BREAKING NEWS

महागठबंधन में किचकिच, राजधानी में उपेंद्र कुशवाहा, मांझी, सहनी, शरद व प्रशांत किशोर की बैठक◾PM मोदी, सोनिया , आडवाणी और अमित शाह से मिले उद्धव ठाकरे, कहा- किसी को भी NPR और CAA से डरने की जरूरत नहीं◾केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंत्रिसमूह की बैठक की अध्यक्षता की ◾शाहीनबाग : तीसरे दिन भी नहीं निकला हल, लेकिन बातचीत में सुरक्षा को लेकर बनी सहमति◾Trump के भारत दौरे से पहले SJM ने 'नॉनवेज दूध' को लेकर दी चेतावनी◾व्यापार समझौते को अधर में लटकाने के बाद ट्रंप बोले - Modi के पास Facebook पर जनसंख्या लाभ◾दलितों पर अत्याचार के मामले में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर कार्रवाई की जानी चाहिए - पासवान◾अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाकात के लिए अब तक कोई निमंत्रण नहीं : कांग्रेस ◾PM मोदी के बाद सोनिया गांधी से मिले महाराष्ट्र के CM उद्धव ठाकरे◾महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान पशुपतिनाथ मंदिर में दर्शन के लिए काठमांडू पहुंचे 6,000 से ज्यादा संत◾देश में राजनीति के समक्ष 'विश्वसनीयता का संकट' पैदा होने के लिए राजनाथ ने नेताओं को ठहराया जिम्मेदार◾कमलनाथ ने सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर Modi सरकार पर साधा निशाना, कहा - सबूत अब तक देश के लोगों को नहीं दिए◾कार और डंपर की टक्कर में पांच लोगों की मौत ◾संजय राउत ने AIMIM पर लगाया आरोप, कहा- भारतीय मुसलमानों के दिमाग में जहर घोलने का काम कर रही है AIMIM◾TOP 20 NEWS 21 February : आज की 20 सबसे बड़ी खबरें◾29 अप्रैल से कर पाएंगे केदारनाथ मंदिर में दर्शन ◾शाहीन बाग : नोएडा-फरीदाबाद रोड कुछ देर खोलने के बाद पुलिस ने फिर लगाई बैरिकेडिंग ◾CM बनने के बाद आज पहली बार दिल्ली आएंगे उद्धव ठाकरे,PM मोदी से करेंगे मुलाकात ◾देशभर में महाशिवरात्रि की धूम, मंदिरों में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब◾राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिए संकेत, भारत के साथ हो सकता है बेजोड़ व्यापार समझौता◾

...कभी ट्रेनों में टॉफियां बेचते थे कॉमेडी किंग महमूद

बाल कलाकार से हास्य अभिनेता के रूप में स्थापित हुए महमूद ने सफलता हासिल करने से पहले कई परेशानियों का सामना किया। कभी ट्रेनों में टॉफियां बेचीं, तो कभी ड्राइवर बने। अपने विशिष्ट अंदाज, हाव-भाव और आवाज से लगभग पांच दशक तक दर्शको को हंसाने और गुदगुदाने वाले महमूद ने फिल्म इंडस्ट्री में किंग ऑफ कामेडी का दर्जा हासिल किया लेकिन उन्हें इसके लिये काफी संघर्ष का सामना करना पड़ा था और यहां तक सुनना पड़ा था कि वो न तो अभिनय कर सकते है। ना ही कभी अभिनेता बन सकते हैं।

\"\"

Source

महमूद का जन्म 29 सितम्बर 1933 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता मुमताज अली बाम्बे टाकीज स्टूडियो में काम किया करते थे। घर की आर्थिक जरूरत को पूरा करने के लिये महमूद मलाड और विरार के बीच चलने वाली लोकल ट्रेनो में टॉफिया बेचा करते थे। बचपन के दिनों से ही महमूद का रूझान अभिनय की ओर था और वह अभिनेता बनना चाहते थे। अपने पिता की सिफारिश की वजह से महमूद को बाम्बे टाकीज की वर्ष 1943 मे प्रदर्शित फिल्म 'किस्मत' में अभिनेता अशोक कुमार के बचपन की भूमिका निभाने का मौका मिल गया।

\"\"

Source

इस बीच महमूद ने कार ड्राइव करना सीखा और निर्माता ज्ञान मुखर्जी के यहां बतौर ड्राइवर काम करने लगे क्योंकि इसी बहाने उन्हें मालिक के साथ हर दिन स्टूडियो जाने का मौका मिल जाया करता था जहां वह कलाकारो को करीब से देख सकते थे। इसके बाद महमूद ने गीतकार गोपाल सिंह नेपाली, भरत व्यास, राजा मेंहदी अली खान और निर्माता पी.एल. संतोषी के घर पर भी ड्राइवर का काम किया।

\"\"

Source

महमूद के किस्मत का सितारा तब चमका जब फिल्म 'नादान' की शूटिंग के दौरान अभिनेत्री मधुबाला के सामने एक जूनियर कलाकार लगातार दस रीटेक के बाद भी अपना संवाद नही बोल पाया। फिल्म निर्देशक हीरा सिंह ने यह संवाद महमूद को बोलने के लिये दिया गया जिसे उन्होंने बिना रिटेक एक बार में ही ओके कर दिया। इस फिल्म में महमूद को बतौर 300 रुपये प्राप्त हुये जबकि बतौर ड्राइवर महमूद को महीने मे मात्र 75 रुपये ही मिला करते थे। इसके बाद महमूद ने ड्राइवरी करने का काम छोड़ दिया और अपना नाम जूनियर आर्टिस्ट एशोसियेशन में दर्ज करा दिया और फिल्मों मे काम पाने के लिये संघर्ष करना शुरू कर दिया। इसके बाद बतौर जूनियर आर्टिस्ट महमूद ने दो बीघा जमीन, जागृति, सी.आई.डी., प्यासा जैसी फिल्मों में छोटे-मोटे रोल किये जिनसे उन्हें कुछ खास फायदा नहीं हुआ।

\"\"

Source

इसी दौरान महमूद को ए.भी.एम के बैनर तले बनने वाली फिल्म मिस मैरी के लिये स्क्रीन टेस्ट दिया। लेकिन ए.भी.एम बैनर ने महमूद को स्क्रीन टेस्ट में फेल कर दिया। महमूद के बारे में ए.भी .एम की राय कुछ इस तरह की थी कि वह ना कभी अभिनय कर सकते है ना ही अभिनेता बन सकते हैं। बाद के दिनो में ए.भी.बैनर की महमूद के बारे में न सिर्फ राय बदली साथ ही उन्होने महमूद को लेकर बतौर अभिनेता 'मैं सुदर हूं' का निर्माण भी किया।

\"\"

इसी दौरान महमूद रिश्तेदार कमाल अमरोही के पास फिल्म में काम मांगने के लिये गये तो उन्होंने महमूद को यहां तक कह दिया कि \"आप अभिनेता मुमताज अली के पुत्र है और जरूरी नही है कि एक अभिनेता का पुत्र भी अभिनेता बन सके। आपके पास फिल्मों में अभिनय करने की योज्ञता नहीं है। आप चाहे तो मुझसे कुछ पैसे  लेकर कोई अलग व्यवसाय कर सकते हैं।\"

\"\"

Source

इस तरह की बात सुनकर कोई भी मायूस हो सकता है और फिल्म इंडस्ट्री को अलविदा कह सकता है लेकिन महमूद ने इस बात को चैलेंज की तरह लिया और नये जोशो खरोश के साथ काम करना जारी रखा। इसी दौरान महमूद को बी.आर.चोपड़ा की कैंप से बुलावा आया और महमूद को फिल्म 'एक ही रास्ता' के लिये काम करने का प्रस्ताव मिला।

\"\"

महमूद ने महसूस किया कि अचानक इतने बड़े बैनर की फिल्म में काम मिलना महज एक संयोग नहीं है इसमें जरूर कोई बात है बाद में जब उन्हें मालूम हुआ कि यह फिल्म उन्हें अपनी पत्नी की बहन मीना कुमारी के प्रयास से हसिल हुयी है तो उन्होंने फिल्म एक ही रास्ता में काम करने से यह कहकर मना कर दिया कि वह फिल्म इंडस्ट्री में अपने बलबूते अभिनेता बनना चाहते हैं ना कि किसी की सिफारिश पर।

\"\"

Source

इस बीच महमूद ने संघर्ष करना जारी रखा। जल्द ही महमूद की मेहनत रंग लायी और वर्ष 1958 मे प्रदर्शित फिल्म 'परवरिश' में उन्हें एक अच्छी भूमिका मिल गयी। इस फिल्म में महमूद ने राजकपूर के भाई की भूमिका निभायी । इसके बाद उन्हें एल वी प्रसाद की फिल्म 'छोटी बहन' में काम करने का अवसर मिला जो उनके सिने करियर के लिये अहम फिल्म साबित हुयी। फिल्म छोटी बहन में बतौर पारिश्रमिक महमूद को 6000 रुपये मिले। फिल्म की सफलता के बाद बतौर अभिनेता महमूद फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गये। फिल्म में उनके अभिनय को देख 'टाइम्स ऑफ इंडिया' अखबार ने उनकी जमकर सराहना की ।

\"\"

वर्ष 1961 में महमूद को एम.वी.प्रसाद की फिल्म ससुराल.. में काम करने का अवसर मिला। इस फिल्म की सफलता के बाद बतौर हास्य अभिनेता महमूद फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने मे सफल हो गये। फिल्म ससुराल में उनकी जोड़ी अभिनेत्री शुभा खोटे के साथ काफी पसंद की गयी। इसी वर्ष महमूद ने अपनी पहली फिल्म 'छोटे नवाब'  का निर्माण किया। इसके साथ ही इस फिल्म के जरिये महमूद ने आर.डी. बर्मन उर्फ पंचम दा को बतौर संगीतकार फिल्म इंडस्ट्री में पहली बार पेश किया। अपने चरित्र में आई एकरूपता से बचने के लिये महमूद ने अपने आप को विभिन्न प्रकार की भूमिका मे पेश किया इसी क्रम में वर्ष 1968 में प्रदर्शित फिल्म 'पड़ोसन' का नाम सबसे पहले आता है। फिल्म पड़ोसन में महमूद ने नकारात्मक भूमिका निभाई और दर्शको की वाहवाही लूटने मे सफल रहे। फिल्म मे महमूद पर फिल्माया 'एक गाना एक चतुर नार करके श्रृंगार' काफी लोकप्रिय हुआ।

\"\"

Source

वर्ष 1970 मे प्रदर्शित फिल्म 'हमजोली' में महमूद के अभिनय के विविध रूप दर्शको को देखने को मिले। इस फिल्म मे महमूद ने तिहरी भूमिका निभायी और दर्शको का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। महमूद ने कई फिल्मों का निर्माण और निर्देशन भी किया। महमूद ने कई फिल्मों मे अपने पाश्र्वगायन से भी श्रोताओ को अपना दीवाना बनाया। महमूद को अपने सिने कैरियर मे तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अपने पांच दशक से लंबे सिने कैरियर में करीब 300 फिल्मों में अपने अभिनय का जौहर दिखाकर महमूद 23 जुलाई 2004 को इस दुनिया से हमेशा के लिए रूखसत हो गये।