माता सरस्वती विद्या, संगीत और ज्ञान की देवी मानी जाती है। देवी पुराण में सरस्वती को सावित्री, गायत्री, सती, लक्ष्मी और अम्बिका नाम से सम्बोधित किया गया है। इस सन्दर्भित विषय के सम्बन्ध में राष्ट्रीय सम्मान से अलंकृत व अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त ज्योतिष योग शोध केन्द्र, बिहार के संस्थापक दैवज्ञ पंo आरo केo चौधरी “बाबा-भागलपुर”, भविष्यवेत्ता एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ ने शास्त्रोंक्त मतानुसार बतलाया कि:- हमारे प्राचीन ग्रंथों में माता सरस्वती को वाग्देवी, वाणी, शारदा, भारती, वीणापाणी, विद्याधरी, सर्वमंगला आदि नामों से अलंकृत किया गया है। इनकी उपासना से सभी प्रकार की सिद्धियाॅ प्राप्त होती है।

ये माता संगीत शास्त्र की भी अधिष्ठात्री देवी हैं। ताल, स्वर, लय, राग-रागिनी आदि का प्रादुर्भाव भी इन्हीं से हुआ है। सात प्रकार के स्वरों द्वारा इनका स्मरण किया जाता है, इसलिए ये स्वरात्मिका कहलाती है। सप्तविध स्वरों का ज्ञान प्रदान करने के कारण ही इनका नाम सरस्वती है। मार्कण्डेय पुराण में कहा गया है कि नागराज आश्वतारा और उसके भाई काम्बाल ने सरस्वती से संगीत की शिक्षा प्राप्त की थी। सरस्वती सत्वगुणी प्रतिभा स्वरूप है। इसी गुण की उपलब्धि जीवन का परम लक्ष्य है।

कमल गतिशीलता का प्रतीक है। इससे निरपेक्ष जीवन जीने का भाव आता है। देवी भागवत के अनुसार सरस्वती को ब्राह्मा, विष्णु और महेश द्वारा भी पूजा जाता है। जो सरस्वती की आराधना करता है उसमें उनके वाहन हंस के नीर-छीर-विवेक गुण अपने-आप ही आ जाते हैं। माघ माह में शुक्ल पक्ष की पंचमी को वसंत पंचमी पर्व मनाया जाता है। इसी दिन सम्पूर्ण विधि-विधान से माता सरस्वती के पूजन का शास्त्रोंक्त नियम है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष 10 फरवरी 2019 (रविवार) को वसंत पंचमी पर्व मनाया जाएगा। जनसामान्य के साथ-साथ लेखक, कवि, कलाकार और संगीतकार इत्यादि भी माता सरस्वती की वन्दना करते हैं। माता सरस्वती की पूजा से रोग, शोक, चिंतायें और मन का संचित विकार भी दूर होता है।