सुरक्षा परिषद का शिष्टमंडल करेगा फगानिस्तान का दौरा


अफगानिस्तान के प्रति समर्थन दर्शाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का एक शिष्टमंडल इस युद्धग्रस्त देश का दौरा करेगा। परिषद के अध्यक्ष कैरोव उमारोव ने यह जानकारी दी। उमारोव ने गुरुवार को संवाददाताओं से कहा कि अफगानिस्तान जाने वाले परिषद के दल के इस दौरे का आयोजन और नेतृत्व कजाकिस्तान करेगा। सात सालों में यह परिषद का पहला अफगानिस्तान दौरा होगा।

उन्होंने कहा, ‘हमें लगता है कि अफगानिस्तान के मसले में सुरक्षा परिषद के सदस्यों को जमीनी हकीकत का पता होना जरूरी है।’ कजाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि उमारोव ने कहा कि इस दौरे की तारीख और अन्य विवरणों को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है, हालांकि उनका देश तब से इस पर काम कर रहा है, जब से उन्होंने अध्यक्ष पद संभाला है।

 परिषद के सभी 15 सदस्य देश शिष्टमंडलों में शामिल होते हैं, जिससे उन्हें किसी भी देश या क्षेत्र के बारे में जमीनी जानकारी मिलती है। उमारोव ने इससे पहले कहा था कि 19 जनवरी को कजाकिस्तान के विदेश मंत्री कैरात अब्द्राखमानोव परिषद की एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे।

अफगानिस्तान के विदेश मंत्री सलाहुद्दीन रब्बानी और अन्य देशों के मंत्रियों के भी इस बैठक में शामिल होने की संभावना है। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एच.आर. मैकमास्टर के साथ परिषद के सदस्यों की मंगलवार को हुई एक बैठक के बारे में पूछे जाने पर उमारोव ने कहा कि बैठक में अधिकारी ने अफगानिस्तान मुद्दे पर अमेरिका की रणनीति स्पष्ट की थी। उन्होंने कहा कि अमेरिका की रणनीति कजाकिस्तान के रुख के समान है और परिषद के अन्य सदस्य भी इस रणनीति से सहमत हैं। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की समस्याओं को सुलझाने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण जरूरी है।

उन्होंने साथ ही कहा कि अन्य देशों को भी इस समस्या का समाधान खोजने में मदद करनी चाहिए। उमारोव ने कहा कि अफगानिस्तान का क्षेत्र के अन्य देशों से संपर्क होना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि इन देशों को ऐसा अहसास कराना होगा कि वे अफगानिस्तान को किसी खतरे के रूप में नहीं बल्कि एक सहयोगी के रूप में देखें। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 2001 के बाद से अफगानिस्तान में चार शिष्टमंडल भेज चुकी है।

देश और दुनिया का हाल जानने के लिए जुड़े रहे पंजाब केसरी के साथ।