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बिहार

सरकार जल संरक्षण की लघु एवं दीर्घकालीन नीति पर कर रही है काम

बिहार के शहरी विकास एवं आवास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा ने आज कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण राज्य में जल संकट एवं भूमिगत-जल स्तर के नीचे चले जाने से उत्पन्न स्थिति को ध्यान में रखते हुये सरकार जल संरक्षण के लिए लघु एवं दीर्घकालीन नीति पर काफी गंभीरता से काम कर रही है। 

श्री शर्मा ने विधानसभा में शहरी विकास एवं आवास विभाग की वित्त वर्ष 2019-20 की बजट मांग पर हुई चर्चा का जवाब देते हुये कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण राज्य में भूमिगल-जल स्तर के नीचे चले जाने से जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसके मद्देनजर सरकार जल संरक्षण के लिए लघु एवं दीर्घकालीन नीति तैयार की है।

 उन्होंने बताया कि लघु नीति के तहत सरकार ने सभी नगर निकायों में प्रत्येक दो वार्ड पर एक स्टेनलेस स्टील वाटर टैंकर खरीदने का निर्देश दिया है। वहीं, नगर निकायों के प्रत्येक वार्ड में अधिकतम दो सबमर्सिबल पंप लगाने के लिए विभाग ने स्वीकृत मॉडल प्राक्कलन एवं मार्गदर्शिका जारी की है। वैसे नगर निकायों में ही यह कार्य किये जा सकेंगे, जहां निश्चय योजना के तहत हर घर नल का जल योजना का कार्य पूरा नहीं हो पाया है। 

मंत्री ने बताया कि जल संरक्षण की दीर्घकालीन नीति के तहत राज्य के सभी नगर निकाय के तालाबों और पोखरों की उड़ही एवं वृक्षारोपण कार्य योजना का प्रस्ताव उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने बताया कि भूजल को रिचार्ज करने के लिए जल ह्मोतों के आसपास सोख्ता का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ये सोख्ता पार्क, खेल के मैदान एवं अन्य सामुदायिक स्थल पर बनाये जाएंगे।

श्री शर्मा ने बताया कि राज्य के सभी भवनों में वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित करने को अनिवार्य कर दिया गया है और इसके लिए बिहार भवन बायलॉज में आवश्यक बदलाव भी किये गये हैं। साथ ही सभी सरकारी भवनों में वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि इस निर्णय को लागू करने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि वर्षा जल का संचयन करने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। यह एक आसान तकनीक है, जिसे अपनाने से लोगों को लाभ होगा। 

मंत्री ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में लोगों को पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री शहरी पेयजल निश्चय योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत 250, 500, 1000 और 1500 परिवारों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कई मॉडल तैयार किये गये हैं और इन मॉडलों को विभाग की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्र में रहने वाले परिवारों को नियमित रूप से पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ओवरहेड वाटर टैंक का भी प्रावधान किया गया है। 

मंत्री के जवाब से अंसतुष्ट होकर विपक्षी दल के सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गये। इसके बाद विपक्षी सदस्यों की अनुपस्थिति में शहरी विकास एवं आवास विभाग की वित्त वर्ष 2019-20 की 51 अरब 58 करोड़ 78 लाख 99 हजार रुपये की बजट मांग को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।