आतंकियों के रासायनिक हमलों से शहर बना ‘जिन्दा कब्रगाह’


इस्लामिक स्टेट ऑफ़ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) ने रविवार को इराकी सैनिकों के खिलाफ अपना दूसरा रासायनिक हथियारों का हमला शुरू किया, जिसमें मोसुल के अंतिम गढ़ से जिहादियों को निकालने के लिए करी जा रही आक्रामक कार्रवाई को रोकना पड़ा और घायल सैनिको को अस्पताल पहुँचाया गया।

आईएसआईएस के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन के इराकी प्रवक्ता, ब्रिगेडियर जनरल याहया रसूल, ने बताया आईएसआईएस के प्रति वफादार आतंकवादियों द्वारा दागी जाने वाले किसी भी प्रकार के गैस के संपर्क में आने के बाद जो भी सैनिक घायल हुए है उनका रविवार को इसी क्षेत्र के क्लिनिक में इलाज किया जा रहा है ।

हालांकि इस्तेमाल किए गए जहर की अभी भी जांच की जा रही थी, लेकिन पुष्टि हुई है। शनिवार को भी हमले में आईएसआईएस के आतंकियों ने इराकियों के सैन्य ठिकानों पर क्लोरीन के राकेट का इस्तेमाल किया था जिसमे सात सैनिक घायल हो गए थे ।

एक खबर के अनुसार अब सीरिया में आईएसआईएस मसूल शहर के कुछ हिस्सों में सिमट कर रह गया है , और वह पर भी सेना द्वारा जेहादियों पर कड़े हमले किये जा रहे है। ऐसे हालात में आतंकी अब रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल कर विनाश लीला को आगे बाधा रहे है।

एक रिपोर्ट के अनुसार माना गया है आतंकियों के पास रासायनिक हथियारों का बड़ा जखीरा है जिसका इस्तेमाल उन्होंने अब करना शुरू कर दिया है। इस हमले की वजह से रिहायशी लोगो की परेशानी इस कदर बढ़ गयी है की वो घुट-घुटकर अपना दम तोड़ने लगे है ।

इन हमलों की वजह से मोसुल शहर एक जिन्दा कब्रगाह बनने को मजबूर है। ताज़ा हमलों के बाद वह के स्थानीय निवासियों में दहशत का माहौल है।

साथ ही कई नागरिक इस हमले की चपेट में आये है जिनमे से कुछ की मौत हो गयी और बाकियों का इलाज चल रहा है। आतंकियों ने सन्देश दिया है अब इस तरह के हमले और तेज़ होंगे ओर शायद आगे और ज्यादा नागरिक इन हमलों का शिकार होंगे।

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