अंतरिक्ष में भारत की नई उड़ान


अंतरिक्ष के श्रेत्र में अपनी धाक जमाने वाला भारत आज एक बार फिर अपनी जीत के झंडे गाड़ने जा रहा है | भारत ने आज श्रीहरिकोटा से इसरो के सबसे ताकतवर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल GSLV मार्क 3 डी-1 ने सोमवार को उड़ान भरी । जिसका वजन 200 हाथियों के बराबर माना जा रहा है। इसे आंध्र प्रदेश के सतीश धवन स्पेस सेंटर से छोड़ा गया। ये अपने साथ एक हाथी के बराबर वजनी देश के सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट GSAT-19 को लेकर गया है। इससे आने वाले कुछ सालों में भारत में हाई स्पीड इंटरनेट की शुरुआत होगी। इस ऐतिहासिक मौके पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के वैज्ञानिको को बधाई दी |

GSAT-19 देश में तैयार 200 हाथी के बराबर वजनी सैटेलाइट है। यह हीट पाइप, फाइबर ऑप्टिक जायरो, माइक्रो-मेकैनिकल सिस्टम्स एक्सीलेरोमीटर, केयू-बैंड टीटीसी ट्रांसपोंडर और लीथियम आयन बैटरी से लैस है। इसमें मॉडर्न प्लेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। इस पर करीब 300 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।

GSLV इसरो का सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल है। जिसका जीओसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च वाहन मार्क्स II (जीएसएलवी एमके II) भारत द्वारा विकसित सबसे बड़ा प्रक्षेपण केंद्र है, जो वर्तमान में ऑपरेशन में है। यह चौथी पीढ़ी के प्रक्षेपण वाहन एक तीन चरण वाहन है जिसमें चार तरल पट्टा-ओन्स हैं। स्वदेशी तौर पर विकसित क्रायोजेनिक अपर स्टेज (सीयूएस), जो उड़ान साबित होता है, जीएसएलवी एमके द्वितीय के तीसरे चरण का निर्माण करता है। इस रॉकेट को इसरो ने डेवलप किया है। इसके जरिए 2001 से अब तक 11 बार सैटेलाइट स्पेस में भेजे जा चुके हैं। आखिरी उड़ान 5 मई, 2017 को भरी थी, तब यह जीसैट-9 को अपने साथ लेकर रवाना हुआ था। साथ ही वैज्ञानिको का यह भी कहना है की अगर यह परिक्षण सफल हुआ तो इसरो भी अपने यह से अंतरिक्ष पर वैज्ञानिक भेज सकेगा साथ ही अन्य देशो के सैटलैइट को लांच कर इसरो भारी मात्रा में विदेशी धन भी अर्जित कर सकेगा

log in

reset password

Back to
log in
Choose A Format
Poll
Voting to make decisions or determine opinions
Story
Formatted Text with Embeds and Visuals
List
The Classic Internet Listicles
Video
Youtube, Vimeo or Vine Embeds
Thanks for loving our story. Like our Facebook page to get more stories.

Send this to a friend