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बिहार लाइव स्टॉक मास्टर प्लान से कृषि रोडमैप का लक्ष्य हासिल करने में सहूलियत होगी : नीतीश

पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज पाँच वर्षीय ‘बिहार लाइव स्टॉक मास्टर प्लान‘ पुस्तिका का विमोचन एवं पशु मत्स्य संसाधन विभाग की विभिन्न जनोन्मुखी योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया। पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री श्री पशुपति कुमार पारस की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर मुख्यमंत्री ने शुभारम्भ किया। सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र स्थित ज्ञान भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में विभागीय सचिव डॉ० एन० विजयालक्ष्मी ने मुख्यमंत्री को पौधा एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर उनका अभिनन्दन किया। राज्य में अगले 15 वर्षों की आबादी को ध्यान में रखते हुए पशुधन संबंधी उत्पाद की आवश्यकताओं एवं इसके राष्ट्रीय लक्ष्य को देखते हुए 15 वर्षों का पशुधन प्रक्षेत्र विश्लेषण करने के पश्चात 5 वर्षीय लाइवस्टॉक मास्टर पालन तैयार किया गया है। इसे अंतर्राष्ट्रीय पशुधन अनुसंधान संस्थान, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की टीम एवं पशुधन प्रक्षेत्र से संबंधित विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया है।

रिमोट के जरिये शिलापट्ट का अनावरण कर मुख्यमंत्री ने एक साथ कई जनोन्मुखी योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया। उद्घाटित होनेवाली योजनाओं में डाटा प्रोसेसर आधारित स्वचालित दुग्ध संग्रहण इकाई की स्थापना, 1000 लीटर दैनिक क्षमता के 20 एवं 500 लीटर दैनिक क्षमता के 10 बल्क मिल्क कूलरों की स्थापना, राज्य के विभिन्न जिलों में मत्स्य हैचरी, तीन ग्लाईकॉल चिलर, 8 मिल्कोस्कैनर इकाई, पटना जिले के मसौढ़ी एवं बख्तियारपुर में फीश फीड मिल के साथ ही सहरसा, मधेपुरा एवं पटना में 4 प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय और 725 मैत्री (कृत्रिम गर्भाधान) केन्द्रों की स्थापना शामिल है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने राज्य के 17 जिलों में 33 प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय, 300 मीट्रिक टन दैनिक क्षमता का पशु आहार कारखाना, वर्तमान 60 हजार लीटर दैनिक क्षमता की डेयरी की क्षमता 2 लाख लीटर दैनिक क्षमता में करने की योजना का भी शिलान्यास किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बिहार लाइव स्टॉक मास्टर प्लान पुस्तिका का विमोचन भी किया।

बिहार लाइवस्टॉक मास्टर प्लान के विमोचन के मौके पर मुख्यमंत्री ने टेट्रापैक एप्पल ड्रिंक, पोषक सुधा मिल्क पाउडर एवं डेयरी व्हाइटनर का लोकार्पण किया। गव्य विकास योजना, समेकित बकरी विकास योजना एवं लेयर मुर्गी फार्म के लाभुकों को मुख्यमंत्री ने चेक भी प्रदान किये।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने विभागीय मंत्री के साथ ही अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि हमलोगों का तीसरा कृषि रोडमैप चल रहा है। वर्ष 2008 में चार वर्षीय पहला कृषि रोडमैप बना था उसका काफी प्रभाव देखने को मिला। इसके बाद वर्ष 2012 में दूसरा कृषि रोडमैप (2012-17) लागू किया गया। दूसरे कृषि रोडमैप में हर जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उसका विस्तृत स्वरूप तैयार किया गया जिसमंे कृषि, मत्स्य, राजस्व, सिंचाई जैसे 18 विभागों को शामिल किया गया जिसकी अच्छी उपलब्धि रही है और अब तीसरे कृषि रोडमैप (2017-22) पर काम आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक बिहार की ग्रामीण आबादी 89 प्रतिशत है जहाँ 76 प्रतिशत लोग अपनी आजीविका के लिए आज भी कृषि पर ही निर्भर हंै। आबादी के तीन-चैथाई हिस्से को हम आगे बढ़ाना चाहते हैं जिसको ध्यान में रखते हुए तीसरे कृषि रोड मैप के स्वरूप को और अधिक व्यापक बनाकर इसे क्रियान्वित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार में दुग्ध उत्पादन पहले ज्यादा नहीं था इस दिशा में कॉम्फेड के माध्यम से काफी काम हुआ जिसका नतीजा है कि जहाँ पहले कॉम्फेड द्वारा प्रतिदिन 4 लाख लीटर दूध का संग्रहण होता था वह अब बढ़कर पिछले वर्ष के दिसंबर माह में 18 लाख लीटर से भी ज्यादा हो गया है। 18 लाख लीटर संग्रहित की गयी दूध में से प्रतिदिन 14 लाख लीटर सीधे उपयोग में जबकि शेष दूध को पनीर, दूध पाउडर एवं अन्य उत्पादों के रूप में आपूर्ति की जा रही है। डेयरी के क्षेत्र में 2 लाख से भी ज्यादा महिलाओं ने को-आपरेटिव

सोसाइटी बनायी है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में जो काम हो रहा है इससे मुझे बेहद खुशी है। शराबबंदी के बाद बिहार में दूध की खपत और मिठाई की बिक्री काफी बढ़ी है और लोग अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा अपनी जरूरत की चीजों में खर्च कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के क्षेत्र में और अधिक गुंजाइश बनी है। हमलोगों ने अब टेट्रापैक दूध पाउडर भी उपलब्ध कराया है। उन्होंने कहा कि बिहार में मत्स्य पालन की संभावना काफी ज्यादा है। हमलोग मछली उत्पादन में दोगुनी वृद्धि करने में कामयाब हुए है लेकिन खपत के अनुरूप अब भी बिहार आत्मनिर्भर नहीं बन सका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार लाइव स्टॉक मास्टर प्लान बनाया गया है यह अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि बिहार में महिलाओं का स्वयं सहायता समूह जो पहले से चल रहा था वह काफी कम था, लेकिन अब उसकी संख्या बढ़कर सवा आठ लाख हो गयी है जिससे 96 लाख परिवार जुड़े हुए हैं। ऐसे में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से मुर्गीपालन किया जाय तो वह काफी प्रभावी साबित होगा। उन्होंने कहा कि मुर्गीपालन और बकरीपालन को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से करिएगा तो इसका काफी विस्तार होगा और गाँव-गाँव तक इसका फायदा पहुंचेगा। कृषि क्षेत्र में अनाज उत्पादन के अलावा, दूध, मछली, अंडा, मांस, फल, सब्जी आदि चीजें भी शामिल हंै और जी0एस0डी0पी0 में कृषि का जो योगदान है उसमे एक-तिहाई से भी ज्यादा भूमिका पशु एवं मत्स्य संसाधन क्षेत्र की है। क्योंकि बिहार बाढ़ एवं आपदा प्रभावित राज्य है ऐसे में पशुधन के माध्यम से ही लोग स्थायी रूप से अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारा मकसद है कि किसानों की आमदनी बढ़े। उन्होंने कहा कि किसान सिर्फ वह नहीं जिनके अपने खेत हैं बल्कि किसान वे सभी लोग हैं जो कृषि के क्षेत्र में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि बिहार लाइव स्टॉक मास्टर प्लान से कृषि रोडमैप का लक्ष्य हासिल करने में सहूलियत होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालन से अब सिर्फ दूध का ही संबंध नहीं है क्योंकि हमलोगों ने जैविक खेती पर भी जोर दिया है। इसके लिए गाय के गोबर और गोमूत्र से बने जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, बायो पेस्टीसाइडस जैसे बायो फर्टिलाइजर की जरूरत बढ़ेगी। ऐसे में दूध से जितनी आमदनी होगी उतनी आमदनी गोबर और गोमूत्र से भी संभव हो पाएगी। इसके लिए लोगों को प्रेरित करने की आवश्यकता है। जिलाधिकारी को निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क पर विचरण करनेवाली लावारिस गायों को गोशाले में रखने को लेकर जो पूर्व से अभियान चलाया जा रहा है उसे निरंतर जारी रखें। उन्होंने कहा कि गोशाले के माध्यम से होनेवाली आमदनी एवं तैयार होने वाले बायो फर्टिलाइजर के सन्दर्भ में प्रचारित करें और लोगों को अवेयर करें। उन्हांेने कहा कि राज्य में पिछले साल से जैविक तरीके से सब्जी की खेती करनेवाले लोगों को अनुदान मुहैया कराने की भी शुरुआत की गयी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों ने पशु विज्ञान विश्वविद्यालय बनाया है और अब ऐसे हॉस्पिटल भी डेवलप होने चाहिए जहाँ आउटडोर ट्रीटमेंट के साथ-साथ इनडोर ट्रीटमेंट की सुविधा हो। इस दिशा में पूरी मजबूती और गंभीरता के साथ अधिकारियों को ध्यान देने की जरूरत है। इसके अलावा एनिमल हसबैंडरी के जो हॉस्पिटल्स हैं वहां भी धीरे-धीरे यह व्यवस्था लागू होगी। उन्होंने कहा कि एनिमल हसबैंडरी की पढ़ाई करनेवाले छात्र बीच में ही पढ़ाई छोड़कर अन्य क्षेत्रों में चले जा रहे थे जिसको देखते हुए ऐसे छात्रों को प्रेरित करने के लिए हमलोगों ने स्कॉलरशिप देना शुरू किया। बहुत जल्द ही हमलोग मेडिकल चिकित्सकों की तरह पशु चिकित्सकों को भी सैलरी देने का फैसला लेनेवाले हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार के कृषि विज्ञान की तर्ज पर ही हम चाहते हैं कि बिहार में पशु विज्ञान केंद्र स्थापित हो। इसके लिए जो धनराशि की आवश्यकता होगी उसे राज्य सरकार मुहैया करायेगी। बिहार में इस क्षेत्र में काफी गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि मिलावट का दौर चल रहा है ऐसे में सहज तरीके से साधारण जांच के जरिये लोग कैसे दूध की शुद्धता की जांच कर सके इससे लोगों को अवगत कराने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सुधा का भी ज्यादा विस्तार करना है लेकिन क्वालिटी से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

पशु विज्ञान चिकित्सालय और पशु मत्स्य संसाधन विभाग इन चीजों पर विशेष रूप से ध्यान दे। बिहार का पर कैपिटा इनकम नेशनल एवरेज से 40 प्रतिशत कम है फिर भी हमारा ग्रोथ रेट 11.3 है। इसका कारण है विकेन्द्रित तरीके से विकास कार्यों का लाभ लोगों तक पहुंचना। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे बिहार में अब कहीं भी कोई भूख से शिकार व्यक्ति नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 में हम प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कृषि मंत्री थे तब हमने एग्रीकल्चर पालिसी बनाई थी जिसे सरकार ने स्वीकार किया था।

उस एग्रीकल्चर पालिसी के लिए मेरी खूब आलोचना हुई थी। आज बिहार में सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के माध्यम से आलू की खेती कर रही हैं। एनिमल हस्बैंडरी की पढ़ाई में लगे छात्रों से आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पढ़ाई के अलावा सोशल कांसेप्ट पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे एग्रीकल्चर रोडमैप का मकसद है कि 76 प्रतिशत लोगों की आमदनी बढ़े और हर हिन्दुस्तानी की थाल में बिहार का एक व्यंजन हो। इस दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आप सभी का सहयोग मिलेगा तो गरीब आदमी को आगे बढ़ने में सहूलियत होगी।

कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्री श्री सुशील मोदी, पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री श्री पशुपति कुमार पारस, मुख्यमंत्री के परामर्शी श्री अंजनी कुमार सिंह एवं पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की सचिव डॉ0 एन0 विजयलक्ष्मी ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर राजस्व पर्षद के सदस्य व अध्यक्ष श्री सुनील कुमार सिंह, विकास आयुक्त श्री सुभाष शर्मा, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ0 रामेश्वर सिंह, पशु वैज्ञानिक श्री वैरी शातिरो, पशु वैज्ञानिक श्री विजय भास्कर रेड्डी, पशु वैज्ञानिक डॉ एच0एन0 रहमान, सूचना जनसंपर्क विभाग के सचिव श्री अनुपम कुमार, कॉम्फेड की प्रबंध निदेशक श्रीमती शिखा श्रीवास्तव, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह, पशुपालन विभाग के निदेशक श्री विनोद सिंह गुन्जियाल, जिलाधिकारी श्री कुमार रवि, वरीय पुलिस अधीक्षक श्रीमती गरिमा मल्लिक सहित पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के अन्य अधिकारीगण, वैज्ञानिकगण, पशु विशेषज्ञ एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थीं।