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कपड़े पर GST रेट 5 फीसदी बरकरार रखा गया, फुटवियर को लेकर लिया गया यह बड़ा फैसला

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई में जीएसटी परिषद की 46वीं बैठक खत्म हो चुकी है। इससे पहले बैठक के बाद लिए गए फैसलों के बारे में बताते हुए हिमाचल प्रदेश के उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जीएसटी परिषद ने कपड़ों पर जीएसटी की दर में वृद्धि 5% से 12% तक करने को स्थगित करने का निर्णय लिया है। परिषद फरवरी 2022 में अपनी अगली बैठक में इस मामले की समीक्षा करेगी।ऐसे में नए साल में कपड़े महंगे नहीं होंगे।

अपने संबोधन में सीतारमण ने कहा कि यह जीएसटी काउंसिल की इमरजेंसी मीटिंग थी। इस बैठक का एकमात्र एजेंडा था। इससे पहले सितंबर के महीने में जीएसटी काउंसिल की 45वीं बैठक हुई थी। उस बैठक में टैक्स रेट को लेकर कुछ फैसले लिए गए थे। इस बैठक में उस टैक्स रेट को वापस लेने पर विचार किया गया।

कई राज्य कर रहे थे विरोध

काउंसिल की बैठक में एक ओर जहां कपड़ों पर जीएसटी दरों में बढ़ोतरी को फरवरी 2022 तक के लिए टाल दिया गया है। गौरतलब है कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों द्वारा इस कदम का विरोध किए जाने के बाद जीएसटी परिषद ने अपने फैसले पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में और राज्य के समकक्षों की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद की 46 वीं बैठक ने अपनी अगली बैठक में इस मुद्दे पर और विचार करने का निर्णय लिया।

नए साल से महंगे होंगे जूते-चप्पल

जीएसटी काउंसिल की बैठक में निर्णय लिया गया कि 1 जनवरी, 2022 से सभी फुटवियर पर 12 फीसदी जीएसटी लगेगा, चाहे इन जूते-चप्पलों की कीमत कुछ भी क्यों न हो। यानी जूता चाहे 100 रुपये का हो या फिर 1000 रुपये का सभी पर 12 फीसदी की दर से जीएसटी लगेगा। इसके साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि रेडीमेड कपड़ों सहित कपास को छोड़कर कपड़ा उत्पादों पर 12 प्रतिशत समान जीएसटी दर लागू होगी। 

अभी कपड़ों और जूतों पर आम आदमी कितना टैक्स चुकाता है?

1000 रुपए तक के जूतों पर 5 फीसदी जीएसटी लिया जाता है। वहीं, कपड़ों की बात करें तो मैनमेड यानी आदमी द्वारा बनाई गए फाइबर, यार्न और फैब्रिक्स पर जीएसटी की दर फिलहाल 18 फीसदी, 12 फीसदी और 5 फीसदी है। जूतों की तरह 1,000 रुपए तक के कपड़ों पर 5 फीसदी का जीएसटी लगता है। आर्टिफिशियल और सिंथेटिक यार्न पर जीएसटी की दर को बदलकर 12 फीसदी कर दिया गया है। लेकिन कॉटन, सिल्क, वुल यार्न जैसी नैचुरल यार्न पर 5 फीसदी का टैक्स लगता है।

हथकरघा उद्योग पर पड़ रहा था असर

फिलहाल मानव-निर्मित रेशे पर 18 फीसदी की दर से जीएसटी लगता है जबकि इससे बने धागे पर दर 12 फीसदी और कपड़े के मामले में पांच फीसदी कर लगता है। रेड्डी ने कहा कि जीएसटी परिषद से अनुरोध किया गया कि हथकरघा कारीगरों पर पड़ने वाले असर का व्यवस्थित अध्ययन करने के बाद कपड़ों पर जीएसटी बढ़ाने का फैसला किया जाए।