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युवाओं को शिक्षित ही नहीं स्वाबलंबी बनाने की क़वायद में नीतीश सरकार

पटना : युवा इस देश के भविष्य हैं और इनकी बड़ी आबादी हमारे भारत को एक युवा देश बनाता है। एक अध्ययन के मुताबिक देश में अभी पैंतालिस साल तक के उम्र के लोगों की संख्या साठ प्रतिशत के करीब है । यूएन की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक 2018 तक भारत की कुल जनसंख्या एक अरब पैंतीस करोड़ (1.35 billion) से भी ज्यादा हो गयी है। यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक 2001 से 2011 के बीच यानी दस सालों में देश की जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार 17.7 प्रतिशत रही।

फिलहाल भारत की आबादी प्रतिवर्ष 1.11 प्रतिशत के रफ्तार से बढ़ रही है। बिहार में भी आबादी की रफ्तार तेज़ है और यहां बड़ी संख्या में युवा प्रदेश की तरक्की और खुशहाली में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। तमाम राजनीतिक दलों की निगाहें युवाओं की तरफ हैं क्योंकि ये ऐसा तबका है जो नफे-नुकसान की कसौटी पर ही अपने फैसले लेता रहा है। बिहार में जदयू ने युवाओं को फोकस में रखा है और सरकार की नीतियों, उनके कार्यक्रमों में ये परिलक्षित भी होता रहता है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जदयू के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर को इन्हीं युवाओं की जिम्मेदारी दी है। प्रशांत किशोर लगातार एक के बाद एक बैठक कर इन युवाओं की समस्याओं और उनकी परेशानियों को जानने की कोशिश कर रहे हैं। छात्र जदयू और युवा जदयू दोनों मिलकर जदयू और सरकार की नीतियों के सहारे चुनावी मैनेजमेंट का ताना-बाना बुन रहे हैं और इसे सही दिशा और नेतृत्व देने का काम प्रशांत किशोर और उनकी टीम कर रही है।

युवाओं को केंद्र में रखकर नीतियों का निर्माण करने वाले नीतीश ने पिछले कई वर्षों में कई सकारात्मक कोशिशें की हैं और कुशल युवा कार्यक्रम, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, मुख्यमत्री सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना, मुख्यंमंत्री अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना, मुख्यमंत्री छात्रावास अनुदान योजना, मुख्यमंत्री छात्रावास खाद्यान्न योजना एवं स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना जैसी योजनाओं ने युवाओं को संबल प्रदान किया है।

हालांकि कई योजनाएं अभी शुरूआती तौर पर लागू हुईं हैं लिहाज़ा उनके असर की चर्चा करना बेमानी होगी लेकिन इन योजनाओं का सीधा फायदा युवाओं और खासकर पिछड़े तबके के युवाओं को मिलेगा इसमें कोई शक नहीं। प्रशांत किशोर भी जानते हैं कि बिहार में मानव संसाधन के रूप में वो बेहतरीन खजाना है जो कभी खाली नहीं होने वाला।

मुख्यमंत्री और जदयू के मुखिया नीतीश कुमार लगातार आधी आबादी और युवाओं के लिए नई योजनाओं की शुरूआत में लगे हैं और उन्हें भी पूरा भरोसा है कि उनकी इस क़वायद का लाभ उन्हें आने वाले चुनावों में भी जरूर मिलेगा । जदयू उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर युवाओं को ज्यादा से ज्यादा टिकट देने की बात भी कह चुके हैं इसलिए इन कयासों को भी बल मिल रहा है कि युवा शक्ति के सहारे ही चुनावी वैतरणी पार की जाएगी। दहेज प्रथा, बाल विवाह के खिलाफ़ अभियान और शराबबंदी को लेकर मुख्यमंत्री के फैसलों ने आधी आबादी को पहले ही उनका मुरीद बना दिया है लेकिन युवाओं को लेकर थोड़ी भ्रम की स्थिति बरक़रार है।

पटना में लगातार युवाओं के कई संगठनों के विरोध में इसके स्वर सुनाई दे रहे हैं और जो सबसे बड़ा मुद्दा है वह है बेरोज़गारी और आर्थिक विपन्नता का । बिहार में नए उद्योग धंधों को लेकर कोई सकारात्मक स्वर जहां सुनाई नहीं दे रहें हैं वहीं, रोज़गार के बदले हुनरमंद और उद्यमी बनाने की उनकी क़वायद अभी दूर की कौड़ी ही है । विपक्ष का भी ये आरोप है कि राज्य में उद्यमियों के लिए बेहतर माहौल नहीं है और जो उद्यमी यहां पहले से थे वो भी पलायन करने की तैयारी कर रहे हैं लेकिन एक सवाल बड़ा ही मौजूं है कि लैंड लाक इस प्रदेश में मानव संसाधन के बेहतर इस्तेमाल की कोई कोशिश फेल क्यों हो जा रही है?

देश में भी बड़े पैमाने पर बेरोज़गारों की बढ़ती फौज हमारी नीतियों को मुंह चिढ़ाती ही नज़र आ रही है । हालांकि कुल मिलाकर देखें तो पता चलेगा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने युवाओं की बेरोज़गारी की चिंता को भांपते हुए ही ऐसे कार्यक्रम चलाये जिनसे युवा रोज़गार के लायक हो सकें या नहीं तो कम से कम हुनरमंद होकर अपना व्यवसाय शुरू कर सकें अथवा कोई उद्यम शुरू कर सकें। इसके साथ ही बेरोज़गारी की सूरत में स्वयं सहायता भत्ता देने की योजना भी चल रही है।

कुल मिलाकर बिहार में युवाओं को फोकस में रखकर ही नीतियों के क्रियान्वयन की कोशिशें की जा रही हैं । पार्टी को युवाओं का कितना साथ मिलेगा ये फिलहाल कह पाना मुश्किल है लेकिन प्रशांत किशोर और उनकी टीम जिस तरह से युवाओं से फेस टू फेस होकर उनकी चिंता दूर करने में लगे हैं उससे पार्टी के प्रति युवाओं की बड़ी दिलचस्पी बढ़ी है।

लोकसभा चुनाव में इन युवाओं का झुकाव अगर जदयू की तरफ होता है तो ज़ाहिर है सरकार इनके लिए कई नए कार्यक्रमों का ऐलान कर सकती है। मुख्यमंत्री बार बार कहते रहे हैं कि उनकी योजना यूनिवर्सल होती हैं और समाज में हाशिये पर खड़े लोगों के लिए वो और ज्यादा संजीदा रहते हैं। युवाओं के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों के निर्माण में भी जिस तरह से तेज़ी आयी है और इंजीनियरिंग, मेडिकल, एग्रीकल्चर, इनफार्मेशन टेक्नालॉजी, नर्सिंग समेत तमाम तरह की तकनीकी और रोज़गारपरक शिक्षा की सुगमता इन युवाओं के पलायन को भी रोकने में सार्थक हुई है।

अब आने वाले वक्त में बिहार के युवा देश की तरक्की में अपना अहम योगदान देंगे इसी सोच के साथ कुछ और नयी नीतियों के निर्माण पर काम चल रहा है । मुख्यमंत्री और प्रशांत किशोर की इसी जुगलबंदी से युवाओं में भी नए जोश का संचार हुआ है लेकिन जबतक इन युवाओं के चेहरे पर असली खुशी नहीं दिखेगी राज्य की तरक्की की बात बेमानी ही होगी । साक्षर और शिक्षित से आगे बढ़कर इन्हें स्वाबलंबी बनाने की नई क़वायद को सरज़मीं पर उतारना होगा तभी बेहतर बिहार, विकसित बिहार की परिकल्पना को साकार किया जा सकेगा ।