहीं आएगी। देश को चलाने के लिये कर प्रणाली को बेहतर करना जरूरी है। देश की आबादी 130 करोड़ है किन्तु पांच लाख से अधिक आय वाले केवल 71 लाख लोग हैं। इसमें से भी 61 लाख वेतनभोगी हैं। बाकी लोगों में सभी टैक्स नहीं देते। अप्रत्यक्ष कर की जहां तक बात है केवल 80 लाख लोग ही इसकी अदायगी करते हैं।

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उम्मीद है कि जीएसटी लागू होने पर कर देने वालों की संख्या बढ़ेगी। जीएसटी को लेकर लोगों में घबराहट की जिक्र करते हुए श्री जेटली ने कहा हम एक नई व्यवस्था में आ रहे हैं। इसकी वजह से लोगों में घबराहट है। व्यापारियों की दिक्कतों पर उन्होंने कहा कि जीएसटी के तहत सभी रिटर्न सॉफ्टवेयर से भरे जायेंगे। इससे उनको कोई दिक्कत नहीं होगी। देश का एक बड़ा व्यापारी वर्ग नई कर व्यवस्था के पक्ष में है।

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