BREAKING NEWS

देश में अब तक कोविड रोधी टीके की 161.81 करोड़ से ज्यादा खुराक दी गई : सरकार ◾भगवंत मान ने सीएम चन्नी को दी चुनौती, कहा- अगर हिम्मत है तो धुरी सीट से मेरे खिलाफ चुनाव लड़ लें◾कनाडा की सीमा पर चार भारतीयों की मौत पर PM ट्रूडो बोले- बेहद दुखद मामला, सख्त कार्रवाई करूंगा◾EC ने रैली-रोड शो पर लगी पाबंदी को 31 जनवरी तक बढ़ाया, दूसरे तरीकों से प्रचार करने पर दी गई ढील ◾गृहमंत्री शाह ने कैराना में मांगे घर-घर BJP के लिए वोट, पलायन कराने वालों पर साधा निशाना ◾ चन्नी और सिद्धू दोनों पंजाब के लिए निकम्मे हैं, कांग्रेस के अंदर की लड़ाई ही उनको चुनाव में सबक सिखाएगीः कैप्टन◾निर्वाचन आयोग : चुनाव वाले राज्यों के शीर्ष अधिकारियों से करेगा मुलाकात, कोविड की स्तिथि का लेंगे जायजा ◾ दिग्विजय सिंह के खिलाफ भोपाल पुलिस ने दर्ज की FIR , पूर्व सीएम बोले- हमने कोई अपराध नहीं किया◾पंजाब में नफरत का माहौल पैदा कर रही है कांग्रेस, गजेंद्र सिंह शेखावत ने EC से किया कार्रवाई का आग्रह◾बाबू सिंह कुशवाहा की पार्टी के साथ गठबंधन करेंगे ओवैसी, UP की सत्ता में आने के बाद बनाएंगे 2 CM◾ पिता मुलायम सिंह यादव की कर्मभूमि से लड़ेंगे अखिलेश चुनाव, सपा का आधिकारिक ऐलान◾जम्मू-कश्मीर : शोपियां जिले में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ शुरू, सेना ने रास्ते को किया सील ◾यदि BJP पणजी से किसी अच्छे उम्मीदवार को खड़ा करती है, तो चुनाव नहीं लड़ूंगा: उत्पल पर्रिकर ◾गोवा में BJP के लिए सिरदर्द बनेगा नेताओं का दर्द-ए-टिकट! अब पूर्व CM पार्सेकर छोड़ेंगे पार्टी◾ BSP ने जारी की दूसरे चरण के मतदान क्षेत्रों वाले 51 प्रत्याशियों की सूची, इन नामों पर लगी मोहर◾DM के साथ बैठक में बोले PM मोदी-आजादी के 75 साल बाद भी पीछे रह गए कई जिले◾पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा हुए कोरोना से संक्रमित, ट्वीट कर दी जानकारी ◾यूपी : गृहमंत्री शाह कैराना में करेंगे चुनाव प्रचार, काफी सुर्खियों में था यहां पलायन का मुद्दा ◾उत्तराखंड : टिकट नहीं मिलने से नाराज BJP नेताओं में असंतोष, पार्टी की एकजुटता तोड़ने की दी धमकी ◾मुंबई की 20 मंजिला इमारत में लगी भीषण आग, 7 की मौत, 15 लोग घायल ◾

जातीय जनगणना पर BJP और JDU आमने-सामने, विपक्ष के साथ नीतीश, नए सियासी समीकरण की तलाश

जातीय जनगणना को लेकर बिहार में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के दो बडे दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (युनाइटेड) अब सीधे तौर पर आमने-सामने नजर आने लगे हैं। केंद्र की भाजपा नीत राजग सरकार जहां जाति आधारित जनगणना कराने से इंकार कर रही है वहीं जदयू के नेता नीतीश कुमार इस मामले को लेकर विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ मुखर हैं।

ऐसे में कयास लगाया जाने लगा है कि क्या फिर से बिहार की सियासी समीकण बदलेंगे। हालांकि इस मुद्दे को लेकर कोई भी नेता अब तक खुलकर बात नहीं कर रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिल्ली में रविवार को स्पष्ट कर चुके हैं कि जाति जनगणना देश के लिए जरूरी है। उन्होंने दिल्ली में कहा कि केंद्र सरकार को जातिगत जनगणना करानी चाहिए। इसके कई फायदे हैं।

उन्होंने कहा कि आजादी के पहले जनगणना हुई थी, आजादी के बाद नहीं हुई। जातीय जनगणना होगी तभी लोगों के बारे में सही जानकारी होगी। तब पता चलेगा कि जो पीछे है, उसे आगे कैसे किया जाए। जातीय के साथ उपजातीय जनगणना भी कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इसको लेकर एक बार फिर राज्य में सभी दलों के साथ बैठक कर आगे का निर्णय लेंगे।

नीतीश के इस बयान के बाद तय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जातिगत जनगणना के मामले में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इधर, भाजपा के नेता इसमें व्यवहारिक दिक्कत बता रहे हैं। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुशील कुमार मोदी कहते हैं कि तकनीकी और व्यवहारिक तौर पर केंद्र सरकार के लिए जातीय जनगणना कराना संभव नहीं है। इस बाबत केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार अगर चाहे तो वे जातीय जनगणना कराने के लिए स्वतंत्र है।

सुशील कुमार मोदी ने कहा, "1931 की जातीय जनगणना में 4147 जातियां पाई गई थीं, केंद्र व राज्यों के पिछड़े वर्गों की सूची मिला कर मात्र 5629 जातियां है जबकि 2011 में कराई गई सामाजिक-आर्थिक गणना में जातियों की संख्या बढ़ कर 46 लाख के करीब हो गई। लोगों ने इसमें अपना गोत्र, जाति, उपजाति, उपनाम आदि दर्ज करा दिया। इसलिए जातियों का शुद्ध आंकड़ा प्राप्त करना सम्भव नहीं हो पाया।"

सुशील कुमार मोदी ने स्पष्ट करते हुए कहा कि जातीय जनगणना का मामला केवल एक कॉलम जोड़ने का नहीं है। इस बार इलेक्ट्रॉनिक टैब के जरिए गणना होनी है। गणना की प्रक्रिया अमूमन 4 साल पहले शुरू हो जाती है जिनमें पूछे जाने वाले प्रश्न,उनका 16 भाषाओं में अनुवाद, टाइम टेबल व मैन्युअल आदि का काम पूरा किया जा चुका है। अंतिम समय में इसमें किसी प्रकार का बदलाव संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार ने तो 2015 में जातीय जनगणना कराई थी, मगर आज तक उसके आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए जा सके हैं। ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हालांकि यह भी कह रहे हैं कि केंद्र सरकार को इस निर्णय पर फिर से विचार करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तय है कि मुख्यमंत्री फिलहाल इस मुद्दे को लेकर कोई बड़ा निर्णय भले ही नहीं लें, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि इस मुद्दे को लेकर नीतीश पीछे नहीं हटेंगे।

कहा यह भी जा रहा है कि नीतीश केंद्र सरकार को कुछ समय देकर उस सही समय का इंतजार करेंगे, जब तक वे नए सियासी समीकरण नहीं बना लेते। बहरहाल, अब देखने वाली बात होगी कि जातीय समीकरण को लेकर राजग के घटक दल आगे कैसी रणनीति बनाते हैं।

PM मोदी ने की आयुष्मान भारत-डिजिटल मिशन की शुरुआत, कहा- गरीबों की दिक्कतें होंगी दूर