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'संकट' में अर्थव्यवस्था, रूपये और शेयर बाजार में गिरावट

मुंबई : भारतीय अर्थव्यवस्था में कुछ दिनों से गिरावट थमने का नाम ही नहीं ले रहा है इसी परिणामस्वरूप मंगलवार को भी शेयर बज़ारों में ज़ोरदार गिरावट देखने को मिली है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दो प्रतिशत से अधिक टूट गए। वहीं अंतर बैंक विदेशी विनियम बाजार में रुपया भी 97 पैसे की गिरावट के साथ 72.39 प्रति डॉलर के अपने नौ माह के निचले स्तर पर आ गया। 

सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के निराशाजनक आंकड़ों, बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर सुस्त पड़ने और वाहन कंपनियों की अगस्त माह की बिक्री में दस प्रतिशत से अधिक की गिरावट से निवेशकों ने मंगलवार को घबराहटपूर्ण बिकवाली की जिससे बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 770 अंक नीचे आ गया। निफ्टी भी 225 अंक टूटकर बंद हुआ। सेंसेक्स और निफ्टी में यह करीब 11 माह की एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। बिकवाली का दौर चलने से निवेशकों की बाजार हैसियत 2.55 लाख करोड़ रुपये घट गई। बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों पर आधारित सेंसेक्स कारोबार के दौरान 867 अंक तक नीचे आने के बाद अंत में 769.88 अंक यानी 2.06 प्रतिशत के नुकसान से 36,562.91 अंक पर बंद हुआ।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 225.35 अंक या 2.04 प्रतिशत के नुकसान से 10,797.90 अंक रह गया। सेंसेक्स की कंपनियों में आईसीआईसीआई बैंक, टाटा स्टील, वेदांता, एचडीएफसी, इंडसइंड बैंक, टाटा मोटर्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज और ओएनजीसी के शेयर 4.45 प्रतिशत तक गिर गये। रुपये में गिरावट के बीच दो आईटी कंपनियों टेकएम और एचसीएल टेक के शेयर मामूली लाभ के साथ बंद हुए।बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप में 1.65 प्रतिशत तक की गिरावट आई। अंतर बैंक विदेशी विनिमय बाजार में मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 97 पैसे के नुकसान से 72.39 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

एमके वेल्थ मैनेजमेंट के शोध प्रमुख जोसफ थॉमस ने कहा, ‘‘पहली तिमाही के जीडीपी की वृद्धि दर पांच प्रतिशत पर आने और बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर सुस्त पड़ने से मुख्य रूप से बाजार में गिरावट आई। इसके अलावा नकारात्मक वैश्विक संकेतकों, अमेरिका चीन व्यापार युद्ध और दुनिया की अन्य अर्थव्यवस्थाओं में सुस्ती के रुख से भी धारणा प्रभावित हुई।’’ थॉमस ने कहा कि रोजगार के निचले स्तर और वित्त की उपलब्धता नहीं होने से विशेषरूप से ग्रामीण इलाकों में कमजोर घरेलू खपत की स्थिति बनी है। इन मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।

सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के दस बैंकों के एकीकरण की घोषणा की है। इससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयर भी टूट गए। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से निवेशकों में यह संदेश गया है कि सरकार न केवल बैंकों में नई पूंजी डाल रही है बल्कि वह उनके कामकाज संचालन में भी सुधार चाहती है। लेकिन फिर भी बैंकों का यह विलय बैंकों की भौगोलिक उपस्थिति और सांस्कृतिक विविधता को देखते हुये परेशान करन वाला लगता है। सरकार ने हालांकि, अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए कई कदम उठाए हैं लेकिन कमजोर वृहद आर्थिक आंकड़ों तथा अगस्त महीने में वाहन कंपनियों की बिक्री में दस प्रतिशत से अधिक की गिरावट से बाजार की धारणा प्रभावित हुई है। 

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के जीडीपी वृद्धि के आंकड़े गत शुक्रवार शेयर बाजार में कारोबार बंद होने के बाद जारी हुये। पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि पांच प्रतिशत रही जो कि पिछले छह साल में सबसे कम रही है। विनिर्माण और कृषि क्षेत्र के कमजोर प्रदर्शन को इसकी प्रमुख वजह बताया गया। इसके साथ ही आठ बुनियादी क्षेत्र के उद्योगों की वृद्धि दर जुलाई में घटकर 2.1 प्रतिशत रह गई। इसका भी कारोबारी धारणा पर असर रहा। अन्य एशियाई बाजारों..चीन, हांगकांग, दक्षिण कोरिया और जापान में मिलाजुला रुख रहा। शुरुआती कारोबार में यूरोपीय बाजार भी नुकसान में कारोबार कर रहे थे। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट कच्चा तेल 1.07 प्रतिशत के नुकसान से 58.03 डॉलर प्रति बैरल पर चल रहा था।