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निवेश, आर्थिक वृद्धि में तेजी लाने को एक लाख करोड़ रुपये के पैकेज की उद्योग जगत की मांग

उद्योग जगत ने बृहस्पतिवार को निवेश में तेजी लाने और सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये एक लाख करेाड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज की मांग की। उद्योग प्रमुखों ने यह भी कहा कि सरकार ने आर्थिक वृद्धि में तेजी लाने के लिये उन्हें जल्दी ही कदम उठाने का आश्वासन दिया है। 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर में तेजी लाने के उपायों पर विचार के लिये शीर्ष उद्योगपतियों की बैठक बुलायी थी। बैठक में उद्योग मंडल एसोचैम के अध्यक्ष बी के गोयनका ने कहा कि वैश्विक और घरेलू बाजार में मौजूदा नरमी के बीच त्वरित समाधान की जरूरत है। 

उन्होंने कहा, ‘‘अर्थव्यवस्था में प्रोत्साहन पैकेज के रूप में हस्तक्षेप की जरूरत है। हमने एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रोत्साहन पैकेज का सुझाव दिया है।’’ तीन घंटे चली बैठक के बाद उद्योग जगत ने कहा कि सरकार ने उद्योग और आर्थिक वृद्धि में तेजी लाने को लेकर जल्दी ही कदम उठाने का आश्वासन दिया। 

जेएसडब्ल्यू समूह के चेयरमैन सज्जन जिंदल ने कहा, ‘‘यह निर्णय किया गया है कि सरकार उद्योगों को पटरी पर लाने के लिये कदम उठाने जा रही है...। हमें वित्त मंत्री से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।’’ उन्होंने कहा कि मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में आश्वासन दिया कि जल्दी ही समाधान के उपाय किये जाएंगे। 

जिंदल ने कहा कि इस्पात, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी तथा वाहन क्षेत्रों के सामने कई चुनौतियां हैं। पीरामल एंटरप्राइजेज के चेयरमेन अजय पिरामल ने कहा कि बैठक में यह मामला भी उठाया गया कि बैंक कर्ज देने में रूचि नहीं ले रहे हैं। 

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ऐसा नहीं है कि बैंकों में नकदी की कोई कमी है लेकिन कर्ज नहीं दिया जा रहा। जहां तक एनबीएफसी क्षेत्र का सवाल है, उसका अर्थव्यवस्था पर दबाव है।’’ 

पीरामल ने कहा कि एनबीएफसी मुद्दा वाहन, आवास ऋण और लघु तथा मझोले उद्यम (एमएसएमई) जैसे क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है। 

उन्होंने कहा, ‘‘मुझसे कहा गया कि जल्दी इस संदर्भ में कदम उठाये जाएंगे। इसीलिए हम उसका इंतजार करेंगे।’’ बैठक में सरकार ने आश्वस्त किया कि कंपनी सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के तहत खर्च प्रावधानों का अनुपालन नहीं करने पर कंपनी कानून के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई पर जोर नहीं दिया जाएगा। 

पीरामल के अनुसार उद्योग ने मांग की कि सीएसआर खर्च पर निगरानी का परिणाम जेल नहीं होना चाहिए। उद्योग मंडल सीआईआई के उपाध्यक्ष टीवी नरेन्द्रन ने कहा कि सरकार ने देश की आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहित करने के उपायों के बारे में विचार मांगे। 

उन्होंने कहा, ‘‘हमने प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की। वाहन क्षेत्र में नरमी का इस्पात क्षेत्र पर प्रभाव होगा। फिक्की की पूर्व अध्यक्ष ज्योत्सना सुरी ने कहा कि नीतिगत दर रेपो में जो कटौती की गयी है, उसका लाभ कर्जदारों को मिलना चाहिए।