सरकारी निर्माण ठप्प करने का ऐलान


रायपुर: छत्तीसगढ़ में शासकीय निर्माण करने वाले कांट्रेक्टरों ने वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) के भारी स्लैब के विरोध समेत अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर कल से सभी निर्माणाधीन सरकारी कार्यों को बन्द करने का ऐलान किया है। छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स एसोसियेशन के अध्यक्ष बीरेश शुक्ला ने आज यहां प्रेस कान्फ्रेंस में कहा कि एक जुलाई को जीएसटी लागू हुआ है इस कारण इससे पूर्व के अनुबंधों पर 18 प्रतिशत का अधिभार राज्य सरकार द्वारा स्वयं वहन करने की वह राज्य सरकार से कर रहे है और इस बारे में मंत्री, मुख्य सचिव एवं सम्बधित प्रमुख सचिवों को पत्र लिख चुके है पर सरकार की ओर से कोई जवाब नही आया है।

उन्होंने कहा कि कल से निर्माण ठप्प कर दिया जायेगा और सरकार द्वारा मांगों पर विचार नही करने पर आन्दोलन को तेज किया जायेगा। उन्होंने कहा कि राज्य में इस समय लगभग 10 हजार करोड़ के सरकारी निर्माण कार्य चल रहे हैं, अगर सरकार ने अधिभार को वहन नहीं किया तो 1800 करोड़ का अधिभार ठेकेदारों पर पड़ेगा औ वह बर्बाद हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि जो कार्य एक जुलाई से पहले से चल रहे है उनके अधिभार को राज्य सरकार, केन्द्र सरकार या फिर सम्बधित विभाग वहन करे।

जीएसटी लागू करने से पूर्व की चर्चाओं में निर्माण कांट्रेक्टरों से सरकार द्वारा कोई चर्चा नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि एक जुलाई से पूर्व कांट्रेक्टरों को महज दो प्रतिशत वाणिज्यिक कर देना पड़ता था जबकि इसे जीएसटी में सीधे 18 प्रतिशत स्लैब में शामिल कर दिया गया है। यह सीधा अन्याय है। इस पर राज्य एवं केन्द्र सरकार को विचार जीएसटी कौंसिल में इसे पांच प्रतिशत स्लैब में शामिल करने की अनुशंसा करनी चाहिए।

श्री शुक्ला ने राज्य सरकार के विभिन्न निर्माण विभागों में विविदाओं में असंतुलित दर आने पर अतिरिक्त सुरक्षा निधि (एपीएस) के प्रावधान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसकी वजह से अधिकारी पक्षपात कर रहे हैं और इस वजह से कुछ पसंदीदा ठेकेदारों को काम देते है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास काम छोडऩे वाले ठेकेदारों के किलाफ कार्रवाई के पहले से ही कड़े प्रावधान है तो फिर एपीएस का क्या औचित्य है।

उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद निर्माण सामग्री की दरों में कमी होने के सरकार द्वारा किए गए पूर्वानुमान गलत साबित हुए है,और उल्टे इनकी कीमतों में भारी इजाफा हुआ है। उन्होने दावा किया जीएसटी के बाद निर्माण सामग्री की कीमतों में 20 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि गिट्टी, रेत आदि की रायल्टी में सरकार द्वारा ढ़ाई गुना की वृद्धि कर दी गई है, जबकि रेत, मुरूम एवं मिट्टी की लीज दी नही गई है तो ठेकेदारों द्वारा रायल्टी चुकता प्रमाण पत्र कहां से दिया जायेगा।

श्री शुक्ला ने अलग अलग सरकारी विभागों की निविदाओं के अलग-अलग होने पर भी सवाल उठाया और कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री हर क्षेत्र में एकल खिड़की की बात कर रहे है वहीं राज्य में अलग-अलग विभाग अलग-अलग प्रकार से निविदा अवेदन का प्रारूप बना रखा है। इसके पीछे चहेतों को उपकृत करने का भी प्रयास होता है। उन्होंने सभी सरकारी विभागों के निविदा प्रपणों में एकरूपता लाने की भी मांग की।

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