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मसान नदी डैम परियोजना पर पुनर्विचार करें सरकार: मंजुबाला पाठक

पटना: पश्चिमी चंपारण के रामनगर प्रखंड अंतर्गत मसान नदी की भयावहता सर्वविदित है। लगभग लाखों एकड़ कृषि योग्य भूमि नदी ने बरबाद कर दिया। चूंकि यह नदी पहाड़ी स्थानों से निकलती है तो इस नदी के पानी में वेग बहुत होता है फलस्वरूप कटाव भी बहुत तेजी से होता है। दर्जनों गांव इसके चपेट में रहते है तथा लाखों जनसंख्या इससे प्रभावित होती है।

दूसरा पहलू देखा जाए तो इसके पानी के वेग से बिजली पैदा की जा सकती है।हालांकि कुछ जगहों पे इससे हल्की बिजली पैदा की जाती है,परन्तु इसको व्यापक स्तर पर परियोजना लाकर सरकार को चाहिए कि इसके जल का उचित मात्रा में दोहन किया जा सकें। जिससे स्थानिय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

मसान डैम जो सरकार की बहुप्रतक्षित योजना थी, अरबों रुपया खर्च करके कई मशीनों को सरकार द्वारा खरीददारी करके और करोड़ों रुपए का भवन बना के परियोजना को रोक दी गई। मेरा मानना है कि सिंगल विंडो सिस्टम के तहत सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए और काम करनेवाली एजेंसियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर इस परियोजना को पुनः शुरू करवाने का प्रयास करना चाहिए।

इसके जल का भंडारण करने और छोटे-छोटे नहरों का निर्माण करा कर उस जल का कृषि क्षेत्र में समुचित उपयोग करवाने का प्रयत्न करना चाहिए। पर्यावरण मंत्रालय से भी समन्वय स्थापित कर मसान डैम के किनारे लाखों पेड़ लगाने का सरकार को प्रयत्न करनी चाहिए। मैं मंजुबला पाठक भारत सरकार और बिहार सरकार से ये मांग करती हूं कि दशकों से ठंडे बस्ते में पड़े अरबों रुपए की मसान डैम परियोजना को पुनः चालू किया जाए और लाखों जनसंख्या जो इससे प्रभावित है उसे बचाया जाए।