चीन की खतरनाक चाल : चीन PAK में बना रहा है सैन्य अड्डा


बीजिंग : विश्व में अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए इन दिनों चीन जहां एक ओर स्वयं को आर्थिक शक्ति के रूप में पेश कर रहा है वहीं दूसरी ओर एशिया में अपना सैन्य दखल भी बढ़ाता जा रहा है। चीन इन दिनों विश्व की सबसे बड़ी शक्ति बनने की दिशा में कार्य कर रहा है और अपने इस सपने को पूरा करने के लिए भारत और अमेरिका को सबसे बड़ा रोड़ा मानता है।

जी हाँ , पाकिस्तान से चीन तक Economic corridor (CPEC) के बाद अब चीन पाक में अपना एक सैनिक अड्डा बनाने की योजना पर काम कर रहा है।  यह दावा अमेरिकी रक्षा विभाग ने किया है। पेंटागन ने हाल ही में 97 पन्नों की एक रिपोर्ट अमेरिकी संसद को सौंपी है जिसमें बताया गया है कि चीन हिन्द महासागर, भूमध्य सागर और अटलांटिक महासागर तक अपनी सैनिक पहुंच बनाने के इरादे से पाक में सैन्य अड्डा स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है।

रिपोर्ट के बताया गया है कि चीन विदेशों में ज्यादा से ज्यादा अपना सैनिक अड्डा बनाने की कोशिशों में जुटा है। इसके तहत चीन उन देशों में सैन्य अड्डा बनाने की कोशिशों में जुटा है जिनसे उनके रिश्ते अच्छे हैं।  अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार यदि चीन, पाकिस्तान में सैन्य अड्डा बनाता है तो फिर इससे भारत की मुश्किलें ज्यादा बढ़ जाएंगी। इसके पहले वो अफ्रीकी देश जिबूती में भी यही कर चुका है।

गौरतलब है कि चीन बलूचिस्तान में सामरिक रूप से स्थित ग्वादर बंदरगाह का विकास कर रहा है और कई अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ने यह कदम वहां अपनी सैन्य मौजूदगी रखने के उद्देश्य से उठाया है।

लेकिन एशिया में चीन को भारत से सर्वाधिक चुनौती मिलती रही है जिसके कारण दोनों देशों के बीच सीमा और क्षेत्र विवाद को लेकर भी तनातनी बनी रहती है। लेकिन अब चीन ने ऐसी खतरनाक चाल चली है कि इसे भारत के लिए एक गंभीर खतरा माना जा रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो चीन ने इस कदम से भारत की सामरिक शक्ति को चुनौती दी है।

गौरतलब है कि चीन अफ्रीकी देश जिबूती में पहले ही अपना एक सैन्य ठिकाना बना चुका है। पेंटागन ने इस संबंध में अमेरिकी कांग्रेस में 97 पेज की रिपोर्ट पेश की है। इसमें कहा गया कि 2016 में चीनी सेना का बजट 180 अरब डॉलर के पार जा चुका है। जबकि चीन का अनुशंसित बजट 140 अरब डॉलर है।

दरअसल, चीन एक खास तरह की नीति पर काम कर रहा है। इसे स्टिंग ऑफ पल्र्स (मोतियों की माला) पॉलिसी कहते हैं। पाकिस्तान का ग्वादर, मालदीव का मारो, श्रीलंका का हम्बनटोटा, बंगलादेश का चटगांव, म्यांमार का सित्तबय और थाईलैंड के क्रॉनहर पोर्ट का विस्तार उसकी इसी योजना का हिस्सा है।

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