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भारत में कोरोना के आँकड़े #GharBaithoNaIndiaSource : Ministry of Health and Family Welfare

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प्रधानमंत्री जन औषधि योजना गरीबों के लिए सबसे बड़ा वरदान : अश्विनी कुमार चौबे

पटना: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने प्रधानमंत्री जन औषधि योजना की तारीफ करते हुए इस योजना को गरीबों के लिए सबसे बड़ा वरदान बताया। उन्होंने कहा कि यह योजना स्वतंत्र भारत में गरीबों के लिए सबसे बड़ा वरदान साबित हुई है।

मंत्री अश्विनी कुमार ने कहा कि जन औषधि योजना की शुरुआत वर्ष 2008 में हुई थी, लेकिन इसमें प्रगति वर्ष 2014 के बाद हुई। वर्ष 2014 तक जन औषधि के केवल 86 आउटलेट थे जबकि आज इनकी संख्या 6200 है और 2024 तक हमारा लक्ष्य इसकी संख्या को 10,000 करने का है। वर्ष 2019 में जन औषधि केंद्रों से खरीदी गई दवा की कीमत 425 करोड़ रुपये रही। वहीं, अगर यह दवाई ब्रांडेड कंपनियों से खरीदी जाती तो इसका खर्च 2,625 करोड़ रुपये आता। यानी इससे 2200 करोड़ रुपये की बचत हुई है।

मंत्री ने बताया कि आज प्रतिमाह एक से सवा करोड़ लोग जन औषधि केंद्र से दवाई खरीदते हैं। इन केंद्रों में 900 प्रकार की मेडिसिन और 174 सर्जिकल आइटम मिलती है। यह संख्या बढ़ाकर 2000 और 300 क्रमश वर्ष  2024 तक करने का लक्ष्य है। 

नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन (NSSO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक 5.5 करोड़ से अधिक परिवार केवल एक वर्ष में गरीबी रेखा के तहत आ जाते हैं, क्योंकि उनके इलाज का खर्च उनकी आमदनी से ज्यादा होता है। इनमें से 3.8 करोड़ परिवार दवाई पर होने वाले खर्च की वजह से गरीब हो जाते हैं उन दवाओं का 72 प्रतिशत ग्रामीण आबादी और 68 प्रतिशत शहरी आबादी में होती है।

मंत्री कुमार ने आगे कहा कि पिछले साल प्रधानमंत्री ने तय किया था कि प्रत्येक 7 मार्च को "जन औषधि दिवस" मनाया जाएगा। हमने इसको जन औषधि सप्ताह मनाने का फैसला किया है। इन केंद्रों पर महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड्स मात्र एक रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है अब तक लगभग ढाई करोड सेनेटरी पैड बेचे जा चुका है। जन औषधि केंद्र के माध्यम से 6200 लोगों को प्रत्यक्ष और 14000 से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है।

वहीं, देश में तेजी से बढ़ रहे कोरोना वायरस के मामले पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी ने कहा कि लोगों को इस वायरस से डरने की जरूरत नहीं है।इसके लिए सबसे प्रमुख सावधानी रखने की जरूरत है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार पूरे तरीके से इस मामले पर विशेष ध्यान दे रही हैं। हम लोग हर तरीके से इसके रोकथाम के लिए लगे हुए हैं और उम्मीद करते हैं कि भारत में इसका विस्तार नहीं होगा।